WhatsApp Username Feature: मैसेजिंग ऐप WhatsApp एक नए फीचर Username-based chatting system को लॉन्च करने की तैयारी में था, लेकिन भारत सरकार की कड़ी आपत्ति के बाद यह योजना फिलहाल विवादों में घिर गई है। सरकार ने Meta को स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि जब तक सभी सुरक्षा और कानूनी पहलुओं पर संतोषजनक जवाब नहीं मिलते, तब तक इस फीचर को भारत में लॉन्च (WhatsApp Username Feature) न किया जाए।
सूत्रों के अनुसार, केंद्र सरकार ने Meta को तीन दिनों के भीतर विस्तृत जवाब देने को कहा है, जिसमें यह स्पष्ट करना होगा कि यह नया सिस्टम (WhatsApp Username Feature) भारतीय कानूनों, विशेष रूप से IT Act 2000 और IT Rules 2021 के अनुरूप कैसे काम करेगा।
सरकार की सबसे बड़ी चिंता – ऑनलाइन फ्रॉड में बढ़ोतरी का खतरा
सरकार का मानना है कि यदि WhatsApp पर मोबाइल नंबर की जगह केवल यूजरनेम (WhatsApp Username Feature) से पहचान संभव हो जाएगी, तो इससे डिजिटल अपराधों में बढ़ोतरी हो सकती है। विशेष रूप से निम्न जोखिमों पर चिंता जताई गई है-
- फर्जी अकाउंट बनाकर धोखाधड़ी
- फिशिंग और बैंकिंग स्कैम
- ‘डिजिटल अरेस्ट’ जैसे साइबर फ्रॉड
- सरकारी या बैंकिंग संस्थाओं की नकली पहचान
- पहचान छिपाकर अपराध करना आसान होना
सरकारी अधिकारियों का कहना है कि अपराधी आसानी से किसी व्यक्ति, बैंक या सरकारी संस्था जैसे दिखने वाले Username बनाकर लोगों को भ्रमित कर सकते हैं।
सरकार का सवाल – अपराधियों की पहचान कैसे होगी?
केंद्र सरकार ने Meta से सबसे अहम सवाल पूछा है अगर यूजर केवल Username से चैट करेंगे, तो कानून प्रवर्तन एजेंसियों को जरूरत पड़ने पर वास्तविक व्यक्ति की पहचान कैसे मिलेगी? इसके अलावा सरकार ने यह भी पूछा है कि-
- क्या प्लेटफॉर्म पर Username verification की कोई मजबूत प्रक्रिया होगी?
- फर्जी या कॉपी किए गए Username को कैसे रोका जाएगा?
- संदिग्ध गतिविधियों पर निगरानी कैसे रखी जाएगी?
सरकार का कहना है कि डिजिटल प्लेटफॉर्म पर anonymity बढ़ने से साइबर अपराधियों को बढ़ावा मिल सकता है, जिससे जांच एजेंसियों के लिए चुनौती बढ़ जाएगी।
Meta का पक्ष – सुरक्षा और बेहतर प्राइवेसी का दावा
वहीं WhatsApp की पैरेंट कंपनी Meta का कहना है कि यह फीचर यूजर्स (WhatsApp Username Feature) की प्राइवेसी को और मजबूत करेगा। कंपनी के अनुसार, Username सिस्टम का उद्देश्य मोबाइल नंबर साझा किए बिना सुरक्षित बातचीत को बढ़ावा देना है। Meta का दावा है कि-
- यूजर बार-बार गलत Username ट्राई करने पर ब्लॉक हो जाएंगे
- संदिग्ध अकाउंट्स को हटाने के लिए सिस्टम अलर्ट करेगा
- पहली बार मैसेज आने पर यूजर को अकाउंट की जानकारी मिलेगी (जैसे नया अकाउंट है या कॉन्टैक्ट में है)
- स्पैम और अनजान मैसेज पर बेहतर नियंत्रण मिलेगा
कंपनी का कहना है कि यह फीचर खासकर उन यूजर्स के लिए उपयोगी होगा जो अपनी नंबर-आधारित पहचान को सार्वजनिक नहीं करना चाहते।
Latest News Update Uttar Pradesh News, उत्तराखंड की ताज़ा ख़बर
डिजिटल प्राइवेसी बनाम साइबर सुरक्षा – नई बहस
यह मामला सिर्फ एक फीचर (WhatsApp Username Feature) लॉन्च का नहीं है, बल्कि भारत में डिजिटल प्राइवेसी और साइबर सुरक्षा के बीच संतुलन की बड़ी बहस को सामने लाता है। एक तरफ जहां टेक कंपनियां यूजर प्राइवेसी और anonymity को बढ़ावा दे रही हैं, वहीं सरकार का फोकस यह सुनिश्चित करना है कि डिजिटल प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल अपराधों के लिए आसान न बने। आने वाले समय में ऐसे फीचर्स के लिए और सख्त रेगुलेशन देखने को मिल सकते हैं।
अब सभी की नजर Meta के जवाब पर है। अगर कंपनी सरकार की शर्तों को पूरा कर देती है, तो यह फीचर भारत में लॉन्च (WhatsApp Username Feature) हो सकता है। लेकिन अगर सुरक्षा और पहचान से जुड़े मुद्दों पर सहमति नहीं बनी, तो इसकी लॉन्चिंग और टल सकती है या बदलाव के साथ ही लागू किया जाएगा।
पढ़े ताजा अपडेट : Hindi News, Today Hindi News, Breaking




