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Lokhitkranti > बिज़नेस > Ethanol Blending: हाई एथेनॉल ब्लेंडिंग पर सरकार की धीमी चाल, E-22 से E-30 Fuel लागू करने से पहले होगा व्यापक अध्ययन
बिज़नेस

Ethanol Blending: हाई एथेनॉल ब्लेंडिंग पर सरकार की धीमी चाल, E-22 से E-30 Fuel लागू करने से पहले होगा व्यापक अध्ययन

Lokhit Kranti
Last updated: 2026-07-07 4:59 अपराह्न
By Lokhit Kranti 2 महीना ago
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Ethanol Blending E-22 to E-30 Fuel policy update in India with petrol pump and fuel nozzle
Ethanol Blending E-22 to E-30 Fuel policy update in India with petrol pump and fuel nozzle
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देश में Ethanol Blending को बढ़ावा देने की केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी योजना फिलहाल धीमी पड़ती नजर आ रही है। पेट्रोल में 20 प्रतिशत एथेनॉल मिश्रण यानी E-20 को लेकर देशभर में उठे सवालों और उपभोक्ताओं की चिंताओं के बाद अब सरकार उच्च एथेनॉल मिश्रण वाले ईंधनों, यानी E-22 से E-30 Fuel को लागू करने में कोई जल्दबाजी नहीं करना चाहती। सरकार का स्पष्ट संकेत है कि अगला कदम तभी उठाया जाएगा जब तकनीकी अध्ययन, वैज्ञानिक परीक्षण और आम लोगों का भरोसा पूरी तरह हासिल हो जाएगा।

Contents
E-20 विवाद के बाद बदली सरकार की रणनीतिBIS ने मानक तय किए, लेकिन लागू करने में जल्दबाजी नहींचार बड़े मुद्दों पर होगा विस्तृत मंथन1. कीमत और टैक्स राहत2. वाहन की तकनीकी अनुकूलता3. माइलेज और इंजन प्रदर्शन4. किसानों और जैव-ऊर्जा उद्योग को लाभक्या है E-22 से E-30 Fuel?ARAI करेगी व्यापक तकनीकी जांचऊर्जा सुरक्षा और उपभोक्ता हितों के बीच संतुलन की कोशिश

हालांकि भारतीय मानक ब्यूरो (BIS) ने E-22 से E-30 तक के ईंधनों के लिए आवश्यक मानक तय कर दिए हैं, लेकिन इसके बावजूद सरकार फिलहाल इस दिशा में आगे बढ़ने से पहले सभी पहलुओं की गहराई से समीक्षा कर रही है। इससे साफ है कि Ethanol Blending का अगला चरण फिलहाल अध्ययन और परामर्श के दौर से गुजरने वाला है।

E-20 विवाद के बाद बदली सरकार की रणनीति

सरकार ने पिछले कुछ वर्षों में पेट्रोल में एथेनॉल मिश्रण बढ़ाने की नीति को ऊर्जा सुरक्षा, कच्चे तेल के आयात में कमी और किसानों की आय बढ़ाने से जोड़कर आगे बढ़ाया था। लेकिन E-20 Fuel के बाजार में आने के बाद कई वाहन मालिकों ने माइलेज कम होने, पुराने वाहनों पर असर पड़ने और इंजन की कार्यक्षमता को लेकर सवाल उठाए।

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सोशल मीडिया से लेकर ऑटोमोबाइल मंचों तक बड़ी संख्या में लोगों ने अपने अनुभव साझा किए। कई उपभोक्ताओं ने दावा किया कि E-20 Fuel के इस्तेमाल से वाहन की औसत कम हुई, जबकि कुछ ने इंजन और फ्यूल सिस्टम पर असर की आशंका भी जताई। इन चर्चाओं के बाद सरकार ने विशेषज्ञों और ऑटोमोबाइल कंपनियों से राय ली, लेकिन बहस पूरी तरह शांत नहीं हो सकी। इसी वजह से अब Ethanol Blending के अगले चरण पर सरकार अधिक सतर्क रवैया अपना रही है।

BIS ने मानक तय किए, लेकिन लागू करने में जल्दबाजी नहीं

भारतीय मानक ब्यूरो ने E-22, E-25, E-27 और E-30 Fuel के लिए तकनीकी मानक तैयार कर दिए हैं। शुरुआती योजना के अनुसार इन ईंधनों को चरणबद्ध तरीके से लागू करने पर विचार किया जा रहा था।

हालांकि मौजूदा परिस्थितियों में सरकार पहले व्यापक तकनीकी परीक्षण, उद्योग से चर्चा और आम उपभोक्ताओं की प्रतिक्रिया का इंतजार करेगी। अधिकारियों का मानना है कि किसी भी नई Fuel Policy को लागू करने से पहले लोगों का विश्वास जीतना बेहद जरूरी है।

चार बड़े मुद्दों पर होगा विस्तृत मंथन

सरकार उच्च Ethanol Blending लागू करने से पहले चार प्रमुख पहलुओं पर विशेष अध्ययन कराने जा रही है।

