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Lokhitkranti > उत्तराखंड > Adi Kailash Yatra को मिलेगी नई उड़ान, 300 से बढ़कर 50 हजार पार पहुंचे श्रद्धालु, अब हवाई सेवा शुरू करने की तैयारी
उत्तराखंड

Adi Kailash Yatra को मिलेगी नई उड़ान, 300 से बढ़कर 50 हजार पार पहुंचे श्रद्धालु, अब हवाई सेवा शुरू करने की तैयारी

Lokhit Kranti
Last updated: 2026-07-06 4:51 अपराह्न
By Lokhit Kranti 2 महीना ago
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Adi Kailash Yatra 2026 pilgrims and tourists in Pithoragarh with proposed air service in Uttarakhand
Adi Kailash Yatra 2026 pilgrims and tourists in Pithoragarh with proposed air service in Uttarakhand
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Adi Kailash Yatra: उत्तराखंड के सीमांत जनपद पिथौरागढ़ स्थित पवित्र Adi Kailash Yatra लगातार नई ऊंचाइयों को छू रही है। कभी बेहद कठिन और सीमित पहुंच वाला यह धार्मिक स्थल अब देशभर के श्रद्धालुओं और पर्यटकों के आकर्षण का केंद्र बन चुका है। पिछले कुछ वर्षों में यहां आने वाले यात्रियों की संख्या में अभूतपूर्व वृद्धि दर्ज की गई है। यही वजह है कि राज्य सरकार अब Adi Kailash Yatra को और अधिक सुगम बनाने के लिए हवाई सेवा शुरू करने की योजना पर गंभीरता से विचार कर रही है।

Contents
300 से बढ़कर 50 हजार के पार पहुंची श्रद्धालुओं की संख्याप्रधानमंत्री के दौरे के बाद बदली पर्यटन की तस्वीरअब हवाई सेवा शुरू करने की तैयारीसीमांत क्षेत्र में तेजी से विकसित हो रहा पर्यटन ढांचास्थानीय लोगों को मिल रहा रोजगार, बढ़ रहा रिवर्स पलायनपर्यटन विभाग ने मानी नई चुनौतियांओम पर्वत और लिपुलेख यात्रा को भी मिलेगा लाभधार्मिक पर्यटन के साथ पर्यावरण संरक्षण पर भी रहेगा फोकससीमांत उत्तराखंड के विकास की नई उम्मीद

सरकार का मानना है कि बेहतर कनेक्टिविटी, आधुनिक सुविधाएं और पर्यटन ढांचे के विकास से न केवल श्रद्धालुओं की यात्रा आसान होगी, बल्कि सीमांत क्षेत्रों की अर्थव्यवस्था और स्थानीय लोगों की आजीविका को भी नई मजबूती मिलेगी।

300 से बढ़कर 50 हजार के पार पहुंची श्रद्धालुओं की संख्या

कुछ वर्ष पहले तक Adi Kailash Yatra बेहद चुनौतीपूर्ण मानी जाती थी। वर्ष 2015 से 2018 के बीच यहां पहुंचने वाले श्रद्धालुओं की संख्या 300 से भी कम रहती थी। वर्ष 2019 में भी केवल 322 यात्रियों ने इस पवित्र धाम के दर्शन किए थे।

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लेकिन सड़क संपर्क बेहतर होने और धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा मिलने के बाद तस्वीर पूरी तरह बदल गई। अब यहां आने वाले श्रद्धालुओं की संख्या 50 हजार का आंकड़ा पार कर चुकी है। यह वृद्धि उत्तराखंड के धार्मिक पर्यटन इतिहास में सबसे तेज़ बढ़ोतरी में से एक मानी जा रही है।

प्रधानमंत्री के दौरे के बाद बदली पर्यटन की तस्वीर

विशेषज्ञों का मानना है कि अक्टूबर 2023 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आदि कैलाश दौरे के बाद Adi Kailash Yatra को राष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान मिली। प्रधानमंत्री ने यहां पार्वती कुंड और भगवान शिव के मंदिर में पूजा-अर्चना की थी, जिसके बाद इस क्षेत्र की धार्मिक और पर्यटन संभावनाओं पर पूरे देश का ध्यान गया।

इसके बाद सोशल मीडिया, डिजिटल प्लेटफॉर्म और पर्यटन अभियानों के माध्यम से बड़ी संख्या में श्रद्धालु यहां पहुंचने लगे। आज यह यात्रा देश के प्रमुख आध्यात्मिक पर्यटन स्थलों में तेजी से अपनी पहचान बना रही है।

अब हवाई सेवा शुरू करने की तैयारी

बढ़ती मांग को देखते हुए राज्य सरकार और उत्तराखंड नागरिक उड्डयन विकास प्राधिकरण (UCADA) अब Adi Kailash Yatra के लिए हवाई सेवा शुरू करने की संभावनाओं पर काम कर रहे हैं।

अधिकारियों के अनुसार, दिल्ली सहित देश के विभिन्न हिस्सों से आने वाले श्रद्धालु तेज और सुविधाजनक यात्रा विकल्प चाहते हैं। निजी विमानन कंपनियों ने भी इस रूट पर सेवाएं शुरू करने में रुचि दिखाई है। यदि योजना को अंतिम मंजूरी मिलती है, तो भविष्य में श्रद्धालु सड़क यात्रा के लंबे सफर के बजाय हवाई मार्ग का भी लाभ उठा सकेंगे।

