पैथोलॉजिस्ट के तबादले के बाद से बंद है सुविधा
फरीदकोट। पंजाब के फरीदकोट जिला सिविल अस्पताल में लंबी मांग के बाद पिछले साल शुरू हुआ ब्लड बैंक बीते एक महीने से बंद पड़ा है। 15 जुलाई से यह ब्लड बैंक पैथोलॉजिस्ट के तबादले के कारण बंद है, जबकि 2024 में इसकी शुरुआत हुई थी। इस सुविधा के ठप होने से गंभीर मरीजों, गर्भवती महिलाओं, दुर्घटना में घायल लोगों और इमरजेंसी ऑपरेशन कराने वाले मरीजों को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।
हर दिन 1200 से ज्यादा मरीज पहुंचते हैं अस्पताल
जिला सिविल अस्पताल में रोजाना 1200 से ज्यादा मरीज इलाज के लिए पहुंचते हैं, लेकिन ब्लड न मिलने के कारण उन्हें परेशानी झेलनी पड़ रही है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि प्रशासन की अनदेखी की वजह से यह अहम सुविधा बंद पड़ी है और इसे दोबारा शुरू कराने के लिए कोई ठोस कदम नहीं उठाया जा रहा।
मरीजों को फिर जाना पड़ रहा कोटकपूरा और मेडिकल कॉलेज
2024 में ब्लड बैंक शुरू होने से पहले मरीज कोटकपूरा या गुरु गोबिंद सिंह मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल के ब्लड बैंक पर निर्भर रहते थे। अब दोबारा वही स्थिति बन गई है — फरीदकोट के मरीजों को खून के लिए इन दूर के अस्पतालों के चक्कर काटने पड़ रहे हैं, जिससे खासकर इमरजेंसी हालात में समय पर इलाज मिलना मुश्किल हो गया है।
प्राइवेट ब्लड बैंकों में मोटी रकम चुका रहे मरीज
अस्पताल का सरकारी ब्लड बैंक बंद होने से गरीब और जरूरतमंद परिवारों की मुश्किलें और बढ़ गई हैं। पहले यहां मुफ्त में सुविधा मिल जाती थी, लेकिन अब लोगों को निजी अस्पतालों और ब्लड बैंकों का सहारा लेना पड़ रहा है। निजी ब्लड बैंकों में एक यूनिट खून के लिए करीब हजार से 1500 रुपये तक वसूले जा रहे हैं, जिससे आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों पर आर्थिक बोझ और बढ़ रहा है।
प्रशासन से जल्द समाधान की मांग
स्थानीय निवासियों और मरीजों के परिजनों ने स्वास्थ्य विभाग से मांग की है कि जल्द से जल्द नया पैथोलॉजिस्ट तैनात कर ब्लड बैंक को दोबारा चालू किया जाए। उनका कहना है कि रक्तदान शिविरों से जुटाया गया खून अब बेकार साबित हो सकता है अगर समय रहते सुविधा शुरू नहीं की गई। फिलहाल मरीजों को हर जरूरी यूनिट के लिए दूसरे शहरों का रुख करना पड़ रहा है, जिससे इलाज में देरी और खर्च दोनों बढ़ रहे हैं।


