Ramganga River Blockage: उत्तराखंड के सीमांत जनपद पिथौरागढ़ में लगातार हो रही भारी बारिश के बीच एक बार फिर प्रकृति ने लोगों की चिंता बढ़ा दी है। थल-मुनस्यारी मोटर मार्ग पर हरड़िया के पास पहाड़ी दरकने से भारी मात्रा में मलबा और विशाल बोल्डर रामगंगा नदी में गिर गए, जिससे नदी का प्राकृतिक प्रवाह पूरी तरह बाधित हो गया। इसके परिणामस्वरूप Ramganga River Blockage की स्थिति पैदा हो गई और नदी में करीब 600 मीटर लंबी अस्थायी झील बन गई है। प्रशासन के अनुसार झील का जलस्तर लगातार बढ़ रहा है, जिससे आसपास के कई गांवों पर खतरा मंडराने लगा है।
स्थिति को देखते हुए जिला प्रशासन, सिंचाई विभाग और स्थानीय प्रशासन ने क्षेत्र में निगरानी बढ़ा दी है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि झील का पानी अचानक टूटकर बहता है तो निचले इलाकों में अचानक बाढ़ जैसी स्थिति पैदा हो सकती है। यही कारण है कि पूरे घटनाक्रम पर लगातार नजर रखी जा रही है।
लगातार बारिश के बाद हुआ भूस्खलन
पिछले कई दिनों से पिथौरागढ़ जिले के ऊंचाई वाले क्षेत्रों में लगातार बारिश दर्ज की जा रही है। 4 जुलाई को हुई मूसलाधार बारिश के बाद हरड़िया क्षेत्र की पहाड़ी का एक बड़ा हिस्सा दरक गया। भारी मात्रा में मलबा, चट्टानें और बोल्डर सीधे रामगंगा नदी में गिर गए, जिससे नदी का बहाव रुक गया और Ramganga River Blockage की स्थिति उत्पन्न हो गई।
नदी का पानी मलबे के पीछे जमा होने लगा और देखते ही देखते करीब 600 मीटर लंबी झील बन गई। स्थानीय लोगों के अनुसार रविवार तक झील का फैलाव लगभग 800 मीटर तक पहुंच गया था और इसका विस्तार लगातार भैंसकोट गांव की दिशा में बढ़ रहा है।
कई गांवों पर बढ़ा खतरा
प्रशासन के अनुसार इस झील के बनने से भैंसखाल, बासगुन, छीपा सहित आसपास के पांच गांवों की लगभग 600 से 700 आबादी संभावित खतरे के दायरे में आ गई है। ग्रामीणों में चिंता का माहौल है क्योंकि यदि झील अचानक टूटती है तो तेज बहाव के साथ पानी नीचे के गांवों में तबाही मचा सकता है।
स्थानीय प्रशासन ने संवेदनशील क्षेत्रों की निगरानी शुरू कर दी है और लोगों से नदी के किनारे नहीं जाने की अपील की है। साथ ही किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए संबंधित विभागों को अलर्ट मोड पर रखा गया है।
अस्थायी पुल बहने से बढ़ी परेशानी
Ramganga River Blockage का असर केवल नदी तक सीमित नहीं है, बल्कि स्थानीय जनजीवन भी प्रभावित हुआ है। रामगंगा नदी पर बने अस्थायी पुल पानी का दबाव बढ़ने के कारण बह गए हैं। इन पुलों का उपयोग पिथौरागढ़ और बागेश्वर जिलों के कई गांवों के लोग रोजाना आवाजाही के लिए करते थे।
अब पुल बह जाने के कारण ग्रामीणों को कई किलोमीटर लंबा वैकल्पिक मार्ग अपनाना पड़ रहा है। इससे स्कूल जाने वाले बच्चों, मरीजों, किसानों और दैनिक कामकाज करने वाले लोगों को काफी कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है।
पहले भी बन चुकी हैं ऐसी झीलें
हरड़िया और रातीगाड़ क्षेत्र लंबे समय से भूस्खलन प्रभावित इलाकों में शामिल रहे हैं। विशेषज्ञ बताते हैं कि इस क्षेत्र में पहले भी कई बार नदी का प्रवाह मलबे से बाधित हो चुका है। वर्ष 2013, 2016 और 2024 में भी रामगंगा नदी में इसी तरह अस्थायी झीलें बनी थीं।