सीमांत क्षेत्र में तेजी से विकसित हो रहा पर्यटन ढांचा

पिथौरागढ़ का यह इलाका भौगोलिक रूप से अत्यंत दुर्गम माना जाता है। इतने बड़े स्तर पर पर्यटकों की संख्या बढ़ने के बाद यहां आवास, भोजन और अन्य बुनियादी सुविधाओं की आवश्यकता भी बढ़ गई है।

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इसी को ध्यान में रखते हुए सरकार इस पूरे क्षेत्र में पर्यटन इंफ्रास्ट्रक्चर विकसित कर रही है। नए विश्राम गृह, होमस्टे, पार्किंग, भोजनालय, स्वास्थ्य सुविधाएं और पर्यटक सहायता केंद्र तैयार किए जा रहे हैं। सरकार का उद्देश्य Adi Kailash Yatra को सुरक्षित, सुविधाजनक और पर्यावरण के अनुकूल बनाना है।

स्थानीय लोगों को मिल रहा रोजगार, बढ़ रहा रिवर्स पलायन

Adi Kailash Yatra का सबसे बड़ा सकारात्मक प्रभाव स्थानीय अर्थव्यवस्था पर देखने को मिल रहा है। बड़ी संख्या में ग्रामीण अब होमस्टे, होटल, टैक्सी, गाइड सेवा, स्थानीय हस्तशिल्प और खानपान जैसे व्यवसायों से जुड़ रहे हैं।

रोजगार के बढ़ते अवसरों के कारण कई परिवार, जो वर्षों पहले गांव छोड़ चुके थे, अब वापस अपने मूल स्थानों की ओर लौट रहे हैं। विशेषज्ञ इसे सीमांत क्षेत्रों में रिवर्स पलायन का सकारात्मक संकेत मान रहे हैं।

पर्यटन विभाग ने मानी नई चुनौतियां

पर्यटन विभाग का कहना है कि पर्यटकों की संख्या में तेज वृद्धि के साथ कई नई चुनौतियां भी सामने आई हैं। सीमांत क्षेत्र होने के कारण सड़क, स्वास्थ्य सेवाएं, संचार व्यवस्था और आपदा प्रबंधन को और मजबूत बनाने की आवश्यकता महसूस की जा रही है।

पर्यटन विभाग इन सभी पहलुओं पर विभिन्न विभागों के साथ मिलकर कार्य कर रहा है ताकि Adi Kailash Yatra के दौरान श्रद्धालुओं को किसी प्रकार की असुविधा का सामना न करना पड़े।

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ओम पर्वत और लिपुलेख यात्रा को भी मिलेगा लाभ

प्रस्तावित हवाई सेवा का लाभ केवल आदि कैलाश आने वाले श्रद्धालुओं तक सीमित नहीं रहेगा। इससे प्रसिद्ध ओम पर्वत और अनुमति प्राप्त यात्रियों के लिए लिपुलेख दर्रे तक पहुंचना भी अधिक आसान हो सकेगा। विशेषज्ञों का मानना है कि बेहतर कनेक्टिविटी से पूरे सीमांत क्षेत्र का धार्मिक पर्यटन तेजी से विकसित होगा और उत्तराखंड को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी नई पहचान मिलेगी।

धार्मिक पर्यटन के साथ पर्यावरण संरक्षण पर भी रहेगा फोकस

सरकार ने स्पष्ट किया है कि Adi Kailash Yatra के विस्तार के दौरान पर्यावरण संरक्षण को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जाएगी। हिमालयी पारिस्थितिकी को सुरक्षित रखते हुए पर्यटन गतिविधियों का विकास किया जाएगा।

इसके लिए कचरा प्रबंधन, प्लास्टिक मुक्त यात्रा, सीमित निर्माण और स्थानीय संसाधनों के सतत उपयोग पर विशेष ध्यान दिया जाएगा, ताकि आने वाली पीढ़ियां भी इस पवित्र क्षेत्र की प्राकृतिक सुंदरता का अनुभव कर सकें।

सीमांत उत्तराखंड के विकास की नई उम्मीद

लगातार बढ़ती श्रद्धालुओं की संख्या, प्रस्तावित हवाई सेवा और तेजी से विकसित हो रहे पर्यटन ढांचे ने Adi Kailash Yatra को उत्तराखंड के सबसे तेजी से उभरते धार्मिक पर्यटन केंद्रों में शामिल कर दिया है। यदि सरकार की योजनाएं तय समय पर पूरी होती हैं, तो आने वाले वर्षों में यह यात्रा न केवल आस्था का प्रमुख केंद्र बनेगी, बल्कि सीमांत क्षेत्रों की अर्थव्यवस्था, रोजगार और आधारभूत विकास के लिए भी नई संभावनाओं के द्वार खोलेगी। इससे उत्तराखंड के धार्मिक पर्यटन को वैश्विक स्तर पर और अधिक मजबूती मिलने की उम्मीद है।

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