CBSE OSM Controversy: देश के शिक्षा तंत्र को झकझोर देने वाला CBSE OSM Controversy अब राष्ट्रीय बहस का विषय बन चुका है। एक 18 साल के छात्र ने ऐसी खामियों को उजागर किया कि केंद्र सरकार को CBSE के शीर्ष अधिकारियों पर कार्रवाई करनी पड़ी। लंबे विवाद और लगातार उठते सवालों के बीच CBSE के चेयरमैन राहुल सिंह और सचिव हिमांशु गुप्ता का तबादला कर दिया गया है।
साथ ही ऑनलाइन स्क्रीन मार्किंग (OSM) सिस्टम के टेंडर और खरीद प्रक्रिया की जांच के लिए एक सदस्यीय समिति भी गठित की गई है। इस कार्रवाई ने पूरे शिक्षा जगत में हलचल पैदा कर दी है।
कौन हैं सार्थक सिद्धांत, जिन्होंने उठाए बड़े सवाल?
इस पूरे मामले के केंद्र में हैं 12वीं के छात्र सार्थक सिद्धांत। उन्होंने OSM प्रणाली में कथित खामियों और टेंडर प्रक्रिया में अनियमितताओं को लेकर लगातार सवाल उठाए। सार्थक ने दावा किया कि उनके शोध और ब्लॉग में OSM सिस्टम की कम से कम 15 गंभीर कमियां सामने आई हैं।
इसी वजह से उन्हें संसद की स्थायी समिति के सामने अपनी बात रखने के लिए बुलाया गया। यह अपने आप में ऐतिहासिक घटना मानी जा रही है, क्योंकि पहली बार किसी छात्र को सीधे संसदीय समिति के सामने अपनी बात रखने का मौका मिला।
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क्या है CBSE OSM Controversy?
दरअसल, इस वर्ष CBSE ने पहली बार 12वीं की उत्तर पुस्तिकाओं की जांच Online Screen Marking (OSM) प्रणाली के माध्यम से करवाई थी। रिजल्ट घोषित होने के बाद बड़ी संख्या में छात्रों ने अंकों को लेकर सवाल उठाने शुरू कर दिए।
यहीं से CBSE OSM Controversy ने जोर पकड़ लिया। छात्रों और अभिभावकों ने आरोप लगाया कि नई प्रणाली में पारदर्शिता की कमी है और मूल्यांकन प्रक्रिया में कई तकनीकी समस्याएं मौजूद हैं। बढ़ते दबाव के बाद शिक्षा मंत्रालय ने पूरे मामले की रिपोर्ट तलब कर ली।
संसद की समिति के सामने क्या बोले सार्थक?
सार्थक सिद्धांत ने संसदीय स्थायी समिति के सामने विस्तार से अपनी बात रखी। उन्होंने OSM प्रणाली के क्रियान्वयन, तकनीकी कमजोरियों और टेंडर प्रक्रिया को लेकर गंभीर सवाल उठाए।
समिति के अध्यक्ष दिग्विजय सिंह ने बताया कि छात्र द्वारा उठाए गए मुद्दों पर गंभीरता से विचार किया जाएगा और CBSE से प्राप्त जवाबों का भी अध्ययन किया जाएगा। इस बयान के बाद CBSE OSM Controversy और ज्यादा चर्चा में आ गई है।
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री-इवैल्यूएशन पोर्टल पर साइबर अटैक से बढ़ी चिंता
विवाद के बीच CBSE के री-इवैल्यूएशन पोर्टल पर कथित साइबर अटैक की खबर ने भी सभी को चौंका दिया। बोर्ड के अनुसार केवल दो मिनट में 15 लाख से अधिक एक्सेस अटेंप्ट दर्ज किए गए।
इसके अलावा एक लाख से ज्यादा बार सिस्टम की फाइलों तक बिना अनुमति पहुंचने की कोशिश की गई। हालांकि तकनीकी टीम ने स्थिति को संभाल लिया और पोर्टल सामान्य रूप से काम करता रहा। दोपहर तक 16 हजार से ज्यादा छात्रों ने आवेदन भी कर दिया था।
क्या शिक्षा व्यवस्था में होगा बड़ा बदलाव?
विशेषज्ञों का मानना है कि CBSE OSM Controversy केवल एक परीक्षा विवाद नहीं है, बल्कि यह देश की शिक्षा प्रणाली में पारदर्शिता, जवाबदेही और तकनीकी भरोसे की बड़ी परीक्षा बन चुकी है।
एक छात्र द्वारा उठाए गए सवालों ने शिक्षा मंत्रालय, CBSE और पूरी मूल्यांकन प्रक्रिया को कठघरे में खड़ा कर दिया है। आने वाली जांच रिपोर्ट यह तय करेगी कि OSM प्रणाली में वास्तव में खामियां थीं या नहीं। फिलहाल इतना तय है कि CBSE OSM Controversy ने देशभर के छात्रों और अभिभावकों का ध्यान अपनी ओर खींच लिया है और इसके परिणाम दूरगामी हो सकते हैं।
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