Uttarakhand Secretariat Election: देहरादून स्थित उत्तराखंड सचिवालय में पिछले कई दिनों से चल रहा चुनावी मुकाबला आखिरकार खत्म हो गया और कर्मचारियों ने अपने नए प्रतिनिधियों का चयन कर लिया। सचिवालय संघ के द्विवार्षिक चुनाव में इस बार कई पुराने और नए चेहरों के बीच कड़ी टक्कर देखने को मिली। सबसे ज्यादा चर्चा अध्यक्ष पद को लेकर रही, जहां दीपक जोशी ने शानदार जीत दर्ज करते हुए एक बार फिर अपनी मजबूत पकड़ साबित कर दी। Uttarakhand Secretariat Election इस बार कर्मचारियों के बीच सबसे चर्चित मुद्दा बना रहा और पूरे सचिवालय में चुनावी माहौल लगातार गर्म बना रहा।
सचिवालय में कई दिनों तक चला चुनावी दंगल
उत्तराखंड सचिवालय संघ का चुनाव इस बार पूरी तरह राजनीतिक रंग में दिखाई दिया। अलग-अलग गुटों में बंटे कर्मचारी अपने पसंदीदा प्रत्याशियों के समर्थन में खुलकर मैदान में उतरे। चुनाव प्रचार के दौरान कर्मचारियों के हित, पदोन्नति, सुविधाएं और कार्यस्थल से जुड़े कई मुद्दे प्रमुखता से उठाए गए। यही वजह रही कि Uttarakhand Secretariat Election को लेकर कर्मचारियों के बीच जबरदस्त उत्साह देखने को मिला।
पुरानी कार्यकारिणी से जुड़े कई पदाधिकारी भी अपने समर्थित प्रत्याशियों के लिए सक्रिय दिखाई दिए। वहीं नए चेहरों ने भी लगातार कर्मचारियों के बीच संपर्क बनाकर अपनी पकड़ मजबूत करने की कोशिश की। सचिवालय परिसर में हर तरफ चुनावी चर्चाएं होती रहीं और मतदान से पहले माहौल पूरी तरह गर्म रहा।
दीपक जोशी और प्रदीप पपनै के बीच कांटे की टक्कर
अध्यक्ष पद के लिए दीपक जोशी और प्रदीप पपनै के बीच सीधा मुकाबला माना जा रहा था। प्रदीप पपनै को जहां पुराने पदाधिकारियों और एक बड़े समूह का समर्थन मिल रहा था, वहीं दीपक जोशी ने आक्रामक चुनाव प्रचार के जरिए कर्मचारियों के बीच लगातार अपनी मौजूदगी बनाए रखी।
मतदान के बाद जब नतीजे सामने आए तो दीपक जोशी ने 594 वोट हासिल किए, जबकि उनके प्रतिद्वंदी प्रदीप पपनै को 485 वोट मिले। इस तरह दीपक जोशी ने 109 वोटों के बड़े अंतर से जीत दर्ज कर सचिवालय संघ के अध्यक्ष पद पर फिर कब्जा जमा लिया। Uttarakhand Secretariat Election के इस परिणाम को सचिवालय की राजनीति में बड़ी वापसी के तौर पर देखा जा रहा है।
जीत के बाद समर्थकों में दिखा उत्साह
परिणाम घोषित होते ही दीपक जोशी के समर्थकों में जबरदस्त उत्साह देखने को मिला। सचिवालय परिसर में समर्थकों ने एक-दूसरे को मिठाई खिलाकर बधाई दी और जीत का जश्न मनाया। कर्मचारियों के बीच चर्चा रही कि दीपक जोशी ने चुनाव प्रचार के दौरान जिन मुद्दों को प्रमुखता से उठाया, उसका सीधा फायदा उन्हें मतदान में मिला।
कई कर्मचारियों का कहना था कि नई कार्यकारिणी से अब उनकी उम्मीदें और बढ़ गई हैं। कर्मचारियों का मानना है कि केवल चुनाव जीतना ही काफी नहीं होगा, बल्कि अब संगठन को कर्मचारियों की समस्याओं के समाधान के लिए गंभीरता से काम करना होगा।
अन्य पदों पर भी हुए दिलचस्प मुकाबले
Uttarakhand Secretariat Election में अध्यक्ष पद के अलावा अन्य पदों पर भी कई रोचक मुकाबले देखने को मिले। वरिष्ठ उपाध्यक्ष पद पर राकेश जोशी ने जीत हासिल की। उन्होंने अभिनव भट्ट को कड़ी टक्कर देते हुए चुनाव अपने नाम किया।
उपाध्यक्ष पद पर संजय कुमार शर्मा विजयी रहे। वहीं जगत सिंह डसीला और दिनेश उनियाल को हार का सामना करना पड़ा। महिला उपाध्यक्ष पद पर प्रमिला टम्टा ने बड़ी जीत दर्ज कर अपनी मजबूत उपस्थिति साबित की। प्रमिला टम्टा को 630 वोट मिले, जबकि उनकी प्रतिद्वंदी रेनू भट्ट को 451 वोट प्राप्त हुए।
महासचिव पद पर राजेंद्र रतूड़ी ने जीत हासिल की। उन्होंने विमल जोशी को बड़े अंतर से हराकर यह महत्वपूर्ण पद अपने नाम किया। सचिव पद के चुनाव में अतुल कुमार सिंह विजयी रहे। उन्हें कुल 498 वोट मिले। उन्होंने अमित कुमार और पुष्कर सिंह नेगी को हराया।
कर्मचारियों के मुद्दे रहे चुनाव का केंद्र
इस बार के Uttarakhand Secretariat Election में कर्मचारियों से जुड़े मुद्दे पूरी तरह चुनाव के केंद्र में रहे। प्रत्याशियों ने कर्मचारियों के हितों, लंबित पदोन्नतियों, सुविधाओं और कार्य परिस्थितियों को बेहतर बनाने के कई वादे किए।
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सचिवालय कर्मचारियों का कहना है कि लंबे समय से कई ऐसे मुद्दे लंबित पड़े हैं, जिनके समाधान की लगातार मांग उठती रही है। ऐसे में नई कार्यकारिणी के सामने सबसे बड़ी चुनौती कर्मचारियों का भरोसा बनाए रखना और चुनावी वादों को जमीन पर उतारना होगा।
नई कार्यकारिणी से कर्मचारियों को बड़ी उम्मीदें
चुनाव परिणाम सामने आने के बाद अब सचिवालय में नई कार्यकारिणी का गठन हो चुका है। कर्मचारियों को उम्मीद है कि नई टीम केवल चुनावी राजनीति तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि कर्मचारियों की समस्याओं के समाधान के लिए प्रभावी कदम उठाएगी।
सचिवालय के भीतर अब नई कार्यकारिणी को लेकर चर्चाओं का दौर शुरू हो गया है। कर्मचारियों का मानना है कि Uttarakhand Secretariat Election में जिस तरह भारी उत्साह देखने को मिला, उससे साफ है कि कर्मचारी अपने अधिकारों और समस्याओं को लेकर पहले से ज्यादा जागरूक हो चुके हैं।
फिलहाल सचिवालय संघ का चुनावी दंगल खत्म हो चुका है, लेकिन अब सबकी निगाहें नई टीम के कामकाज पर टिकी हैं। आने वाले समय में यह देखना दिलचस्प होगा कि नई कार्यकारिणी कर्मचारियों के हितों के लिए कितनी प्रभावी साबित होती है और अपने वादों को कितनी गंभीरता से पूरा कर पाती है।
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