लखीसराय बिहार। सावन की तीसरी सोमवारी पर लखीसराय के प्रसिद्ध अशोकधाम मंदिर में सुबह मची भीषण भगदड़ में 7 महिला श्रद्धालुओं की दर्दनाक मौत हो गई और 27 अन्य लोग घायल हो गए। इस हादसे के बावजूद भक्तों की आस्था नहीं डिगी और दिनभर में करीब दो लाख शिवभक्तों ने बाबा भोलेनाथ का जलाभिषेक किया।बिहार
सुबह मची भगदड़, दर्द के बीच उमड़ा आस्था का सैलाब
श्री इंद्रदमनेश्वर महादेव मंदिर परिसर में सुबह करीब 3:30 बजे जैसे ही गर्भगृह का मुख्य कपाट खुला, जलाभिषेक के लिए भक्तों की भारी भीड़ उमड़ पड़ी। इसी दौरान भगदड़ मच गई, जिसमें 7 महिला श्रद्धालुओं की जान चली गई। हादसे के बाद कुछ देर के लिए मंदिर परिसर में सन्नाटा और भय का माहौल बना रहा, लेकिन दिन चढ़ने के साथ ही श्रद्धालुओं का तांता फिर से मंदिर की ओर बढ़ने लगा।
घंटों कतार में खड़े रहे भक्त, गंगाजल-बेलपत्र लेकर पहुंचे
हाथों में गंगाजल, बेलपत्र, धतूरा, अक्षत और फूल लिए श्रद्धालु घंटों लंबी कतार में खड़े रहे। प्रशासन ने आम भक्तों को दक्षिणी प्रवेश द्वार से करीब एक किलोमीटर पैदल चलाकर निर्धारित प्रवेश बिंदु तक पहुंचाया। दोपहर बाद भीड़ थोड़ी नियंत्रित होने पर शिवगंगा के रास्ते बनाई गई जिग-जैग बैरिकेडिंग से श्रद्धालुओं को गर्भगृह में प्रवेश दिया जाने लगा।
सुरक्षा व्यवस्था और VIP एंट्री पर उठे सवाल
इतनी बड़ी दुर्घटना के बावजूद मंदिर परिसर की सुरक्षा और प्रबंधन को लेकर गंभीर सवाल खड़े हुए हैं। स्थानीय श्रद्धालुओं का आरोप है कि पूर्वी गेट से आम जनता का प्रवेश पूरी तरह बंद कर दिया गया था, लेकिन मेला ड्यूटी में तैनात कुछ पुलिसकर्मियों और मजिस्ट्रेटों ने नियम तोड़कर अपने परिजनों और परिचितों को पिछले दरवाजे से वीआईपी एंट्री दिलवाई। वहीं आम श्रद्धालु भीषण गर्मी में लंबी दूरी पैदल तय कर कतार में लगे रहे।
NH-80 पर वाहन बंद, मीलों पैदल चले कांवड़िया
तीसरी सोमवारी को यातायात व्यवस्था के तहत प्रशासन ने राष्ट्रीय राजमार्ग-80 पर बालगुदर मोड़ और बीएड कॉलेज मोड़ से सभी वाहनों का परिचालन पूरी तरह रोक दिया था। इस वजह से बुजुर्गों, महिलाओं और बच्चों को भी मीलों पैदल चलकर अशोकधाम पहुंचना पड़ा। हादसे के गहरे जख्म के बावजूद पूरे लखीसराय शहर में दिनभर आस्था का उल्लास हावी रहा।


