Cinnamon Farming: उत्तराखंड सरकार ने राज्य को देश का प्रमुख Cinnamon Farming हब बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है। कृषि और बागवानी क्षेत्र में नई संभावनाओं को तलाशते हुए राज्य सरकार अब दालचीनी की व्यावसायिक खेती को बड़े स्तर पर बढ़ावा देने की तैयारी कर रही है। इसी उद्देश्य से देहरादून के सेलाकुई स्थित परफ्यूमरी एंड एरोमैटिक रिसर्च एंड डेवलपमेंट इंस्टीट्यूट (CAP) में 11 और 12 जून को दालचीनी विषय पर दो दिवसीय अंतरराष्ट्रीय सेमिनार और कार्यशाला आयोजित की जा रही है।
इस कार्यक्रम में श्रीलंका, इंडोनेशिया सहित कई देशों के वैज्ञानिक, कृषि विशेषज्ञ, उद्योग प्रतिनिधि और किसान भाग लेंगे। आयोजन का उद्देश्य Cinnamon Farming से जुड़े नवीन शोध, आधुनिक तकनीकों और वैश्विक अनुभवों को किसानों तक पहुंचाना है ताकि उत्तराखंड को दालचीनी उत्पादन और निर्यात के क्षेत्र में नई पहचान मिल सके।
महक क्रांति के जरिए किसानों की आय बढ़ाने पर फोकस
सचिवालय स्थित मीडिया सेंटर में आयोजित प्रेस वार्ता के दौरान कृषि एवं कृषक कल्याण मंत्री गणेश जोशी ने बताया कि राज्य सरकार सुगंधित फसलों की खेती को ग्रामीण अर्थव्यवस्था का मजबूत आधार बनाने की दिशा में कार्य कर रही है। उन्होंने कहा कि Cinnamon Farming न केवल किसानों की आय बढ़ाने का माध्यम बनेगी, बल्कि कृषि क्षेत्र में रोजगार और उद्यमिता के नए अवसर भी पैदा करेगी।
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मंत्री ने बताया कि सेलाकुई स्थित संस्थान को अब एक आधुनिक रिसर्च एवं डेवलपमेंट केंद्र के रूप में विकसित किया गया है, जहां प्रशिक्षण, गुणवत्ता परीक्षण, प्रोसेसिंग, वैल्यू एडिशन और व्यापारिक विकास से जुड़े कार्य किए जा रहे हैं।
10 हजार हेक्टेयर से अधिक क्षेत्र में फैली एरोमैटिक खेती
पिछले दो दशकों में CAP की पहल से उत्तराखंड में सुगंधित पौधों की खेती का दायरा तेजी से बढ़ा है। वर्तमान में राज्य में लगभग 10 हजार हेक्टेयर भूमि पर एरोमैटिक खेती की जा रही है। करीब 29 हजार किसान 109 अरोमा क्लस्टर्स के माध्यम से इस क्षेत्र से जुड़े हुए हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि Cinnamon Farming इस क्षेत्र में एक नया अध्याय जोड़ सकती है। दालचीनी की बढ़ती वैश्विक मांग और बेहतर बाजार मूल्य किसानों के लिए इसे एक लाभदायक विकल्प बना रहे हैं।
100 करोड़ रुपये से अधिक पहुंचा कारोबार
राज्य में एरोमैटिक सेक्टर की सफलता का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि वर्ष 2003 में जहां इस क्षेत्र का कारोबार केवल 2 करोड़ रुपये के आसपास था, वहीं 2025 तक यह बढ़कर 100 करोड़ रुपये से अधिक हो चुका है।
सरकार का मानना है कि आने वाले वर्षों में Cinnamon Farming इस वृद्धि को और तेज कर सकती है। दालचीनी आधारित उत्पादों की घरेलू और अंतरराष्ट्रीय मांग लगातार बढ़ रही है, जिससे किसानों और कृषि उद्यमियों को बेहतर आय प्राप्त हो सकती है।
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‘उत्तराखंड महक क्रांति पॉलिसी 2026-36’ से मिलेगा बड़ा लाभ
राज्य सरकार ने सुगंधित फसलों को बढ़ावा देने के लिए ‘उत्तराखंड महक क्रांति पॉलिसी 2026-36’ लागू की है। इस महत्वाकांक्षी नीति के तहत लगभग 23 हजार हेक्टेयर भूमि को सुगंधित खेती से जोड़ने का लक्ष्य रखा गया है।
