Jamia Millia Islamia RSS Protest: देश की राजधानी दिल्ली स्थित जामिया मिल्लिया इस्लामिया एक बार फिर छात्र राजनीति को लेकर चर्चा में है। Jamia Millia Islamia RSS Protest ने पूरे कैंपस का माहौल गर्म कर दिया है। RSS के ‘युवा कुंभ’ कार्यक्रम को लेकर शुरू हुआ विवाद अब एक बड़े राजनीतिक और वैचारिक टकराव का रूप ले चुका है। कार्यक्रम शुरू होने से पहले ही AISA और SFI जैसे छात्र संगठनों ने विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया, जिससे विश्वविद्यालय में तनाव की स्थिति बन गई।
RSS के कार्यक्रम पर क्यों उठा विवाद?
जानकारी के मुताबिक RSS द्वारा ‘युवा कुंभ’ नाम से एक कार्यक्रम आयोजित किया जाना था, जो संगठन के शताब्दी वर्ष के तहत प्लान किया गया था। यह कार्यक्रम जामिया के FET ऑडिटोरियम में सुबह 10:30 बजे शुरू होना था, लेकिन विरोध के कारण अब तक शुरू नहीं हो पाया है। Jamia Millia Islamia RSS Protest की शुरुआत यहीं से हुई, जब छात्र संगठनों ने इस कार्यक्रम को लेकर सवाल उठाने शुरू किए। उनका आरोप है कि इस तरह के कार्यक्रमों के जरिए विश्वविद्यालयों में एक विशेष विचारधारा को बढ़ावा दिया जा रहा है।
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AISA का आरोप – विचारधारा थोपने की कोशिश
AISA ने इस पूरे मामले में सबसे तीखा विरोध दर्ज कराया है। संगठन का कहना है कि विश्वविद्यालय प्रशासन ने RSS को कार्यक्रम की अनुमति देकर दोहरे मानदंड अपनाए हैं। AISA का आरोप है कि जहां छात्र संगठनों को कई बार कार्यक्रम की अनुमति नहीं मिलती, वहीं RSS जैसे संगठन को कैंपस में मंच दिया जा रहा है। इसी वजह से Jamia Millia Islamia RSS Protest ने और जोर पकड़ लिया है। छात्रों का कहना है कि यह केवल एक कार्यक्रम का विरोध नहीं, बल्कि विश्वविद्यालय की स्वायत्तता और विचारों की विविधता से जुड़ा मुद्दा है।
SFI का समर्थन – ‘संघीकरण’ के खिलाफ आवाज
AISA के विरोध को SFI का भी पूरा समर्थन मिला है। SFI ने बयान जारी कर कहा कि जामिया के छात्र ‘संघीकरण’ के खिलाफ एकजुट हैं। उनका कहना है कि विश्वविद्यालय परिसर को किसी भी प्रकार की सांप्रदायिक राजनीति से दूर रखा जाना चाहिए। Jamia Millia Islamia RSS Protest अब सिर्फ एक संगठन तक सीमित नहीं रहा, बल्कि कई छात्र समूह इसमें शामिल हो गए हैं। SFI ने यह भी कहा कि यूनिवर्सिटी प्रशासन को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि कैंपस का उपयोग किसी भी प्रकार की नफरत फैलाने वाली विचारधारा के लिए न हो।
नारेबाजी और प्रदर्शन से बढ़ा तनाव
मंगलवार सुबह से ही AISA और अन्य छात्र संगठन कार्यक्रम स्थल के बाहर जमा हो गए और नारेबाजी शुरू कर दी। प्रदर्शन के दौरान छात्रों ने प्रशासन के खिलाफ भी आवाज उठाई। स्थिति ऐसी हो गई कि कार्यक्रम तय समय पर शुरू ही नहीं हो पाया। हालांकि अभी तक प्रशासन की ओर से कार्यक्रम रद्द या स्थगित करने की कोई आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है। इस बीच Jamia Millia Islamia RSS Protest लगातार सोशल मीडिया पर भी ट्रेंड कर रहा है, जिससे यह मुद्दा और ज्यादा चर्चा में आ गया है।
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क्या है बड़ा सवाल – विश्वविद्यालय की भूमिका?
यह विवाद केवल एक कार्यक्रम तक सीमित नहीं है। इसके पीछे एक बड़ा सवाल छिपा है कि, क्या विश्वविद्यालय को सभी विचारधाराओं के लिए समान मंच देना चाहिए या कुछ सीमाएं तय करनी चाहिए?bJamia Millia Islamia RSS Protest ने इस बहस को फिर से जिंदा कर दिया है। एक पक्ष इसे अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का मुद्दा मानता है, जबकि दूसरा इसे सांप्रदायिक एजेंडा बताकर विरोध कर रहा है। यह मुद्दा अब केवल जामिया तक सीमित नहीं रहा, बल्कि देशभर के विश्वविद्यालयों में चल रही विचारधारात्मक बहस का हिस्सा बन गया है।
प्रशासन की चुप्पी और आगे की राह
अब तक जामिया प्रशासन की ओर से इस पूरे मामले पर कोई स्पष्ट बयान सामने नहीं आया है। कार्यक्रम होगा या नहीं, इस पर भी स्थिति साफ नहीं है। हालांकि एक बात तय है कि Jamia Millia Islamia RSS Protest ने कैंपस की राजनीति को एक बार फिर केंद्र में ला दिया है। आने वाले दिनों में प्रशासन क्या फैसला लेता है और छात्र संगठनों का रुख क्या रहता है, इस पर सभी की नजरें टिकी हुई हैं।
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