Fuel Saving Campaign: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ओर से पेट्रोल-डीजल की खपत कम करने और ऊर्जा संरक्षण को लेकर की गई अपील का असर अब उत्तराखंड में साफ दिखाई देने लगा है। राज्य सरकार और प्रशासनिक अधिकारी इस पहल को केवल औपचारिकता तक सीमित नहीं रख रहे, बल्कि खुद मैदान में उतरकर Fuel Saving Campaign को जन आंदोलन बनाने की कोशिश कर रहे हैं।
देहरादून से लेकर हरिद्वार और नैनीताल तक कई अधिकारी सार्वजनिक परिवहन, साइकिल और पैदल चलकर कार्यालय पहुंच रहे हैं। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने भी छोटा काफिला अपनाकर ईंधन बचत का संदेश दिया है। इससे आम लोगों के बीच भी सकारात्मक चर्चा शुरू हो गई है।
CM धामी ने छोटे काफिले से दिया बड़ा संदेश
शनिवार को देहरादून में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी बेहद छोटे काफिले के साथ नजर आए। आमतौर पर वीवीआईपी मूवमेंट के दौरान लंबा काफिला देखा जाता है, लेकिन इस बार मुख्यमंत्री के साथ केवल दो वाहन दिखाई दिए।
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मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अपील के बाद राज्य सरकार ने तय किया है कि जहां तक संभव हो, ईंधन की बचत और पर्यावरण संरक्षण को प्राथमिकता दी जाएगी। उन्होंने कहा कि छोटी-छोटी जागरूकताएं बड़े बदलाव ला सकती हैं और सरकार यदि खुद उदाहरण पेश करेगी तो जनता भी उससे प्रेरित होगी।
Fuel Saving Campaign को लेकर मुख्यमंत्री की यह पहल सोशल मीडिया पर भी चर्चा का विषय बनी हुई है। लोग इसे सादगी और जिम्मेदार प्रशासन का संदेश मान रहे हैं।
सूचना विभाग में शुरू हुआ NO VEHICLE DAY
देहरादून स्थित सूचना विभाग ने प्रधानमंत्री की अपील के बाद एक नई पहल शुरू की है। विभाग ने सप्ताह में एक दिन NO VEHICLE DAY घोषित किया है। इस दिन अधिकारी और कर्मचारी निजी पेट्रोल-डीजल वाहनों का इस्तेमाल नहीं करेंगे।
शनिवार को इसका असर विभाग में साफ देखने को मिला। कई अधिकारी साइकिल, इलेक्ट्रिक वाहन और सार्वजनिक परिवहन के जरिए कार्यालय पहुंचे। विभाग के महानिदेशक बंशीधर तिवारी खुद साइकिल चलाकर दफ्तर पहुंचे।
उन्होंने कहा कि Fuel Saving Campaign केवल सरकारी निर्देश नहीं बल्कि देशहित से जुड़ा विषय है। वैश्विक परिस्थितियों और बढ़ती ईंधन कीमतों के बीच हर नागरिक की जिम्मेदारी है कि वह ईंधन बचत की दिशा में योगदान दे।
पैदल चलकर पहुंचे अधिकारी
सूचना विभाग के संयुक्त निदेशक केएस चौहान ने इस अभियान को और अलग स्तर पर पहुंचा दिया। वे अपने घर से करीब 16 किलोमीटर पैदल चलकर कार्यालय पहुंचे। उन्होंने कहा कि यदि अधिकारी खुद उदाहरण नहीं पेश करेंगे तो लोगों तक सही संदेश नहीं पहुंचेगा।
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उन्होंने बताया कि सप्ताह में एक दिन वाहन का उपयोग कम करना मुश्किल नहीं है। इससे न केवल ईंधन की बचत होगी बल्कि स्वास्थ्य और पर्यावरण दोनों को फायदा मिलेगा।
