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Lokhitkranti > उत्तराखंड > Kedarnath Trek Route: केदारनाथ यात्रा के लिए बनेगा नया सुरक्षित पैदल मार्ग, बढ़ती भीड़ और खतरे के बीच प्रशासन का बड़ा फैसला
उत्तराखंड

Kedarnath Trek Route: केदारनाथ यात्रा के लिए बनेगा नया सुरक्षित पैदल मार्ग, बढ़ती भीड़ और खतरे के बीच प्रशासन का बड़ा फैसला

Lokhit Kranti
Last updated: 2026-05-14 9:07 पूर्वाह्न
By Lokhit Kranti 3 महीना ago
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Kedarnath Trek Route
Kedarnath Trek Route: केदारनाथ यात्रा के लिए बनेगा नया सुरक्षित पैदल मार्ग, बढ़ती भीड़ और खतरे के बीच प्रशासन का बड़ा फैसला
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Kedarnath Trek Route: उत्तराखंड में चल रही चारधाम यात्रा के बीच इस बार सबसे ज्यादा दबाव केदारनाथ यात्रा मार्ग पर देखने को मिल रहा है. सोनप्रयाग से गौरीकुंड और फिर केदारनाथ धाम तक जाने वाले पैदल रास्ते पर हर दिन हजारों श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ रही है. सोशल मीडिया पर लगातार ऐसे वीडियो सामने आ रहे हैं, जिनमें संकरे रास्तों पर लंबी कतारें, घोड़े-खच्चरों की आवाजाही और यात्रियों की भीड़ साफ दिखाई दे रही है. इसी बढ़ते दबाव और सुरक्षा चिंताओं को देखते हुए अब प्रशासन और विशेषज्ञों ने Kedarnath Trek Route को लेकर बड़ा फैसला लिया है.

Contents
बढ़ती भीड़ से मौजूदा रास्ते पर बढ़ा दबाववैज्ञानिकों ने बताया क्यों असुरक्षित है वर्तमान मार्गपुराने पौराणिक मार्ग के ऊपर तैयार हो रहा नया रास्तायात्रियों और घोड़ों के लिए अलग-अलग रास्ते की तैयारी2013 आपदा के बाद सबसे बड़ा बदलाव माना जा रहा फैसला

सरकार अब एक वैकल्पिक और अधिक सुरक्षित मार्ग तैयार करने में जुटी है, जो 2013 की आपदा से पहले इस्तेमाल होने वाले पारंपरिक रास्ते के ऊपरी हिस्से से होकर गुजरेगा. अधिकारियों का मानना है कि यह नया Kedarnath Trek Route न सिर्फ यात्रा को सुरक्षित बनाएगा बल्कि भीड़ प्रबंधन की बड़ी समस्या को भी कम करेगा.

बढ़ती भीड़ से मौजूदा रास्ते पर बढ़ा दबाव

केदारनाथ धाम पहुंचने के लिए वर्तमान में जो पैदल मार्ग इस्तेमाल हो रहा है, वह 2013 की आपदा के बाद जल्दबाजी में तैयार किया गया था. यह मार्ग मंदाकिनी नदी के लेफ्ट बैंक यानी बाईं ओर से होकर गुजरता है. यात्रा सीजन में इसी रास्ते पर श्रद्धालु, घोड़े-खच्चर, कंडी और पालकी संचालक एक साथ चलते हैं. कई जगहों पर रास्ता बेहद संकरा है, जिसके कारण जाम जैसी स्थिति बन जाती है.

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स्थानीय प्रशासन के अनुसार, पिछले कुछ वर्षों में Kedarnath Yatra में आने वाले श्रद्धालुओं की संख्या रिकॉर्ड स्तर तक पहुंच चुकी है. यही वजह है कि अब मौजूदा रास्ते की क्षमता पर सवाल उठने लगे हैं. विशेषज्ञों का कहना है कि लगातार बढ़ते दबाव के कारण भविष्य में जोखिम और बढ़ सकता है.

वैज्ञानिकों ने बताया क्यों असुरक्षित है वर्तमान मार्ग

वरिष्ठ भू-वैज्ञानिक एमपीएस बिष्ट के अनुसार, पारंपरिक Kedarnath Trek Route पहले मंदाकिनी नदी के राइट बैंक यानी दाईं ओर हुआ करता था. यह हिस्सा “सनी फेस” माना जाता है, जहां ग्लेशियर कम हैं और भू-संरचना अधिक स्थिर मानी जाती है.

