Bengal Election Result: पश्चिम बंगाल की चर्चित फलता विधानसभा सीट पर आज सभी की नजरें टिकी हुई हैं। दोबारा मतदान के बाद होने वाली मतगणना राज्य की राजनीति को नया मोड़ दे सकती है। इस सीट पर 21 मई को हुए री-पोल में करीब 87 प्रतिशत मतदान दर्ज किया गया था, जिसने राजनीतिक दलों की उम्मीदों को और बढ़ा दिया है। अब आज आने वाला Bengal Election Result यह तय करेगा कि क्या भाजपा राज्य में अपनी मजबूत बढ़त कायम रख पाएगी या कांग्रेस यहां कोई बड़ा उलटफेर करने में सफल होगी।
फलता विधानसभा सीट इस बार सिर्फ एक सामान्य चुनावी मुकाबला नहीं रह गई है, बल्कि यह पश्चिम बंगाल की बदलती राजनीतिक तस्वीर का प्रतीक बन चुकी है। चुनाव आयोग द्वारा पहले मतदान को रद्द किए जाने और फिर दोबारा मतदान कराने के फैसले ने इस सीट को राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा में ला दिया।
क्यों चर्चा में आई फलता विधानसभा सीट?
फलता विधानसभा सीट पर 29 अप्रैल को मतदान हुआ था, लेकिन कई बूथों पर कथित धांधली और EVM में गड़बड़ी की शिकायतों के बाद चुनाव आयोग ने वोटिंग रद्द कर दी थी। आरोप लगे थे कि कुछ EVM मशीनों पर स्याही और टेप लगाए गए थे। इसके बाद विपक्षी दलों ने निष्पक्ष चुनाव की मांग उठाई।
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नेता प्रतिपक्ष Suvendu Adhikari ने भी दोबारा मतदान की मांग की थी। शिकायतों की जांच के बाद चुनाव आयोग ने पूरे विधानसभा क्षेत्र में री-पोल कराने का फैसला लिया। इसके बाद 21 मई को 285 पोलिंग स्टेशनों पर दोबारा मतदान हुआ।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इतनी बड़ी संख्या में दोबारा मतदान होना अपने आप में असाधारण घटना है और इससे इस सीट की संवेदनशीलता का अंदाजा लगाया जा सकता है।
BJP और Congress दोनों को जीत की उम्मीद
इस सीट पर भाजपा ने देबांग्शु पांडा को मैदान में उतारा है, जबकि कांग्रेस की तरफ से अब्दुर रज्जाक मोल्ला चुनाव लड़ रहे हैं। माकपा के शंभुनाथ कुर्मी भी मुकाबले में हैं। हालांकि सबसे बड़ा राजनीतिक घटनाक्रम तब हुआ जब तृणमूल कांग्रेस के उम्मीदवार जहांगीर खान अचानक चुनावी मैदान से हट गए।
TMC उम्मीदवार के हटने के बाद मुकाबला पूरी तरह बदल गया। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि इससे भाजपा को सीधा फायदा मिल सकता है। भाजपा नेताओं का दावा है कि जनता ने इस बार खुलकर मतदान किया है और परिणाम पार्टी के पक्ष में जाएगा।
भाजपा का कहना है कि अगर फलता सीट पर जीत मिलती है तो राज्य में उसकी कुल सीटों की संख्या और मजबूत होगी। पार्टी इसे पश्चिम बंगाल में अपने बढ़ते जनाधार का संकेत मान रही है।
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TMC उम्मीदवार के हटने से बदला समीकरण
फलता सीट पर इस बार सबसे ज्यादा चर्चा तृणमूल कांग्रेस की रणनीति को लेकर हो रही है। चुनाव से ठीक पहले TMC उम्मीदवार जहांगीर खान ने खुद को चुनावी दौड़ से अलग कर लिया। इसके बाद इलाके में पार्टी की सक्रियता भी बेहद कम दिखाई दी।
राजनीतिक गलियारों में इस फैसले को लेकर कई तरह की चर्चाएं शुरू हो गईं। कई लोगों का मानना है कि विधानसभा चुनाव के नतीजों के बाद बदले राजनीतिक माहौल ने TMC को बैकफुट पर ला दिया।
हालांकि पार्टी की ओर से आधिकारिक तौर पर ज्यादा प्रतिक्रिया नहीं दी गई, लेकिन स्थानीय स्तर पर TMC की निष्क्रियता ने विपक्ष को आक्रामक होने का मौका जरूर दिया।
87 प्रतिशत मतदान ने बढ़ाई राजनीतिक हलचल
फलता में दोबारा हुए मतदान में 87 प्रतिशत वोटिंग दर्ज होना बेहद अहम माना जा रहा है। विशेषज्ञों के अनुसार इतनी बड़ी वोटिंग यह दिखाती है कि लोग इस चुनाव को लेकर काफी उत्साहित थे।
भाजपा का दावा है कि इस बार लोगों ने बिना डर के मतदान किया। वहीं कांग्रेस को उम्मीद है कि अल्पसंख्यक और ग्रामीण वोट उसके पक्ष में जा सकते हैं। माकपा भी चुपचाप अपनी संभावनाएं तलाश रही है। राजनीतिक विश्लेषकों के मुताबिक इस सीट का परिणाम आने वाले समय में पश्चिम बंगाल की राजनीति की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभा सकता है।
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क्या कहता है राजनीतिक गणित?
पिछले लोकसभा चुनाव में डायमंड हार्बर क्षेत्र में तृणमूल कांग्रेस को बड़ी बढ़त मिली थी। लेकिन इस बार हालात अलग दिखाई दे रहे हैं। भाजपा नेताओं का कहना है कि यदि निष्पक्ष मतदान हुआ है तो परिणाम चौंकाने वाले हो सकते हैं।
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि फलता सीट का चुनाव सिर्फ स्थानीय मुद्दों तक सीमित नहीं है। यह मुकाबला राज्य में भाजपा की बढ़ती ताकत, कांग्रेस की वापसी की कोशिश और TMC के प्रभाव की परीक्षा भी माना जा रहा है।
Bengal Election Result पर पूरे राज्य की नजर
आज होने वाली मतगणना पर सिर्फ फलता ही नहीं, बल्कि पूरे पश्चिम बंगाल की नजर है। चुनाव परिणाम यह संकेत दे सकता है कि राज्य की राजनीति किस दिशा में आगे बढ़ रही है।
अगर भाजपा जीत दर्ज करती है तो यह उसके लिए बड़ा मनोवैज्ञानिक फायदा होगा। वहीं कांग्रेस के लिए जीत नई ऊर्जा लेकर आ सकती है। दूसरी तरफ TMC के लिए यह परिणाम भविष्य की रणनीति तय करने वाला साबित हो सकता है। फिलहाल सभी की नजरें मतगणना केंद्रों पर हैं, जहां कुछ घंटों बाद यह साफ हो जाएगा कि फलता की जनता ने किसे अपना भरोसा सौंपा है।
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