Census 2027 Uttarakhand के पहले चरण का कार्य सफलतापूर्वक पूरा हो गया है। राज्यभर में 25 अप्रैल 2026 से शुरू हुआ मकान सूचीकरण और मकानों की गणना का अभियान 24 मई 2026 की रात समाप्त हो गया। इस दौरान प्रदेश के सभी 13 जिलों और 11 नगर निगम क्षेत्रों में बनाए गए हाउस लिस्टिंग ब्लॉक्स में सर्वेक्षण कार्य पूरा किया गया। शुरुआती आंकड़ों के अनुसार उत्तराखंड की अनुमानित जनसंख्या करीब 1.27 करोड़ पहुंच गई है।
जनगणना निदेशालय की ओर से इस चरण में मकानों, परिवारों और भवनों का डिजिटल रिकॉर्ड तैयार किया गया। अधिकारियों के मुताबिक यह प्रक्रिया आने वाली मुख्य जनगणना के लिए बेहद महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
Census 2027 Uttarakhand के तहत हुआ डिजिटल सर्वे
राज्य में जनगणना के पहले चरण के लिए कुल 29,665 हाउस लिस्टिंग ब्लॉक्स (HLB) बनाए गए थे। इनमें 24,625 ग्रामीण और जिला क्षेत्रों में जबकि 5,040 ब्लॉक्स नगर निगम क्षेत्रों में शामिल किए गए। सभी ब्लॉक्स को HLBC पोर्टल पर डिजिटल तरीके से मैप किया गया, जिससे डेटा संग्रहण और निगरानी आसान हो सके।
इस बड़े अभियान के लिए 20,859 एन्यूमरेटर्स और 3,670 सुपरवाइजर्स की तैनाती की गई थी। अधिकारियों ने बताया कि डिजिटल तकनीक के उपयोग से इस बार डेटा संग्रहण प्रक्रिया पहले की तुलना में अधिक तेज और व्यवस्थित रही।
Census 2027 Uttarakhand के दौरान राज्य में लगभग 45 लाख आवासीय और गैर-आवासीय भवनों की गणना की गई। इसके साथ ही 28.6 लाख परिवारों का भी रिकॉर्ड तैयार किया गया है।
सभी जिलों में पूरा हुआ जनगणना कार्य
राज्य के सभी 13 जिलों में मकान सूचीकरण और भवन गणना का कार्य समय पर पूरा कर लिया गया। सबसे अधिक हाउस लिस्टिंग ब्लॉक्स पौड़ी जिले में बनाए गए, जहां कुल 3501 एचएलबी तैयार किए गए थे। वहीं हरिद्वार में 3077 और उधम सिंह नगर में 2643 एचएलबी बनाए गए।
देहरादून जिले में 1981, अल्मोड़ा में 2429, टिहरी में 2185 और नैनीताल में 1775 हाउस लिस्टिंग ब्लॉक्स बनाए गए थे। इसके अलावा पिथौरागढ़, चमोली, बागेश्वर, चंपावत, रुद्रप्रयाग और उत्तरकाशी जैसे पर्वतीय जिलों में भी जनगणना का कार्य पूरा किया गया।
अधिकारियों का कहना है कि Census 2027 Uttarakhand के पहले चरण में पर्वतीय क्षेत्रों में टीमों को मौसम और भौगोलिक परिस्थितियों के कारण चुनौतियों का सामना करना पड़ा, लेकिन तय समय के भीतर कार्य पूरा कर लिया गया।
नगर निगम क्षेत्रों में भी पूरा हुआ सर्वे
प्रदेश के 11 नगर निगम क्षेत्रों में भी मकान सूचीकरण और गणना का काम पूरा हो चुका है। सबसे ज्यादा एचएलबी देहरादून नगर निगम क्षेत्र में बनाए गए, जहां कुल 1957 ब्लॉक्स में सर्वेक्षण किया गया। हल्द्वानी नगर निगम में 678, रुद्रपुर में 577 और हरिद्वार नगर निगम में 446 एचएलबी बनाए गए।
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इसके अलावा ऋषिकेश, कोटद्वार, पिथौरागढ़, काशीपुर, रुड़की और श्रीनगर नगर निगम क्षेत्रों में भी सफलतापूर्वक सर्वे पूरा किया गया। Census 2027 Uttarakhand के तहत नगर क्षेत्रों में बढ़ती आबादी और शहरी विस्तार को ध्यान में रखते हुए विशेष निगरानी रखी गई।
71 हजार से ज्यादा परिवारों ने की स्वगणना
पहले चरण की शुरुआत से पहले राज्य में 10 अप्रैल से 24 अप्रैल तक स्वगणना अभियान भी चलाया गया। इस दौरान लोगों को ऑनलाइन माध्यम से स्वयं अपनी जानकारी दर्ज करने का अवसर दिया गया।
आंकड़ों के मुताबिक उत्तराखंड में कुल 71,104 परिवारों ने स्वगणना प्रक्रिया में भाग लिया। सबसे अधिक स्वगणना देहरादून और नैनीताल जिलों में दर्ज की गई। देहरादून में 12,778 और नैनीताल में 10,253 परिवारों ने स्वयं डेटा दर्ज किया।
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इसके अलावा हरिद्वार, उधम सिंह नगर, अल्मोड़ा और अन्य जिलों से भी बड़ी संख्या में लोगों ने भागीदारी की। अधिकारियों ने इसे डिजिटल जागरूकता और लोगों के सहयोग का सकारात्मक संकेत बताया है।
दूसरे चरण में होगी लोगों की गणना
Census 2027 Uttarakhand के दूसरे चरण में अब लोगों की वास्तविक जनसंख्या गणना की जाएगी। यह प्रक्रिया 9 फरवरी 2027 से 28 फरवरी 2027 के बीच संचालित होगी। इस दौरान प्रत्येक व्यक्ति की सामाजिक, आर्थिक और पारिवारिक जानकारी दर्ज की जाएगी।
वहीं देश के बर्फीले और दुर्गम क्षेत्रों में रहने वाले लोगों की गणना सितंबर 2026 में की जाएगी। अधिकारियों के अनुसार हिमालयी क्षेत्रों में मौसम की कठिन परिस्थितियों को देखते हुए वहां पहले ही सर्वे किया जाएगा।
विकास योजनाओं में मिलेगी मदद
विशेषज्ञों का मानना है कि Census 2027 Uttarakhand के आंकड़े राज्य की भविष्य की विकास योजनाओं के लिए बेहद अहम साबित होंगे। शिक्षा, स्वास्थ्य, सड़क, बिजली, पेयजल और शहरी विकास जैसी योजनाओं के लिए जनसंख्या आंकड़े आधार का काम करते हैं।
इसके अलावा पलायन, शहरीकरण और ग्रामीण क्षेत्रों की आबादी में हो रहे बदलावों का अध्ययन भी इन आंकड़ों से संभव हो सकेगा। उत्तराखंड जैसे पर्वतीय राज्य में जनसंख्या का सही आंकलन नीति निर्माण के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है।
राज्य सरकार और जनगणना विभाग का कहना है कि आगामी दूसरे चरण के लिए भी तैयारियां शुरू कर दी गई हैं ताकि पूरी प्रक्रिया पारदर्शी और व्यवस्थित तरीके से संपन्न हो सके।
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