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Lokhitkranti > उत्तराखंड > Padma Bhushan Award: पूर्व मुख्यमंत्री भगत सिंह कोश्यारी को आज मिलेगा पद्म भूषण सम्मान, जानिए संघर्ष और जनसेवा से भरा उनका सफर
उत्तराखंड

Padma Bhushan Award: पूर्व मुख्यमंत्री भगत सिंह कोश्यारी को आज मिलेगा पद्म भूषण सम्मान, जानिए संघर्ष और जनसेवा से भरा उनका सफर

Lokhit Kranti
Last updated: 2026-05-25 7:29 पूर्वाह्न
By Lokhit Kranti 3 महीना ago
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Padma Bhushan Award
Padma Bhushan Award: पूर्व मुख्यमंत्री भगत सिंह कोश्यारी को आज मिलेगा पद्म भूषण सम्मान, जानिए संघर्ष और जनसेवा से भरा उनका सफर
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Padma Bhushan Award: उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री और महाराष्ट्र के पूर्व राज्यपाल Bhagat Singh Koshyari को आज देश के प्रतिष्ठित नागरिक सम्मानों में शामिल Padma Bhushan Award से सम्मानित किया जाएगा। राष्ट्रपति Droupadi Murmu उनके लंबे सार्वजनिक जीवन, शिक्षा, समाज सेवा और जनकल्याण में दिए गए योगदान के लिए यह सम्मान प्रदान करेंगी। उत्तराखंड में ‘भगत दा’ के नाम से लोकप्रिय भगत सिंह कोश्यारी का जीवन संघर्ष, सादगी और राष्ट्रसेवा की मिसाल माना जाता है।

Contents
Padma Bhushan Award से सम्मानित होंगे भगत दापहाड़ के छोटे गांव से शुरू हुआ सफरशिक्षा और समाज सेवा में अहम योगदानपत्रकारिता और सामाजिक चेतना से भी जुड़ावआपातकाल के दौरान जेल भी गएमुख्यमंत्री से राज्यपाल तक का सफरलेखक के रूप में भी बनाई पहचानउत्तराखंड के लिए गौरव का क्षण

Padma Bhushan Award से सम्मानित होंगे भगत दा

केंद्र सरकार की ओर से सार्वजनिक मामलों और जनसेवा के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान देने वाले व्यक्तियों को Padma Bhushan Award दिया जाता है। इस बार यह सम्मान भगत सिंह कोश्यारी को दिए जाने की घोषणा के बाद उत्तराखंड में खुशी का माहौल है। राजनीतिक और सामाजिक क्षेत्र से जुड़े लोगों ने इसे राज्य के लिए गौरव का क्षण बताया है।

भगत सिंह कोश्यारी ने शिक्षा, सामाजिक जागरूकता, राजनीति और संगठनात्मक कार्यों में कई दशकों तक सक्रिय भूमिका निभाई। उनका व्यक्तित्व केवल एक राजनेता तक सीमित नहीं रहा, बल्कि वे शिक्षक, लेखक, पत्रकार और सामाजिक कार्यकर्ता के रूप में भी पहचाने जाते हैं।

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पहाड़ के छोटे गांव से शुरू हुआ सफर

भगत सिंह कोश्यारी का जन्म 17 जून 1942 को उत्तराखंड के Bageshwar जिले के दूरस्थ गांव पलानधुरा में हुआ था। पहाड़ी और सीमित संसाधनों वाले क्षेत्र में जन्म लेने के बावजूद उन्होंने शिक्षा को अपने जीवन का सबसे बड़ा आधार बनाया। उन्होंने अल्मोड़ा कॉलेज से अंग्रेजी साहित्य में स्नातकोत्तर की पढ़ाई पूरी की, जो उस समय पहाड़ी क्षेत्रों के युवाओं के लिए बड़ी उपलब्धि मानी जाती थी।

Padma Bhushan Award पाने वाले भगत दा ने अपने करियर की शुरुआत शिक्षक के रूप में की। वर्ष 1964-65 के दौरान उन्होंने उत्तर प्रदेश के एटा जिले में अध्यापन कार्य किया। बाद में उन्होंने शिक्षा और समाज सेवा को अपना मुख्य उद्देश्य बना लिया।

शिक्षा और समाज सेवा में अहम योगदान

भगत सिंह कोश्यारी ने 1966 में पिथौरागढ़ में ‘सरस्वती शिशु मंदिर’ की स्थापना की। उस दौर में पहाड़ी क्षेत्रों में शिक्षा के संसाधन बेहद सीमित थे। ऐसे में उनका यह प्रयास ग्रामीण और दूरस्थ इलाकों के बच्चों के लिए नई उम्मीद बनकर सामने आया।