भूवैज्ञानिकों का कहना है कि इस प्रकार की झीलें सामान्य दिखाई देती हैं, लेकिन इनमें सबसे बड़ा खतरा इनके अचानक टूटने का होता है। यदि मलबे का प्राकृतिक बांध अचानक टूट जाए तो नीचे के क्षेत्रों में कुछ ही मिनटों में तेज बाढ़ आ सकती है, जिससे भारी नुकसान होने की आशंका रहती है।
प्रशासन ने बढ़ाई निगरानी
मुनस्यारी के एसडीएम डॉ. ललित मोहन तिवारी ने बताया कि हरड़िया समेत पूरे संवेदनशील क्षेत्र का निरीक्षण किया गया है। Ramganga River Blockage की सूचना जिला प्रशासन को भेज दी गई है और हालात पर लगातार नजर रखी जा रही है।
उन्होंने कहा कि सभी संबंधित विभागों को अलर्ट रहने के निर्देश दिए गए हैं तथा किसी भी संभावित आपदा से निपटने के लिए आवश्यक तैयारियां की जा रही हैं। यदि स्थिति गंभीर होती है तो प्रभावित गांवों के लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने की भी व्यवस्था की जाएगी।
सिंचाई विभाग तैयार कर रहा तकनीकी योजना
घटनास्थल का निरीक्षण सिंचाई विभाग के अपर सहायक अभियंता एसएस बिष्ट और अवर अभियंता विनय रावत ने भी किया। अधिकारियों ने झील की वर्तमान स्थिति का आकलन किया और सुरक्षित तरीके से पानी की निकासी के लिए तकनीकी रिपोर्ट तैयार करने का काम शुरू कर दिया है।
अधिकारियों के अनुसार हरड़िया नाले का वैज्ञानिक तरीके से चैनलाइजेशन करना भी बेहद जरूरी है ताकि भविष्य में इस तरह की घटनाओं की पुनरावृत्ति को कम किया जा सके। तकनीकी रिपोर्ट जिला प्रशासन को भेजी जाएगी, जिसके आधार पर आगे की कार्रवाई तय होगी।
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स्थानीय लोगों ने की तत्काल कार्रवाई की मांग
क्षेत्र के ग्रामीणों का कहना है कि हर बारिश के मौसम में इस इलाके में भूस्खलन और नदी अवरुद्ध होने की घटनाएं सामने आती हैं, लेकिन अब तक स्थायी समाधान नहीं निकाला जा सका है। लोगों ने प्रशासन से मांग की है कि झील का पानी सुरक्षित तरीके से निकाला जाए और जल्द से जल्द वैकल्पिक पुल या आवागमन की व्यवस्था की जाए।
ग्रामीणों का कहना है कि यदि समय रहते कदम नहीं उठाए गए तो भविष्य में बड़ा हादसा हो सकता है। साथ ही उन्होंने संवेदनशील पहाड़ियों के स्थायी उपचार और भू-सुरक्षा कार्यों को प्राथमिकता देने की भी मांग की है।
मानसून में बढ़ी चुनौती
उत्तराखंड में मानसून के दौरान भूस्खलन, सड़क बंद होने और नदियों का उफान सामान्य घटनाएं हैं, लेकिन Ramganga River Blockage जैसी स्थिति प्रशासन के लिए अतिरिक्त चुनौती बन जाती है। विशेषज्ञों का मानना है कि पर्वतीय क्षेत्रों में समय-समय पर भू-वैज्ञानिक सर्वे, संवेदनशील ढलानों का उपचार और जल निकासी की वैज्ञानिक व्यवस्था ही ऐसे खतरों को कम कर सकती है।
फिलहाल प्रशासन स्थिति पर लगातार नजर बनाए हुए है। आने वाले दिनों में मौसम की स्थिति और झील के जलस्तर के आधार पर आगे की रणनीति तय की जाएगी। स्थानीय लोगों को सतर्क रहने और प्रशासन द्वारा जारी निर्देशों का पालन करने की सलाह दी गई है।
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