इस योजना से करीब 91 हजार किसानों को प्रत्यक्ष लाभ मिलने की संभावना है। इसके अलावा राज्य में सात एरोमा वैली विकसित की जाएंगी, जो कृषि, पर्यटन और उद्योग के नए मॉडल के रूप में विकसित होंगी। सरकार का मानना है कि Cinnamon Farming इस नीति का प्रमुख आधार बनेगी और उत्तराखंड को दालचीनी उत्पादन के क्षेत्र में राष्ट्रीय पहचान दिलाएगी।
चंपावत और नैनीताल में विकसित होगी ‘सिनेमन वैली’
महक क्रांति नीति के तहत चंपावत और नैनीताल जिलों में लगभग 5200 हेक्टेयर क्षेत्र में ‘सिनेमन वैली’ विकसित की जा रही है। यह परियोजना किसानों, स्टार्टअप्स, कृषि उद्यमियों और प्रोसेसिंग उद्योगों के लिए बड़े अवसर लेकर आएगी।
विशेषज्ञों का कहना है कि पर्वतीय क्षेत्रों की जलवायु और भौगोलिक परिस्थितियां Cinnamon Farming के लिए काफी अनुकूल हैं। ऐसे में उत्तराखंड देश के प्रमुख दालचीनी उत्पादक राज्यों में शामिल हो सकता है।
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अंतरराष्ट्रीय सेमिनार में होगी आधुनिक तकनीकों पर चर्चा
दो दिवसीय अंतरराष्ट्रीय सेमिनार का विषय “Cinnamon: Innovations in Propagation, Sustainable Cultivation and Post Harvest Technologies” रखा गया है।
कार्यक्रम में दालचीनी की उन्नत खेती, गुणवत्तापूर्ण उत्पादन, आधुनिक प्रसंस्करण तकनीक, वैल्यू एडिशन, खाद्य सुरक्षा मानकों और निर्यात आवश्यकताओं जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर विस्तार से चर्चा होगी।
इस दौरान किसानों को यह भी बताया जाएगा कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में Cinnamon Farming से जुड़े कौन-कौन से अवसर उपलब्ध हैं और बेहतर उत्पादन के लिए किन तकनीकों को अपनाना आवश्यक है।
श्रीलंका और इंडोनेशिया के विशेषज्ञ करेंगे मार्गदर्शन
CAP के निदेशक डॉ. नृपेन्द्र चौहान के अनुसार, कार्यक्रम में श्रीलंका के नेशनल सिनेमन रिसर्च एंड ट्रेनिंग सेंटर के विशेषज्ञ, अंतरराष्ट्रीय निर्यातक और इंडोनेशिया के रिसर्च सेंटर फॉर एस्टेट क्रॉप्स के वैज्ञानिक भाग लेंगे। इसके अलावा देशभर से कृषि वैज्ञानिक, शोधकर्ता, उद्योग प्रतिनिधि और लगभग 50 दालचीनी किसान भी इस आयोजन का हिस्सा बनेंगे।
किसानों के लिए खुलेंगे नए अवसर
विशेषज्ञों का मानना है कि Cinnamon Farming केवल एक कृषि गतिविधि नहीं बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई दिशा देने वाला मॉडल बन सकती है। दालचीनी की खेती से जुड़े प्रोसेसिंग यूनिट, निर्यात उद्योग, मूल्य संवर्धित उत्पाद और कृषि पर्यटन जैसी गतिविधियां स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार के अवसर भी पैदा करेंगी।
यदि सरकार की योजनाएं निर्धारित लक्ष्य के अनुसार आगे बढ़ती हैं, तो आने वाले वर्षों में उत्तराखंड न केवल देश का प्रमुख Cinnamon Farming केंद्र बनेगा, बल्कि वैश्विक बाजार में भी अपनी मजबूत पहचान स्थापित कर सकेगा। इससे किसानों की आय बढ़ाने, पलायन रोकने और राज्य की ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सशक्त बनाने में महत्वपूर्ण योगदान मिलेगा।
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