उन्होंने केवल स्कूल स्थापना तक खुद को सीमित नहीं रखा, बल्कि विवेकानंद इंटर कॉलेज और अन्य शैक्षणिक संस्थानों के विकास में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। वे राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) से भी लंबे समय तक जुड़े रहे और संगठनात्मक स्तर पर शिक्षा व समाज सेवा के कई कार्यों का नेतृत्व किया।

स्थानीय लोग बताते हैं कि भगत दा हमेशा शिक्षा को समाज परिवर्तन का सबसे बड़ा माध्यम मानते रहे हैं। यही कारण है कि आज भी उत्तराखंड के कई ग्रामीण इलाकों में उनके योगदान को सम्मान के साथ याद किया जाता है।

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पत्रकारिता और सामाजिक चेतना से भी जुड़ाव

Padma Bhushan Award से सम्मानित होने जा रहे भगत सिंह कोश्यारी ने सामाजिक जागरूकता बढ़ाने के लिए पत्रकारिता के क्षेत्र में भी काम किया। उन्होंने पिथौरागढ़ से हिंदी साप्ताहिक ‘पर्वत पीयूष’ का प्रकाशन शुरू किया। इस अखबार के जरिए उन्होंने पहाड़ के मुद्दों, शिक्षा, पलायन और सामाजिक समस्याओं को प्रमुखता से उठाया।

इसके अलावा वे कुमाऊं विश्वविद्यालय की कार्यकारी परिषद के सदस्य भी रहे। शिक्षा नीति और संस्थागत विकास में उनकी सक्रिय भूमिका को काफी महत्वपूर्ण माना जाता है।

आपातकाल के दौरान जेल भी गए

देश में आपातकाल के दौरान भगत सिंह कोश्यारी को मीसा (MISA) कानून के तहत गिरफ्तार किया गया था। उस दौर में उन्होंने लोकतांत्रिक मूल्यों और वैचारिक संघर्ष के लिए जेल तक का सफर तय किया। राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार यह दौर उनके सार्वजनिक जीवन का अहम मोड़ साबित हुआ।

बाद में वे उत्तर प्रदेश विधान परिषद के सदस्य बने और उत्तराखंड राज्य गठन आंदोलन से भी सक्रिय रूप से जुड़े रहे। उत्तराखंड बनने के बाद वे राज्य के पहले मंत्रिमंडल में कैबिनेट मंत्री बने।

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मुख्यमंत्री से राज्यपाल तक का सफर

भगत सिंह कोश्यारी ने उत्तराखंड के मुख्यमंत्री के रूप में भी कार्य किया। इसके अलावा वे विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष भी रहे। वर्ष 2008 में वे राज्यसभा के लिए चुने गए और 2014 में नैनीताल-उधम सिंह नगर सीट से लोकसभा सांसद बने।

ऊर्जा मंत्री के रूप में उन्होंने टिहरी हाइड्रो प्रोजेक्ट को आगे बढ़ाने में अहम भूमिका निभाई। वहीं सांसद रहते हुए उन्होंने ऋषिकेश-कर्णप्रयाग रेलवे लाइन, वन रैंक वन पेंशन और पहाड़ी क्षेत्रों में आधारभूत ढांचे के विकास से जुड़े मुद्दे संसद में मजबूती से उठाए। 5 सितंबर 2019 को उन्हें Maharashtra का राज्यपाल नियुक्त किया गया। बाद में उन्होंने गोवा के अतिरिक्त राज्यपाल का दायित्व भी संभाला।

लेखक के रूप में भी बनाई पहचान

Padma Bhushan Award पाने वाले भगत सिंह कोश्यारी राजनीति और समाज सेवा के साथ-साथ लेखन में भी सक्रिय रहे। उन्होंने ‘उत्तरांचल प्रदेश क्यों’ और ‘उत्तरांचल प्रदेश: संघर्ष एवं समाधान’ जैसी किताबें लिखीं। इन पुस्तकों में उन्होंने उत्तराखंड राज्य आंदोलन और क्षेत्रीय विकास के मुद्दों को विस्तार से रखा।

उत्तराखंड के लिए गौरव का क्षण

भगत सिंह कोश्यारी को Padma Bhushan Award मिलने से उत्तराखंड में खुशी और गर्व का माहौल है। सामाजिक संगठनों, राजनीतिक दलों और शिक्षा जगत से जुड़े लोगों ने इसे पहाड़ की संस्कृति, संघर्ष और सेवा भावना का सम्मान बताया है।

आज जब राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु उन्हें यह सम्मान प्रदान करेंगी, तब यह केवल एक व्यक्ति का सम्मान नहीं होगा, बल्कि उत्तराखंड की उस विचारधारा का भी सम्मान होगा, जिसने हमेशा सेवा, शिक्षा और राष्ट्रहित को प्राथमिकता दी है।

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