Manipur IED Attack: मणिपुर के उखरुल जिले में सोमवार को सुरक्षा बलों पर हुए एक बड़े उग्रवादी हमले (Manipur IED Attack) ने एक बार फिर राज्य की सुरक्षा स्थिति को लेकर चिंता बढ़ा दी है। संदिग्ध उग्रवादियों ने 40 असम राइफल्स के काफिले को निशाना बनाते हुए पहले IED (इम्प्रोवाइज्ड एक्सप्लोसिव डिवाइस) से विस्फोट किया और उसके तुरंत बाद कई दिशाओं से भारी गोलीबारी शुरू कर दी। इस हमले में असम राइफल्स के दो जवान शहीद हो गए, जबकि पूरे इलाके में कई घंटे तक सुरक्षा अभियान चलता रहा। सुरक्षा एजेंसियों ने घटना के बाद बड़े पैमाने पर सर्च ऑपरेशन शुरू कर दिया है और हमलावरों की तलाश जारी है।
काफिले पर घात लगाकर किया गया हमला
अधिकारियों के अनुसार, हमला (Manipur IED Attack) उस समय हुआ जब 40 असम राइफल्स का काफिला अपने कैंप से एक पुलिस स्टेशन की ओर जा रहा था। यह घटना शांगशाक के पास नुंगशांग कोंग गांव के निकट हुई। प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि हमलावरों ने रास्ते में स्थित एक पुल के दोनों ओर तीन IED पहले से लगा रखे थे। जैसे ही सुरक्षा बलों का काफिला वहां पहुंचा, दो विस्फोट हुए और इसके तुरंत बाद चारों ओर से गोलियां चलनी शुरू हो गईं। सुरक्षा अधिकारियों का मानना है कि यह हमला पूरी योजना के साथ अंजाम दिया गया था।
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दो जवानों ने गंवाई जान
हमले (Manipur IED Attack) में वारंट ऑफिसर बलवंत सिंह और राइफलमैन सी.एम. सिंह गंभीर रूप से घायल हो गए। दोनों कथित तौर पर काफिले की एक गाड़ी में सवार थे। घायल जवानों को पहले नजदीकी असम राइफल्स कैंप में प्राथमिक उपचार दिया गया। इसके बाद उन्हें बेहतर इलाज के लिए भेजा गया, लेकिन गंभीर चोटों के कारण दोनों ने दम तोड़ दिया। शहीद जवानों के निधन से सुरक्षा बलों में शोक की लहर है।
एक घंटे तक चला जवाबी अभियान
IED विस्फोट (Manipur IED Attack) के तुरंत बाद असम राइफल्स के जवानों ने भी मोर्चा संभालते हुए जवाबी कार्रवाई शुरू कर दी। अधिकारियों के मुताबिक, दोनों पक्षों के बीच करीब एक घंटे तक रुक-रुक कर गोलीबारी होती रही। घटना के बाद पूरे इलाके को घेर लिया गया और व्यापक तलाशी अभियान चलाया गया। सर्च ऑपरेशन के दौरान सुरक्षा बलों को घटनास्थल से एक बिना फटा हुआ IED भी मिला, जिसे बाद में सुरक्षित तरीके से निष्क्रिय करने की प्रक्रिया शुरू की गई।
हमलावरों की तलाश में बड़े पैमाने पर सर्च ऑपरेशन
हमले के बाद अतिरिक्त सुरक्षा बलों को मौके पर भेजा गया। आसपास के जंगलों और संवेदनशील इलाकों में कॉम्बिंग ऑपरेशन जारी है। फिलहाल किसी भी उग्रवादी संगठन ने इस हमले की जिम्मेदारी नहीं ली है और जांच एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी हैं कि हमले के पीछे कौन-सा संगठन या समूह सक्रिय था।
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राज्यपाल और गृह मंत्री ने की हमले की निंदा
मणिपुर के राज्यपाल अजय कुमार भल्ला ने इस घटना पर गहरा दुख व्यक्त करते हुए कहा कि हिंसा की ऐसी घटनाओं के लिए लोकतांत्रिक समाज में कोई स्थान नहीं है। उन्होंने कहा कि इस तरह के हमले राज्य में शांति और सुरक्षा बहाल करने के प्रयासों को कमजोर नहीं कर सकते। वहीं, राज्य के गृह मंत्री गोविंददास कोंथौजम ने भी हमले की निंदा करते हुए कहा कि सुरक्षा एजेंसियां दोषियों की पहचान कर कानून के तहत सख्त कार्रवाई करेंगी।
कुछ सप्ताह पहले भी तनाव में था उखरुल
यह घटना (Manipur IED Attack) ऐसे समय सामने आई है जब कुछ सप्ताह पहले उखरुल जिले में असम राइफल्स की प्रस्तावित नई चौकी को लेकर स्थानीय लोगों और सुरक्षा बलों के बीच विवाद हुआ था। स्थानीय ग्रामीणों का आरोप था कि बिना पर्याप्त चर्चा के नई आउटपोस्ट बनाने की कोशिश की जा रही थी। इस विरोध के दौरान प्रदर्शनकारियों और सुरक्षा बलों के बीच झड़प हुई थी, जिसमें कई नागरिक घायल हुए थे। हालांकि, सोमवार का हमला उस घटना से सीधे जुड़ा है या नहीं, इसकी आधिकारिक पुष्टि अभी नहीं हुई है।
2023 से लगातार संवेदनशील बना हुआ है मणिपुर
मई 2023 में मेइतेई और कुकी-जो समुदायों के बीच शुरू हुई जातीय हिंसा के बाद से मणिपुर लगातार सुरक्षा चुनौतियों का सामना कर रहा है। इस हिंसा में अब तक 260 से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि हजारों लोग अपने घर छोड़ने को मजबूर हुए हैं। हालात सामान्य करने के लिए सुरक्षा बल लगातार सर्च और डोमिनेशन ऑपरेशन चला रहे हैं, लेकिन समय-समय पर हिंसा की घटनाएं सामने आती रही हैं।
उखरुल में असम राइफल्स के काफिले पर हुआ हमला (Manipur IED Attack) इस बात का संकेत है कि मणिपुर में सुरक्षा चुनौतियां अभी पूरी तरह समाप्त नहीं हुई हैं। IED विस्फोट और सुनियोजित घात लगाकर किए गए हमले ने सुरक्षा एजेंसियों की चिंता बढ़ा दी है। फिलहाल जांच जारी है और हमलावरों की तलाश के लिए बड़े स्तर पर अभियान चलाया जा रहा है। आने वाले दिनों में जांच के नतीजे और सुरक्षा एजेंसियों की कार्रवाई इस मामले की आगे की तस्वीर साफ करेंगे।
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