बरेली उत्तर प्रदेश। जिले की एक निचली अदालत ने गैंगस्टर एक्ट से जुड़े एक चर्चित मामले में बड़ा फैसला सुनाते हुए आरोपी जयवीर को समस्त आरोपों से बरी कर दिया है। जयवीर गैंगस्टर एक्ट बरी होने की यह खबर क्षेत्र में चर्चा का विषय बनी हुई है। न्यायालय ने अपने आदेश में स्पष्ट किया कि अभियोजन पक्ष पर्याप्त साक्ष्यों के अभाव में आरोप सिद्ध नहीं कर सका, जिसके चलते आरोपी को दोषमुक्त किया गया।
क्या था पूरा मामला
यह प्रकरण थाना फतेहगंज पूर्वी क्षेत्र से जुड़ा हुआ था, जहां उत्तर प्रदेश गिरोहबन्द एवं समाज विरोधी क्रियाकलाप (निवारण) अधिनियम, 1986 की धारा 2/3 के तहत जयवीर के खिलाफ मामला दर्ज किया गया था। इस मामले की सुनवाई लंबे समय से न्यायालय में चल रही थी, जिसमें दोनों पक्षों की ओर से अपनी-अपनी दलीलें पेश की गईं।
अधिवक्ता की पैरवी बनी निर्णायक
सुनवाई के दौरान बचाव पक्ष की ओर से अधिवक्ता श्यामदास शर्मा ने मामले से जुड़े तथ्यों, विधिक बिंदुओं और उपलब्ध साक्ष्यों को न्यायालय के समक्ष प्रभावी ढंग से रखा। उन्होंने अभियोजन पक्ष के आरोपों में मौजूद खामियों को उजागर करते हुए तर्कों के आधार पर बचाव पक्ष की स्थिति मजबूती से प्रस्तुत की। न्यायालय ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने और साक्ष्यों की गहनता से समीक्षा करने के बाद पाया कि अभियोजन पक्ष अपने आरोप साबित करने में असफल रहा।
न्यायालय का फैसला
समुचित विवेचन के उपरांत माननीय न्यायालय ने जयवीर को गैंगस्टर एक्ट के मामले में पूर्णतः दोषमुक्त घोषित करते हुए आदेश पारित किया। न्यायालय ने अपने फैसले में इस बात पर बल दिया कि किसी भी व्यक्ति को केवल शक के आधार पर दंडित नहीं किया जा सकता, जब तक कि ठोस साक्ष्य उपलब्ध न हों।
क्षेत्र में खुशी की लहर, परिजनों ने जताया आभार
फैसला आते ही जयवीर के परिजनों और समर्थकों में खुशी की लहर दौड़ गई। परिवार के लोगों ने अधिवक्ता श्यामदास शर्मा के प्रयासों की सराहना करते हुए उनका आभार व्यक्त किया। साथ ही उन्होंने स्वर्गीय वी.पी. ध्यानी जी को भी श्रद्धापूर्वक स्मरण किया, जिनके मार्गदर्शन को इस लड़ाई की नींव बताया गया।
विधिक जानकारों की प्रतिक्रिया
स्थानीय विधिक विशेषज्ञों का कहना है कि जयवीर गैंगस्टर एक्ट बरी जैसे फैसले यह दर्शाते हैं कि भारतीय न्याय प्रणाली में साक्ष्य और तथ्यों को ही सर्वोपरि माना जाता है। किसी भी मामले में ठोस प्रमाणों के अभाव में दोषसिद्धि संभव नहीं होती, और यह फैसला इसी सिद्धांत की पुष्टि करता है।
इस प्रकार लंबे समय से चल रहे इस मामले का पटाक्षेप न्याय की जीत के रूप में हुआ, जिससे क्षेत्र में संतोष का माहौल देखने को मिला।
रिपोर्ट: सुमित श्रीवास्तव, दैनिक लोकहितक्रांति, बरेली


