Water Conservation Campaign: मध्य प्रदेश सरकार द्वारा चलाए जा रहे Water Conservation Campaign का सोमवार को राजगढ़ जिले में भव्य समापन हुआ। इस अवसर पर मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने भैंसवामाता धाम पहुंचकर पूजा-अर्चना की और प्रदेश की सुख-समृद्धि, खुशहाली तथा जनकल्याण की कामना की। कार्यक्रम के दौरान उन्होंने पर्यावरण संरक्षण, जल बचाने और जनभागीदारी के महत्व पर जोर देते हुए कहा कि प्राकृतिक संसाधनों की रक्षा केवल सरकारी योजनाओं से नहीं, बल्कि समाज की सक्रिय भागीदारी से ही संभव है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि जल संरक्षण आज केवल एक सरकारी अभियान नहीं, बल्कि भविष्य की पीढ़ियों के सुरक्षित जीवन का आधार बन चुका है। यही कारण है कि राज्य सरकार ने Water Conservation Campaign को जनआंदोलन के रूप में आगे बढ़ाया और लाखों लोगों को इससे जोड़ने का प्रयास किया।
वैदिक मंत्रोच्चार के बीच की पूजा-अर्चना, प्रदेश की समृद्धि की कामना
Water Conservation Campaign के समापन समारोह की शुरुआत राजगढ़ जिले के भैंसवामाता क्षेत्र स्थित पवित्र दूध तलैया में वैदिक मंत्रोच्चार के साथ हुई। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने भैंसवामाता और माता बिजासन के दर्शन कर प्रदेश में सुख, शांति और समृद्धि की प्रार्थना की।
उन्होंने कहा कि धार्मिक आस्था और प्रकृति संरक्षण का गहरा संबंध है। भारतीय संस्कृति सदियों से जल, जंगल और जमीन की रक्षा का संदेश देती रही है। ऐसे में जल संरक्षण और पर्यावरण बचाने के प्रयास हमारी सांस्कृतिक परंपराओं का भी हिस्सा हैं।
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पौधरोपण कर दिया हरित भविष्य का संदेश
समारोह के दौरान मुख्यमंत्री ने पौधरोपण कर पर्यावरण संरक्षण का संदेश दिया। उन्होंने लोगों से अपील की कि प्रत्येक नागरिक कम से कम एक पौधा अवश्य लगाए और उसकी देखभाल भी करे।
उन्होंने कहा कि Water Conservation Campaign केवल जल स्रोतों को बचाने तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका उद्देश्य जल, वन और पर्यावरण के बीच संतुलन बनाए रखना भी है। यदि बड़े पैमाने पर वृक्षारोपण किया जाएगा तो भूजल स्तर बेहतर होगा और वर्षा जल का संरक्षण भी प्रभावी ढंग से हो सकेगा।
मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को भी निर्देश दिए कि जल संरक्षण से जुड़े सभी कार्यों को दीर्घकालिक योजना के तहत आगे बढ़ाया जाए।
भैंसवामाता मंदिर के विकास कार्यों की समीक्षा
राजगढ़ दौरे के दौरान मुख्यमंत्री ने भैंसवामाता मंदिर के प्रस्तावित विकास कार्यों का भी निरीक्षण किया। उन्होंने मंदिर परिसर के सौंदर्यीकरण, श्रद्धालुओं की सुविधाओं और पर्यटन विकास से जुड़े प्रस्तावों की जानकारी ली।
उन्होंने कहा कि धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा देने के साथ-साथ प्राकृतिक धरोहरों का संरक्षण भी सरकार की प्राथमिकताओं में शामिल है। ऐसे स्थानों का विकास स्थानीय रोजगार को बढ़ावा देने में भी मदद करेगा।
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आदिवासी संस्कृति की झलक ने बढ़ाई कार्यक्रम की भव्यता
Water Conservation Campaign के समापन समारोह में स्थानीय संस्कृति की झलक भी देखने को मिली। मुख्यमंत्री के स्वागत के लिए मंदिर परिसर में आदिवासी नृत्य दलों ने पारंपरिक प्रस्तुतियां दीं।
