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Lokhitkranti > बिज़नेस >  Global AI Race में पिछड़ते भारत और चीन! अमेरिकी टेक कंपनियों का बढ़ा दबदबा, एशियाई बाजारों को बड़ा झटका
बिज़नेस

 Global AI Race में पिछड़ते भारत और चीन! अमेरिकी टेक कंपनियों का बढ़ा दबदबा, एशियाई बाजारों को बड़ा झटका

Lokhit Kranti
Last updated: 2026-06-29 4:57 अपराह्न
By Lokhit Kranti 2 महीना ago
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Global AI Race impacts India, China and global stock markets as AI-driven companies in the US, Taiwan and South Korea gain market capitalization.
Global AI Race impacts India, China and global stock markets as AI-driven companies in the US, Taiwan and South Korea gain market capitalization.
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Global AI Race: दुनियाभर के शेयर बाजारों और टेक्नोलॉजी सेक्टर में इस समय Global AI Race सबसे बड़ा चर्चा का विषय बना हुआ है। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) केवल तकनीकी बदलाव का माध्यम नहीं रह गया है, बल्कि यह अब देशों की आर्थिक ताकत, निवेश और वैश्विक प्रतिस्पर्धा का प्रमुख आधार बन चुका है। इसी Global AI Race में अमेरिका लगातार अपनी बढ़त मजबूत कर रहा है, जबकि भारत, चीन और हांगकांग जैसे बड़े एशियाई बाजार अपेक्षित प्रदर्शन नहीं कर पा रहे हैं।

Contents
मार्केट कैपिटलाइजेशन में घटी बड़ी कंपनियों की हिस्सेदारीअमेरिका की AI कंपनियां लगातार बना रही हैं नए रिकॉर्डताइवान और दक्षिण कोरिया बने AI सेक्टर के नए सितारेभारत के सामने क्या है सबसे बड़ी चुनौती?चीन भी AI निवेश बढ़ा रहा, लेकिन असर सीमितनिवेशकों की बदल रही रणनीतिक्या भारत के लिए विविधता बन सकती है ताकत?Global AI Race तय करेगी भविष्य की आर्थिक ताकत

हालिया वित्तीय आंकड़ों से स्पष्ट संकेत मिल रहे हैं कि जिन देशों के पास AI से जुड़ी वैश्विक स्तर की कंपनियां हैं, वहां निवेशकों का भरोसा लगातार बढ़ रहा है। वहीं जिन बाजारों में AI सेक्टर की बड़ी कंपनियों की संख्या सीमित है, वहां निवेश का प्रवाह अपेक्षाकृत कमजोर दिखाई दे रहा है।

मार्केट कैपिटलाइजेशन में घटी बड़ी कंपनियों की हिस्सेदारी

Global AI Race का सबसे बड़ा असर एशियाई शेयर बाजारों में सूचीबद्ध शीर्ष कंपनियों पर देखने को मिला है। हाल के आंकड़ों के अनुसार भारत और चीन की दस सबसे बड़ी कंपनियों का कुल मार्केट कैपिटलाइजेशन में योगदान पिछले एक वर्ष के मुकाबले उल्लेखनीय रूप से कम हुआ है।

Read: सोने-चांदी की कीमतों में फिर हलचल, जानिए आज कितना बदला गोल्ड का भाव और क्या है निवेश का सही समय

भारत में जहां पहले शीर्ष 10 कंपनियों की हिस्सेदारी लगभग 22 प्रतिशत थी, वहीं अब यह करीब 19 प्रतिशत रह गई है। चीन में भी यही आंकड़ा 26 प्रतिशत से घटकर लगभग 19 प्रतिशत तक पहुंच गया है। हांगकांग के बाजार में भी बड़ी कंपनियों की हिस्सेदारी में मामूली गिरावट दर्ज की गई है। विशेषज्ञों का मानना है कि Global AI Race में पिछड़ने का सीधा असर इन बाजारों की निवेश क्षमता और प्रदर्शन पर दिखाई दे रहा है।

अमेरिका की AI कंपनियां लगातार बना रही हैं नए रिकॉर्ड

दूसरी ओर अमेरिका की बड़ी टेक कंपनियां Global AI Race में सबसे आगे बनी हुई हैं। AI आधारित क्लाउड सेवाएं, चिप डिजाइन, डेटा सेंटर और मशीन लर्निंग प्लेटफॉर्म विकसित करने वाली कंपनियों ने वैश्विक निवेशकों का ध्यान अपनी ओर आकर्षित किया है।

AI टेक्नोलॉजी में लगातार हो रहे निवेश के कारण अमेरिकी टेक कंपनियों की मार्केट वैल्यू रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गई है। इसी वजह से अमेरिका का टेक इंडेक्स लगातार नई ऊंचाइयों को छू रहा है और दुनिया भर के निवेशकों के लिए आकर्षण का केंद्र बना हुआ है।

ताइवान और दक्षिण कोरिया बने AI सेक्टर के नए सितारे

Global AI Race में केवल अमेरिका ही नहीं, बल्कि ताइवान और दक्षिण कोरिया ने भी शानदार प्रदर्शन किया है। इन दोनों देशों की अर्थव्यवस्था AI हार्डवेयर और सेमीकंडक्टर उद्योग पर काफी हद तक आधारित है।

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ताइवान की प्रमुख चिप निर्माता कंपनी TSMC और दक्षिण कोरिया की SK Hynix तथा Samsung Electronics जैसी कंपनियां AI चिप्स और हाई-बैंडविड्थ मेमोरी के क्षेत्र में दुनिया की अग्रणी कंपनियों में शामिल हैं।

इन्हीं कंपनियों की मजबूत ग्रोथ के कारण दोनों देशों के प्रमुख शेयर बाजारों में उल्लेखनीय तेजी देखने को मिली है। इससे साफ है कि Global AI Race में हार्डवेयर और चिप निर्माण क्षेत्र की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण होती जा रही है।

भारत के सामने क्या है सबसे बड़ी चुनौती?