1. कीमत और टैक्स राहत

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि सरकार उत्पाद शुल्क में राहत देती है तो उच्च एथेनॉल मिश्रित पेट्रोल सामान्य पेट्रोल की तुलना में सस्ता हो सकता है। सरकार इस संभावना का आर्थिक मूल्यांकन करेगी ताकि उपभोक्ताओं को वास्तविक लाभ मिल सके।

2. वाहन की तकनीकी अनुकूलता

ऑटोमोबाइल उद्योग का कहना है कि वर्तमान समय में अधिकांश वाहन E-20 तक के लिए डिजाइन किए गए हैं। यदि E-22 या E-30 Fuel लागू किया जाता है तो इंजन, फ्यूल इंजेक्शन सिस्टम, पाइपलाइन और इलेक्ट्रॉनिक कंट्रोल सिस्टम में बदलाव की आवश्यकता पड़ सकती है। इसी कारण सरकार तकनीकी विशेषज्ञों से विस्तृत रिपोर्ट तैयार करा रही है ताकि भविष्य में किसी भी प्रकार की समस्या से बचा जा सके।

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3. माइलेज और इंजन प्रदर्शन

वाहन मालिकों की सबसे बड़ी चिंता माइलेज को लेकर रही है। कई लोगों का मानना है कि अधिक एथेनॉल मिश्रण वाले ईंधन से औसत घट सकती है।

ऑटोमोबाइल कंपनियों का कहना है कि नई तकनीक और इंजन ट्यूनिंग के जरिए इस समस्या को काफी हद तक नियंत्रित किया जा सकता है। सरकार इस दावे की स्वतंत्र जांच भी कराएगी।

4. किसानों और जैव-ऊर्जा उद्योग को लाभ

दूसरी ओर चीनी उद्योग और जैव-ईंधन क्षेत्र से जुड़े संगठनों ने Ethanol Blending को सकारात्मक कदम बताया है। उनका कहना है कि E-22 और E-30 Fuel लागू होने से एथेनॉल की मांग बढ़ेगी, जिससे चीनी मिलों की अतिरिक्त क्षमता का उपयोग होगा और किसानों को भी बेहतर आय प्राप्त होगी।

क्या है E-22 से E-30 Fuel?

E-20 की तरह E-22, E-25, E-27 और E-30 Fuel भी पेट्रोल और एथेनॉल का मिश्रण हैं। फर्क सिर्फ इतना है कि इनमें एथेनॉल की मात्रा क्रमशः 22 प्रतिशत से 30 प्रतिशत तक होती है।

सरकार लंबे समय से Ethanol Blending बढ़ाकर पेट्रोलियम आयात पर निर्भरता कम करना चाहती है। इससे विदेशी मुद्रा की बचत होने के साथ-साथ पर्यावरणीय लाभ मिलने की भी उम्मीद है।

हालांकि विशेषज्ञों का कहना है कि अधिक एथेनॉल मिश्रण लागू करने से पहले देश के वाहन बेड़े, ईंधन वितरण व्यवस्था और तकनीकी मानकों को पूरी तरह तैयार करना आवश्यक होगा।

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ARAI करेगी व्यापक तकनीकी जांच

सरकार ने Automotive Research Association of India (ARAI) को इस पूरे विषय पर विस्तृत अध्ययन की जिम्मेदारी सौंपी है। ARAI विभिन्न प्रकार के वाहनों पर उच्च Ethanol Blending के प्रभाव का परीक्षण करेगी। अध्ययन के दौरान निम्न बिंदुओं पर विशेष ध्यान दिया जाएगा—

  • वाहन का माइलेज
  • इंजन की कार्यक्षमता
  • रखरखाव लागत
  • फ्यूल सिस्टम पर प्रभाव
  • लंबी अवधि में इंजन की स्थिति
  • प्रदूषण स्तर में बदलाव

बताया जा रहा है कि यह विस्तृत अध्ययन अगले वर्ष के अंत तक पूरा हो सकता है। इसके बाद सरकार अंतिम नीति तैयार करेगी।

ऊर्जा सुरक्षा और उपभोक्ता हितों के बीच संतुलन की कोशिश

भारत दुनिया के सबसे बड़े पेट्रोलियम आयातकों में शामिल है। ऐसे में Ethanol Blending को ऊर्जा सुरक्षा, पर्यावरण संरक्षण और किसानों की आय बढ़ाने की रणनीति का महत्वपूर्ण हिस्सा माना जा रहा है।

हालांकि सरकार अब यह सुनिश्चित करना चाहती है कि नई Fuel Policy लागू करने से पहले उपभोक्ताओं को किसी प्रकार की तकनीकी या आर्थिक परेशानी का सामना न करना पड़े। यही कारण है कि E-22 से E-30 Fuel पर आगे बढ़ने से पहले सभी वैज्ञानिक, तकनीकी और आर्थिक पहलुओं का गहन परीक्षण किया जाएगा।

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि अध्ययन सकारात्मक रहता है और वाहन उद्योग आवश्यक बदलावों के लिए तैयार हो जाता है, तो भविष्य में उच्च Ethanol Blending भारत की ऊर्जा नीति का महत्वपूर्ण आधार बन सकता है। फिलहाल सरकार का पूरा फोकस वैज्ञानिक प्रमाणों, उपभोक्ताओं के विश्वास और तकनीकी तैयारी के बाद ही अगला कदम उठाने पर है।

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