झारखंड के बाद अब बिहार में भड़का छात्रों का गुस्सा
झारखंड में छात्रों का आंदोलन थमा भी नहीं था कि अब बिहार की राजधानी पटना भी इसी तरह के उबाल का गवाह बन गई। मंगलवार को हजारों छात्रों ने मुख्यमंत्री आवास का घेराव करने के लिए गांधी मैदान से मार्च निकाला। पटना छात्र आंदोलन का यह ताजा रूप पुलिस के लिए भी बड़ी चुनौती बनकर सामने आया, क्योंकि प्रशासन ने छात्रों को रोकने के लिए एड़ी-चोटी का जोर लगा दिया, लेकिन बात झड़प तक पहुंच ही गई।
बैरिकेड टूटे, हालात हुए बेकाबू
सुबह करीब 11 बजे गांधी मैदान से शुरू हुआ यह मार्च राजभवन होते हुए मुख्यमंत्री आवास तक पहुंचने वाला था। लेकिन जैसे ही प्रदर्शनकारी आगे बढ़े, उन्होंने पुलिस द्वारा लगाए गए बैरिकेड्स को तोड़ डाला, जिसके बाद पूरी स्थिति बेकाबू हो गई। डाक बंगला चौराहे तक पहुंचते-पहुंचते पुलिस ने कुछ छात्र नेताओं को हिरासत में ले लिया, और यहीं से पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच सीधी झड़प शुरू हो गई। भीड़ को तितर-बितर करने के लिए आखिरकार पुलिस को वॉटर कैनन का सहारा लेना पड़ा।
शिक्षा मंत्री बोले — “सारी मांगें पूरी कर दी गईं”
इस पूरे घटनाक्रम पर बिहार के शिक्षा मंत्री मिथिलेश तिवारी ने सफाई देते हुए कहा कि छात्र जिन-जिन मुद्दों को लेकर धरने पर बैठे थे, सरकार ने उन सभी का समाधान कर दिया है। उन्होंने दावा किया कि युवाओं की समस्याओं का समय पर निदान करना सरकार की प्राथमिकता रही है। इसके साथ ही उन्होंने विपक्षी नेता तेजस्वी यादव पर भी तीखा तंज कसते हुए कहा कि जिस व्यक्ति ने 10वीं बोर्ड परीक्षा तक नहीं दी, वह परीक्षा प्रणाली पर सुझाव दे रहा है, और उन्हें पहले बिहार सरकार के स्कूल में दाखिला लेकर 10वीं पास करने की सलाह दे डाली।
आश्वासन के बावजूद क्यों नहीं मानी बात?
सरकार की तरफ से सकारात्मक बातचीत और कई मांगें मानने के आश्वासन के बावजूद छात्र मंगलवार को सड़कों पर उतर आए। दरअसल पटना छात्र आंदोलन के केंद्र में मुख्य रूप से 70वीं बीपीएससी परीक्षा को रद्द करने की मांग है। इसके अलावा छात्र कई दिनों से गर्दनीबाग में धरना दे रहे हैं और टीचर भर्ती परीक्षा टीआरई-4 में पीटी-मेंस प्रणाली व निगेटिव मार्किंग हटाने की मांग पर भी अड़े हुए हैं।
छात्रों की प्रमुख मांगें एक नजर में
छात्रों की मांग सूची लंबी है — 70वीं BPSC परीक्षा रद्द करना, TRE-4 शिक्षक भर्ती के लिए एकल परीक्षा प्रणाली लागू करना, पीटी-मेंस प्रक्रिया खत्म कर नए प्रयोग टीआरई-5 से शुरू करना, निगेटिव मार्किंग हटाना, BPSC और दारोगा सहित सभी परीक्षाओं में पारदर्शिता सुनिश्चित करना, डोमिसाइल नीति लागू करना और सरकारी भर्तियों में आयु सीमा में छूट देना शामिल है।