भारत का शेयर बाजार विविध क्षेत्रों पर आधारित माना जाता है। रिलायंस इंडस्ट्रीज, एचडीएफसी बैंक, आईसीआईसीआई बैंक, टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज और इंफोसिस जैसी कंपनियां भारतीय बाजार की सबसे बड़ी कंपनियों में शामिल हैं।

हालांकि, Global AI Race के संदर्भ में देखें तो भारत के पास अभी ऐसी वैश्विक AI कंपनियां नहीं हैं जो सीधे AI हार्डवेयर, AI प्लेटफॉर्म या बड़े भाषा मॉडल (Large Language Models) के क्षेत्र में दुनिया का नेतृत्व कर रही हों।

भारतीय आईटी कंपनियां मुख्य रूप से सॉफ्टवेयर सेवाओं पर आधारित हैं। AI तकनीक के तेजी से विकसित होने के कारण पारंपरिक आईटी सेवाओं के सामने नई चुनौतियां भी खड़ी हो रही हैं। यही वजह है कि निवेशकों का झुकाव फिलहाल उन कंपनियों की ओर अधिक दिखाई दे रहा है जो AI इनोवेशन में अग्रणी भूमिका निभा रही हैं।

चीन भी AI निवेश बढ़ा रहा, लेकिन असर सीमित

चीन ने पिछले कुछ वर्षों में AI सेक्टर में बड़े निवेश की घोषणा की है। सरकार और निजी कंपनियां AI रिसर्च, सेमीकंडक्टर, रोबोटिक्स और मशीन लर्निंग पर तेजी से काम कर रही हैं।

इसके बावजूद Global AI Race में चीन को अपेक्षित बढ़त नहीं मिल सकी है। इसकी एक बड़ी वजह यह मानी जा रही है कि चीन की प्रमुख कंपनियों का कारोबार कई अलग-अलग क्षेत्रों में फैला हुआ है, जिससे AI आधारित ग्रोथ का प्रभाव सीमित दिखाई देता है।

हालांकि AI हार्डवेयर, ऑप्टिकल फाइबर और चिप निर्माण से जुड़ी कुछ चीनी कंपनियों ने बेहतर प्रदर्शन किया है, लेकिन उनका प्रभाव पूरे बाजार को ऊपर उठाने के लिए अभी पर्याप्त नहीं माना जा रहा।

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निवेशकों की बदल रही रणनीति

विशेषज्ञों का मानना है कि Global AI Race ने निवेशकों की प्राथमिकताओं को पूरी तरह बदल दिया है। पहले जहां निवेशक पारंपरिक टेक कंपनियों पर अधिक भरोसा करते थे, वहीं अब AI से जुड़ी कंपनियों में निवेश सबसे बड़ा आकर्षण बन गया है।

AI चिप निर्माता, क्लाउड इंफ्रास्ट्रक्चर, डेटा सेंटर, मशीन लर्निंग और AI प्लेटफॉर्म विकसित करने वाली कंपनियों में लगातार निवेश बढ़ रहा है। इसके विपरीत जिन कंपनियों का AI से सीधा संबंध नहीं है, उनके शेयरों में अपेक्षाकृत धीमी वृद्धि देखने को मिल रही है।

क्या भारत के लिए विविधता बन सकती है ताकत?

कुछ बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि भारत का विविध आर्थिक ढांचा भविष्य में उसकी सबसे बड़ी ताकत भी साबित हो सकता है। यदि वैश्विक स्तर पर AI सेक्टर में अत्यधिक मूल्यांकन (Overvaluation) की स्थिति बनती है, तो निवेशक उन बाजारों की ओर लौट सकते हैं जहां बैंकिंग, मैन्युफैक्चरिंग, इंफ्रास्ट्रक्चर, फार्मा और उपभोक्ता क्षेत्र समान रूप से मजबूत हैं।

भारत के पास मजबूत घरेलू निवेश, स्थिर वित्तीय प्रणाली और विविध उद्योगों का आधार मौजूद है। ऐसे में Global AI Race में फिलहाल पिछड़ने के बावजूद भारत के पास दीर्घकालिक विकास की संभावनाएं बनी हुई हैं।

Global AI Race तय करेगी भविष्य की आर्थिक ताकत

आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस अब केवल तकनीकी क्षेत्र का विषय नहीं रह गया है, बल्कि यह वैश्विक अर्थव्यवस्था की दिशा तय करने वाला प्रमुख कारक बन चुका है। Global AI Race में जो देश और कंपनियां आगे रहेंगी, वही आने वाले वर्षों में निवेश, रोजगार, तकनीकी नवाचार और आर्थिक विकास के नए मानक स्थापित करेंगी।

भारत और चीन के सामने चुनौती स्पष्ट है कि उन्हें AI रिसर्च, सेमीकंडक्टर निर्माण, हाई-परफॉर्मेंस कंप्यूटिंग और वैश्विक स्तर की AI कंपनियों के विकास पर तेजी से काम करना होगा। यदि ऐसा होता है, तो आने वाले वर्षों में एशियाई बाजार एक बार फिर वैश्विक प्रतिस्पर्धा में मजबूत वापसी कर सकते हैं।

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