Fuel Saving Campaign के तहत कई कर्मचारी साझा परिवहन और ऑटो का इस्तेमाल करते दिखाई दिए। विभाग के कर्मचारियों का कहना है कि यदि यह अभियान लगातार चलता रहा तो इससे लोगों की आदतों में बड़ा बदलाव आ सकता है।
हरिद्वार और नैनीताल में भी दिखी पहल
Fuel Saving Campaign का असर अब सिर्फ देहरादून तक सीमित नहीं है। हरिद्वार के जिलाधिकारी मयूर दीक्षित लगातार पैदल कार्यालय जाते दिखाई दे रहे हैं। हाथों में फाइल लेकर सड़क पर पैदल चलते डीएम की तस्वीरें सोशल मीडिया पर वायरल हो रही हैं।
उनके साथ कई कर्मचारी भी पैदल दफ्तर पहुंचे। प्रशासनिक अधिकारियों का मानना है कि जब वरिष्ठ अधिकारी खुद सादगी अपनाते हैं तो आम जनता पर उसका सकारात्मक असर पड़ता है।
वहीं नैनीताल के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक मंजूनाथ टीसी बाइक से निरीक्षण करते दिखाई दिए। उन्होंने सरकारी तामझाम के बजाय सामान्य तरीके से फील्ड विजिट शुरू की है। इससे पहले कैबिनेट मंत्री गणेश जोशी भी स्कूटी से कैबिनेट बैठक में पहुंचे थे।
पर्यावरण संरक्षण पर भी जोर
विशेषज्ञों का मानना है कि Fuel Saving Campaign केवल ईंधन बचत तक सीमित नहीं है। इसका सीधा संबंध पर्यावरण संरक्षण और प्रदूषण नियंत्रण से भी जुड़ा हुआ है। यदि सप्ताह में एक दिन भी लोग निजी वाहनों का उपयोग कम करें तो इससे कार्बन उत्सर्जन में बड़ी कमी आ सकती है। उत्तराखंड जैसे पहाड़ी राज्य में पर्यावरण संतुलन बनाए रखना बेहद जरूरी माना जाता है।
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प्रशासनिक अधिकारियों का कहना है कि सार्वजनिक परिवहन और साझा यात्रा की आदत विकसित होने से ट्रैफिक जाम भी कम होगा। साथ ही लोगों का आर्थिक बोझ भी घटेगा।
जनता के बीच बन रहा सकारात्मक माहौल
उत्तराखंड में Fuel Saving Campaign को लेकर लोगों के बीच सकारात्मक माहौल बनता दिखाई दे रहा है। कई लोग सोशल मीडिया पर इस पहल की तारीफ कर रहे हैं। युवाओं और सरकारी कर्मचारियों के बीच भी इस अभियान को लेकर चर्चा बढ़ी है।
देहरादून के कुछ इलाकों में लोगों ने सप्ताह में एक दिन कार या बाइक का इस्तेमाल कम करने की बात कही है। कई स्कूल और संस्थान भी इस तरह की पहल शुरू करने पर विचार कर रहे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि सरकारी स्तर पर शुरू हुआ यह अभियान जन आंदोलन में बदलता है तो इसका असर लंबे समय तक दिखाई दे सकता है।
बदलती जीवनशैली की ओर संकेत
Fuel Saving Campaign यह भी दिखा रहा है कि बदलती परिस्थितियों में अब लोगों को ऊर्जा बचत की दिशा में गंभीर होना पड़ेगा। पेट्रोल-डीजल की बढ़ती कीमतें, वैश्विक तनाव और पर्यावरणीय चुनौतियां आने वाले समय में बड़ी चिंता बन सकती हैं।
ऐसे में उत्तराखंड में शुरू हुई यह पहल देश के अन्य राज्यों के लिए भी उदाहरण बन सकती है। मुख्यमंत्री से लेकर अधिकारियों तक का सक्रिय भागीदारी दिखाना इस अभियान को मजबूत बना रहा है।
आने वाले दिनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या यह अभियान केवल सरकारी दफ्तरों तक सीमित रहता है या फिर आम जनता भी इसे अपनी दिनचर्या का हिस्सा बनाती है।
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