लोक कलाकारों ने अपने पारंपरिक वाद्ययंत्रों और लोकनृत्य के माध्यम से प्रदेश की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत का प्रदर्शन किया। वहीं छोटी बच्चियों ने सिर पर कलश रखकर पारंपरिक रीति-रिवाजों के अनुसार मुख्यमंत्री का स्वागत किया।
कार्यक्रम में मौजूद लोगों ने सांस्कृतिक प्रस्तुतियों की जमकर सराहना की।
दिव्यांगजनों को ट्राई साइकिल देकर बढ़ाया आत्मविश्वास
समारोह के दौरान मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कई दिव्यांगजनों को ट्राई साइकिल वितरित की। उन्होंने कहा कि समाज के हर वर्ग को विकास की मुख्यधारा से जोड़ना सरकार की प्राथमिकता है।
उन्होंने दिव्यांगजनों को आत्मनिर्भर बनने के लिए प्रेरित करते हुए कहा कि सरकार उनकी शिक्षा, रोजगार और सामाजिक सशक्तिकरण के लिए लगातार काम कर रही है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि Water Conservation Campaign की सफलता तभी सार्थक होगी जब विकास का लाभ समाज के प्रत्येक वर्ग तक पहुंचे।
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लखपति दीदी समूहों को मिले 11 इलेक्ट्रिक वाहन
महिला सशक्तिकरण को बढ़ावा देने के उद्देश्य से मुख्यमंत्री ने स्वयं सहायता समूहों की महिलाओं को 11 इलेक्ट्रिक वाहन भी सौंपे।
उन्होंने कहा कि लखपति दीदी योजना महिलाओं को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल है। इलेक्ट्रिक वाहनों के माध्यम से महिलाएं स्वरोजगार के नए अवसर प्राप्त करेंगी और पर्यावरण संरक्षण में भी योगदान देंगी।
मुख्यमंत्री ने कहा कि हरित ऊर्जा और महिला उद्यमिता दोनों ही राज्य के सतत विकास की मजबूत आधारशिला हैं।
ईको ब्रिक्स मॉडल की मुख्यमंत्री ने की सराहना
कार्यक्रम में ब्यावरा की पर्यावरण प्रेमी संरक्षण समिति द्वारा प्लास्टिक कचरे से तैयार किए जा रहे ईको ब्रिक्स का भी प्रदर्शन किया गया।
मुख्यमंत्री ने इस नवाचार की सराहना करते हुए कहा कि प्लास्टिक अपशिष्ट का इस प्रकार उपयोग पर्यावरण संरक्षण की दिशा में एक अनुकरणीय उदाहरण है।
उन्होंने कहा कि यदि समाज ऐसे नवाचारों को अपनाए तो प्लास्टिक प्रदूषण को काफी हद तक कम किया जा सकता है। Water Conservation Campaign के साथ-साथ स्वच्छता और अपशिष्ट प्रबंधन को भी समान महत्व दिया जाना चाहिए।
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जनभागीदारी से ही सफल होंगे पर्यावरण अभियान
मुख्यमंत्री ने अपने संबोधन में कहा कि जल संरक्षण, वृक्षारोपण, स्वच्छता और पर्यावरण संरक्षण जैसे अभियान केवल सरकारी प्रयासों से सफल नहीं हो सकते।
उन्होंने कहा कि प्रत्येक नागरिक की भागीदारी आवश्यक है। यदि गांव, शहर, स्वयंसेवी संगठन, छात्र, किसान और महिलाएं मिलकर काम करें तो प्राकृतिक संसाधनों का संरक्षण अधिक प्रभावी ढंग से किया जा सकता है।
उन्होंने लोगों से वर्षा जल संचयन, जल स्रोतों के संरक्षण और प्लास्टिक के कम उपयोग का संकल्प लेने का आह्वान किया।
जल संरक्षण को बनाया जाएगा जनआंदोलन
मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि Water Conservation Campaign का समापन केवल एक कार्यक्रम का अंत नहीं बल्कि भविष्य की नई शुरुआत है।
उन्होंने कहा कि राज्य सरकार जल संरक्षण, तालाबों के पुनर्जीवन, नदियों की स्वच्छता और भूजल स्तर बढ़ाने के लिए आने वाले समय में और व्यापक योजनाएं लागू करेगी।
सरकार का लक्ष्य है कि प्रत्येक जिले में स्थानीय स्तर पर जल संरक्षण को जनआंदोलन बनाया जाए ताकि आने वाली पीढ़ियों को जल संकट का सामना न करना पड़े।
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