Adhik Maas 2026: धार्मिक नगरी Vrindavan में अधिक मास के शुभ अवसर पर पूज्य Devkinandan Thakur Maharaj के सानिध्य में वराह पुराण कथा का भव्य शुभारंभ हुआ। कथा के पहले दिन बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचे और भक्ति, धर्म तथा संस्कारों से जुड़े संदेशों को श्रद्धा भाव से सुना। कथा स्थल पर पूरे समय भजन-कीर्तन और भगवान के जयकारों से भक्तिमय वातावरण बना रहा।
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Adhik Maas 2026: अधिक मास को बताया विशेष पुण्य का समय
कथा के दौरान महाराज जी ने कहा कि अधिक मास सनातन परंपरा में अत्यंत पवित्र माना जाता है। इस दौरान भगवान विष्णु की आराधना, दान-पुण्य, जप और तप का विशेष महत्व होता है। उन्होंने बताया कि इस समय किए गए अच्छे कर्म मनुष्य के जीवन में सकारात्मक बदलाव लाते हैं और भगवान की कृपा प्राप्त होती है।
Adhik Maas 2026: प्रभु भक्ति से मिलता है मानसिक सुकून
महाराज जी ने श्रद्धालुओं को संबोधित करते हुए कहा कि आज के दौर में इंसान बाहरी सुखों के पीछे भाग रहा है, लेकिन वास्तविक शांति केवल भगवान की भक्ति में मिलती है। उन्होंने कहा कि जब व्यक्ति सच्चे मन से प्रभु का स्मरण करता है, तो उसके मन से चिंता और नकारात्मकता दूर होने लगती है। कथा सुनने से मन स्थिर होता है और जीवन को सही दिशा मिलती है।
Adhik Maas 2026: देशहित में बचत और संयम का संदेश
अपने प्रवचन में महाराज जी ने देश की आर्थिक स्थिति का भी जिक्र किया। उन्होंने लोगों से अपील की कि संसाधनों का सही उपयोग करें और फिजूलखर्ची से बचें। उन्होंने कहा कि तेल की बचत, अनावश्यक खर्चों पर नियंत्रण और जरूरत के अनुसार जीवनशैली अपनाना देशहित में जरूरी है। उनके अनुसार जब नागरिक जिम्मेदारी से व्यवहार करते हैं, तभी देश आर्थिक रूप से मजबूत बनता है।
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Adhik Maas 2026: बच्चों को संस्कारों से जोड़ने पर दिया जोर
कथा में महाराज जी ने कहा कि आधुनिक जीवनशैली के कारण नई पीढ़ी धीरे-धीरे अपने धर्म और परंपराओं से दूर होती जा रही है। उन्होंने अभिभावकों से बच्चों को रामायण, गीता और भागवत जैसे धर्मग्रंथों से जोड़ने की अपील की। उनके अनुसार ये ग्रंथ बच्चों को नैतिकता, अनुशासन और सही जीवन मूल्यों की शिक्षा देते हैं।
Adhik Maas 2026: यज्ञ को बताया वातावरण शुद्ध करने का माध्यम
महाराज जी ने यज्ञ के महत्व पर भी विस्तार से चर्चा की। उन्होंने कहा कि यज्ञ केवल धार्मिक परंपरा नहीं बल्कि सकारात्मक ऊर्जा का स्रोत है। वेद मंत्रों और हवन से वातावरण में शुद्धता आती है और मनुष्य के भीतर सात्विक भाव जागृत होते हैं। उन्होंने कहा कि यज्ञ मनुष्य को त्याग, संयम और सदाचार का संदेश देता है।
Adhik Maas 2026: अच्छे कर्म ही आते हैं काम
प्रवचन के दौरान महाराज जी ने मानव जीवन की सच्चाई पर भी प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि संसार की संपत्ति, पद और प्रतिष्ठा हमेशा साथ नहीं रहती। अंत समय में केवल मनुष्य के कर्म और भगवान का स्मरण ही उसके काम आता है। इसलिए जीवन में धर्म, सेवा और भक्ति को महत्व देना चाहिए।
Adhik Maas 2026: तीर्थ स्थलों की गरिमा बनाए रखने की अपील
उन्होंने श्रद्धालुओं से तीर्थ स्थानों की पवित्रता बनाए रखने की भी अपील की। महाराज जी ने कहा कि धार्मिक स्थलों पर अनुशासन, स्वच्छता और श्रद्धा का विशेष ध्यान रखना चाहिए। तीर्थ केवल घूमने के स्थान नहीं बल्कि आध्यात्मिक ऊर्जा के केंद्र होते हैं, इसलिए वहां मर्यादा बनाए रखना हर श्रद्धालु की जिम्मेदारी है।
Adhik Maas 2026: कथा स्थल पर उमड़ा श्रद्धा का सैलाब
वराह पुराण कथा के पहले दिन श्रद्धालुओं में भारी उत्साह दिखाई दिया। दूर-दूर से पहुंचे भक्तों ने कथा का श्रवण कर आध्यात्मिक आनंद प्राप्त किया। पूरा वातावरण भक्ति रस में डूबा नजर आया। अधिक मास के अवसर पर आयोजित यह धार्मिक कार्यक्रम लोगों के लिए आस्था, संस्कार और सकारात्मक ऊर्जा का केंद्र बन गया।
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