नई दिल्ली, 19 अगस्त 2026। राजधानी की महिलाओं को आर्थिक तौर पर आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में दिल्ली सरकार अपनी ड्रीम स्कीम ‘लक्ष्मी योजना’ को अगले चरण में ले जाने वाली है। इस योजना के जरिए कमजोर आर्थिक पृष्ठभूमि से आने वाली पात्र महिलाओं के बैंक खातों में हर महीने सीधे रकम भेजी जाएगी।
कब मिलेगा स्वीकृति पत्र, कब आएगी पहली किस्त
योजना से जुड़ी अहम तारीखें सामने आ चुकी हैं। 26 अगस्त 2026 से पात्र महिलाओं को आधिकारिक स्वीकृति पत्र वितरित किए जाने का काम शुरू होगा, वहीं पहली आर्थिक किस्त 1 सितंबर 2026 को सीधे लाभार्थियों के खातों में पहुंचेगी। स्वीकृति पत्र बांटने के लिए 26 अगस्त को राजधानी के तालकटोरा स्टेडियम में विशेष समारोह रखा गया है। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता की ओर से जिला समितियों को साफ निर्देश दिए जा चुके हैं कि आवेदनों की जांच-पड़ताल में देरी न हो, जिससे हर हकदार महिला तक समय रहते योजना का फायदा पहुंच सके।
पंजीकरण के आंकड़ों ने पकड़ी रफ्तार
योजना का ऑनलाइन पोर्टल 1 अगस्त 2026 को लॉन्च हुआ था और महज 18 दिनों में ही इस पर 8 लाख से अधिक महिलाएं पंजीकरण करा चुकी हैं। इनमें से लगभग 5 लाख महिलाओं ने अपने आवेदन को पूरी तरह सबमिट भी कर दिया है। जिन आवेदनों में कोई त्रुटि रह गई है, उनके लिए जल्द ही पोर्टल पर सुधार का विकल्प भी उपलब्ध कराया जाएगा।
हर महीने 2500 रुपये- पैसा लेने के दो तरीके
पात्र महिलाओं को हर महीने 2,500 रुपये की सहायता राशि दी जाएगी, जिसे प्राप्त करने के लिए दो रास्ते तय किए गए हैं। एक विकल्प में 1,500 रुपये आरडी या एफडी के रूप में जमा होंगे, जिन पर 31 जुलाई 2029 तक निकासी पर रोक रहेगी, जबकि शेष 1,000 रुपये CBDC यानी सेंट्रल बैंक डिजिटल करेंसी वॉलेट में डाले जाएंगे। दूसरा विकल्प चुनने पर महिलाएं पूरी रकम सीधे अपने आरडी-एफडी खाते में ले सकती हैं।
किन शर्तों पर मिलेगा योजना का लाभ
- उम्र 21 से 60 वर्ष के बीच होना जरूरी
- पारिवारिक वार्षिक आय 2.5 लाख रुपये से ज्यादा न हो
- आवेदक या उसका परिवार पिछले 10 वर्षों से दिल्ली में रह रहा हो
- साथ में चाहिए- आधार कार्ड, पैन कार्ड, आय प्रमाण पत्र, दिल्ली वोटर आईडी और आधार लिंक्ड बैंक खाता
किन्हें योजना से रखा गया बाहर
सरकारी सेवा में कार्यरत महिलाएं, इनकम टैक्स भरने वाली, जीएसटी रिटर्न दाखिल करने वाली, चार पहिया गाड़ी की मालकिन, सालभर में 2,400 यूनिट से ज्यादा बिजली खर्च करने वाले घरों की महिलाएं और तीन से अधिक जीवित बच्चों वाली महिलाएं इस स्कीम के दायरे में नहीं आएंगी। किसी भी तरह की गलत जानकारी देकर लाभ उठाने की कोशिश करने पर न सिर्फ राशि की रिकवरी होगी, बल्कि संबंधित महिला पर कानूनी शिकंजा भी कस सकता है।