उन्होंने बताया कि 2013 की विनाशकारी आपदा में रामबाड़ा क्षेत्र पूरी तरह तबाह हो गया था, जिसके बाद पुराना रास्ता भी कई स्थानों पर बह गया. इसके बाद तत्काल संपर्क बहाल करने के लिए नदी के लेफ्ट बैंक में लिंचौली और भीमबली से होकर नया रास्ता बनाया गया. यही मार्ग आज उपयोग में है.

हालांकि वैज्ञानिकों का कहना है कि वर्तमान Kedarnath Trek Route पूरी तरह वैज्ञानिक मानकों पर आधारित नहीं है. यह रास्ता ऐसे क्षेत्र में बना है जहां नदी लगातार कटाव करती रहती है. कई हिस्से ढीली चट्टानों, मलबे और ग्लेशियर मोरेन पर बने हुए हैं. ऐसे इलाकों में भारी बारिश या भूस्खलन की स्थिति में खतरा बढ़ सकता है.

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पुराने पौराणिक मार्ग के ऊपर तैयार हो रहा नया रास्ता

विशेषज्ञों की सलाह के बाद अब प्रशासन ने पुराने पारंपरिक मार्ग के ऊपरी हिस्से में एक नया सुरक्षित रास्ता विकसित करना शुरू किया है. यह नया Kedarnath Trek Route हार्ड रॉक यानी मजबूत चट्टानों के ऊपर डिजाइन किया गया है, जिससे इसके ज्यादा स्थिर और सुरक्षित रहने की संभावना है.

एमपीएस बिष्ट ने बताया कि इस मार्ग की विस्तृत वैज्ञानिक स्टडी की गई थी. अध्ययन में पाया गया कि मंदाकिनी के राइट बैंक वाला हिस्सा यात्रियों के लिए अधिक सुरक्षित रहेगा. खास बात यह है कि नया रास्ता वर्तमान मार्ग की तुलना में करीब एक किलोमीटर छोटा भी होगा.

विशेषज्ञों के मुताबिक इस मार्ग पर ग्लेशियर का असर कम रहेगा और भारी बर्फबारी या बारिश के दौरान रास्ता बंद होने की संभावना भी कम होगी. इससे यात्रा संचालन को लंबे समय तक सुचारु बनाए रखने में मदद मिलेगी.

यात्रियों और घोड़ों के लिए अलग-अलग रास्ते की तैयारी

प्रशासन की योजना सिर्फ नया रास्ता बनाने तक सीमित नहीं है. भीड़ नियंत्रण और सुरक्षा को बेहतर बनाने के लिए अब यात्रियों और घोड़े-खच्चरों की आवाजाही को अलग करने की तैयारी भी चल रही है.

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रुद्रप्रयाग जिलाधिकारी विशाल मिश्रा ने बताया कि नए Kedarnath Trek Route पर अभी कई जरूरी सुविधाएं विकसित की जा रही हैं. इनमें स्ट्रीट लाइट, पेयजल व्यवस्था, बैठने के लिए बेंच और बारिश से बचाव के लिए शेड शामिल हैं. काम पूरा होने के बाद यह मार्ग यात्रियों के लिए खोल दिया जाएगा.

उन्होंने कहा कि वर्तमान रास्ते पर घोड़े-खच्चरों की आवाजाही जारी रहेगी, जबकि नया मार्ग पैदल यात्रियों के लिए इस्तेमाल किया जाएगा. इससे भीड़ कम होगी और हादसों का खतरा भी घटेगा.

2013 आपदा के बाद सबसे बड़ा बदलाव माना जा रहा फैसला

विशेषज्ञ इस नई योजना को 2013 की आपदा के बाद केदारनाथ यात्रा में सबसे महत्वपूर्ण बदलावों में से एक मान रहे हैं. प्रशासन का मानना है कि सुरक्षित और वैज्ञानिक आधार पर तैयार किया गया नया Kedarnath Trek Route आने वाले वर्षों में यात्रा प्रबंधन की तस्वीर बदल सकता है.

चारधाम यात्रा में हर साल बढ़ती श्रद्धालुओं की संख्या को देखते हुए यह कदम भविष्य की जरूरत माना जा रहा है. सरकार का लक्ष्य सिर्फ यात्रा को आसान बनाना नहीं, बल्कि श्रद्धालुओं की सुरक्षा सुनिश्चित करना भी है.

अब सभी की नजर इस बात पर टिकी है कि नया मार्ग पूरी तरह कब तैयार होगा और आगामी यात्रा सीजन में यह किस तरह राहत पहुंचाता है.

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