Crude Oil Prices में जून महीने के दौरान लगातार गिरावट दर्ज की गई है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में आई इस नरमी ने ऊर्जा बाजार के साथ-साथ आम उपभोक्ताओं का भी ध्यान अपनी ओर खींचा है। आंकड़ों के अनुसार जून के 19 कारोबारी दिनों में से 13 दिन कच्चे तेल के दाम नीचे आए हैं, जिसके चलते अमेरिकी और वैश्विक बेंचमार्क दोनों में बड़ी गिरावट देखने को मिली है।
विशेषज्ञों का मानना है कि Crude Oil Prices में आई यह कमी आने वाले समय में भारत समेत कई देशों में पेट्रोल और डीजल की कीमतों पर सकारात्मक असर डाल सकती है। हालांकि तेल कंपनियां और सरकारें कई अन्य आर्थिक कारकों को भी ध्यान में रखकर कीमतों का निर्धारण करती हैं।
70 डॉलर प्रति बैरल से नीचे पहुंचा अमेरिकी कच्चा तेल
अंतरराष्ट्रीय बाजार में अमेरिकी वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट (WTI) क्रूड के दाम 70 डॉलर प्रति बैरल से नीचे पहुंच गए हैं। हालिया कारोबार में WTI लगभग 69 डॉलर प्रति बैरल के स्तर पर देखा गया, जो पिछले कई महीनों का निचला स्तर माना जा रहा है।
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दिलचस्प बात यह है कि यह गिरावट ऐसे समय में आई है जब अमेरिका के प्रमुख तेल भंडारण केंद्रों में स्टॉक अपेक्षाकृत कम स्तर पर पहुंच गया है। सामान्य परिस्थितियों में कम स्टॉक से कीमतें बढ़ती हैं, लेकिन इस बार वैश्विक सप्लाई और भू-राजनीतिक परिस्थितियों ने बाजार की दिशा बदल दी है।
जून में 25 फीसदी तक टूटे Crude Oil Prices
जून की शुरुआत की तुलना में देखा जाए तो Crude Oil Prices में करीब 25 प्रतिशत तक की गिरावट दर्ज की गई है। बाजार विश्लेषकों के अनुसार यह गिरावट केवल मांग और आपूर्ति के कारण नहीं, बल्कि निवेशकों की बदलती रणनीति और अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रमों का भी परिणाम है।
जून के दौरान लगातार कई कारोबारी सत्रों में बिकवाली का दबाव बना रहा, जिसके कारण तेल की कीमतें तेजी से नीचे आईं। यही वजह है कि बाजार में अब भविष्य की कीमतों को लेकर नए अनुमान लगाए जा रहे हैं।
होर्मुज जलडमरूमध्य खुलने से बढ़ी सप्लाई
तेल बाजार में राहत का सबसे बड़ा कारण मध्य पूर्व क्षेत्र से सप्लाई का सामान्य होना माना जा रहा है। होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण तेल परिवहन मार्गों में से एक है। यहां से जहाजों की आवाजाही सामान्य होने के बाद बाजार में आपूर्ति को लेकर चिंताएं कम हुई हैं।
विशेषज्ञों का कहना है कि जब सप्लाई बाधित होने की आशंका कम होती है, तब Crude Oil Prices पर दबाव बढ़ता है और कीमतों में गिरावट देखने को मिलती है। हालिया घटनाक्रम ने भी यही संकेत दिए हैं।
ब्रेंट क्रूड भी प्री-वॉर स्तर के करीब
केवल अमेरिकी कच्चा तेल ही नहीं, बल्कि ब्रेंट क्रूड की कीमतों में भी उल्लेखनीय गिरावट दर्ज की गई है। ब्रेंट क्रूड 73 डॉलर प्रति बैरल से नीचे कारोबार कर रहा है, जो कई महीनों के निचले स्तरों में शामिल है।
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ऊर्जा विशेषज्ञों के अनुसार ब्रेंट और WTI दोनों में एक साथ आई गिरावट यह संकेत देती है कि वैश्विक बाजार फिलहाल सप्लाई को लेकर ज्यादा आश्वस्त नजर आ रहा है। यही कारण है कि Crude Oil Prices लगातार दबाव में बने हुए हैं।
रणनीतिक भंडार से तेल जारी होने का असर
अमेरिका द्वारा अपने रणनीतिक पेट्रोलियम भंडार (Strategic Petroleum Reserve) से तेल जारी करने का भी बाजार पर असर पड़ा है। इससे बाजार में अतिरिक्त सप्लाई उपलब्ध हुई और कीमतों को नियंत्रित रखने में मदद मिली।
ऊर्जा क्षेत्र के जानकारों का मानना है कि रणनीतिक भंडार से लगातार आपूर्ति होने के कारण तेल की उपलब्धता बनी रही, जिससे Crude Oil Prices को ऊपर जाने का पर्याप्त समर्थन नहीं मिल सका।
भारत में पेट्रोल-डीजल कीमतों पर क्या होगा असर?
भारत अपनी जरूरत का अधिकांश कच्चा तेल आयात करता है। ऐसे में अंतरराष्ट्रीय बाजार में Crude Oil Prices में गिरावट का सीधा प्रभाव देश की ऊर्जा लागत पर पड़ता है।
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हालांकि पेट्रोल और डीजल की कीमतें केवल कच्चे तेल के आधार पर तय नहीं होतीं। इसमें टैक्स, रिफाइनिंग लागत, परिवहन खर्च और मुद्रा विनिमय दर भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। फिर भी यदि Crude Oil Prices लंबे समय तक निम्न स्तर पर बने रहते हैं, तो उपभोक्ताओं को राहत मिलने की संभावना बढ़ जाती है।
आगे क्या रहेगा तेल बाजार का रुख?
विशेषज्ञों के अनुसार आने वाले हफ्तों में तेल बाजार की दिशा कई अंतरराष्ट्रीय कारकों पर निर्भर करेगी। मध्य पूर्व की स्थिति, वैश्विक आर्थिक गतिविधियां, प्रमुख तेल उत्पादक देशों की उत्पादन नीति और ऊर्जा मांग का स्तर आगे की कीमतों को प्रभावित करेगा।
फिलहाल बाजार में जो संकेत दिखाई दे रहे हैं, वे बताते हैं कि Crude Oil Prices पर दबाव बना रह सकता है। यदि वैश्विक सप्लाई मजबूत रहती है और मांग में कोई अप्रत्याशित उछाल नहीं आता, तो तेल की कीमतें मौजूदा स्तरों के आसपास बनी रह सकती हैं।
जून का महीना तेल बाजार के लिए बड़े उतार-चढ़ाव वाला रहा है। Crude Oil Prices में लगातार गिरावट ने वैश्विक ऊर्जा बाजार को नई दिशा दी है। अमेरिकी और ब्रेंट दोनों बेंचमार्क में आई कमजोरी से यह संकेत मिल रहा है कि फिलहाल बाजार में सप्लाई का दबदबा बना हुआ है। भारत जैसे आयात-निर्भर देशों के लिए यह सकारात्मक संकेत माना जा रहा है, क्योंकि भविष्य में इससे ईंधन कीमतों पर राहत मिलने की उम्मीद बढ़ सकती है।
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