Uttarakhand NFHS Report 2026: उत्तराखंड में स्वास्थ्य सेवाओं को लेकर जारी हुए National Family Health Survey यानी Uttarakhand NFHS Report 2026 ने राज्य की स्वास्थ्य व्यवस्था की एक मिश्रित तस्वीर पेश की है। एक तरफ मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य, संस्थागत प्रसव और टीकाकरण जैसे महत्वपूर्ण संकेतकों में उल्लेखनीय सुधार देखने को मिला है, वहीं दूसरी ओर शुरुआती स्तनपान और बच्चों को केवल मां का दूध देने जैसे मामलों में गिरावट चिंता बढ़ाने वाली साबित हुई है।
राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण (NFHS-6) 2023-24 के ताजा आंकड़ों ने यह संकेत दिया है कि राज्य ने स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच बढ़ाने में अच्छी प्रगति की है। हालांकि पोषण और शिशु देखभाल से जुड़े कुछ क्षेत्रों में अभी भी गंभीर चुनौतियां बनी हुई हैं।
गर्भवती महिलाओं की स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार
Uttarakhand NFHS Report 2026 के अनुसार राज्य में गर्भवती महिलाओं को समय पर स्वास्थ्य सेवाएं मिलने की स्थिति पहले से बेहतर हुई है। गर्भावस्था के पहले तीन महीनों में प्रसवपूर्व जांच कराने वाली महिलाओं का प्रतिशत 68.8 से बढ़कर 80.6 फीसदी हो गया है।
इसके अलावा कम से कम चार बार प्रसवपूर्व जांच कराने वाली महिलाओं की संख्या भी 61.8 फीसदी से बढ़कर 68.3 फीसदी तक पहुंच गई है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि यह सुधार ग्रामीण और दूरस्थ क्षेत्रों तक स्वास्थ्य सेवाओं की बेहतर पहुंच का संकेत है।
हालांकि आयरन-फोलिक एसिड (IFA) की गोलियां 180 दिन तक लेने वाली महिलाओं के प्रतिशत में केवल मामूली सुधार देखने को मिला है। वहीं 100 दिनों तक IFA सेवन करने वाली महिलाओं की संख्या में गिरावट दर्ज की गई, जिसे चिंता का विषय माना जा रहा है।
संस्थागत प्रसव में दर्ज हुई बड़ी बढ़ोतरी
Uttarakhand NFHS Report 2026 में सबसे सकारात्मक बदलाव संस्थागत प्रसव को लेकर सामने आया है। राज्य में अस्पतालों और स्वास्थ्य केंद्रों में होने वाले प्रसवों का प्रतिशत 83.2 से बढ़कर 88.9 फीसदी तक पहुंच गया है।
इसी तरह कुशल स्वास्थ्यकर्मियों की निगरानी में होने वाले प्रसवों का प्रतिशत भी 90 फीसदी के पार पहुंच गया है। विशेषज्ञों का कहना है कि इससे मातृ मृत्यु दर और नवजात मृत्यु दर को कम करने में मदद मिल सकती है।
हालांकि रिपोर्ट में यह भी सामने आया कि सीजेरियन डिलीवरी के मामलों में तेजी से बढ़ोतरी हुई है। निजी अस्पतालों में सीजेरियन प्रसव की दर लगभग 48 फीसदी तक पहुंच गई है, जबकि सरकारी संस्थानों में भी इसमें इजाफा देखा गया। स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि बढ़ते सीजेरियन मामलों की गहराई से समीक्षा किए जाने की जरूरत है।
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प्रसव के बाद मां और बच्चे की देखभाल बेहतर
Uttarakhand NFHS Report 2026 के आंकड़े बताते हैं कि पोस्ट-नेटल केयर यानी प्रसव के बाद मां और नवजात की स्वास्थ्य जांच सेवाओं में भी सुधार हुआ है। प्रसव के दो दिनों के भीतर स्वास्थ्यकर्मियों से जांच कराने वाली माताओं का प्रतिशत 78 फीसदी से बढ़कर 86.5 फीसदी हो गया है। वहीं जन्म के दो दिनों के भीतर स्वास्थ्य जांच पाने वाले बच्चों की संख्या भी बढ़ी है। विशेषज्ञों का कहना है कि यह सुधार नवजात शिशुओं में संक्रमण और शुरुआती स्वास्थ्य समस्याओं को कम करने में मददगार साबित हो सकता है।
टीकाकरण अभियान में शानदार प्रदर्शन
Uttarakhand NFHS Report 2026 में टीकाकरण के क्षेत्र में राज्य की उपलब्धियों को काफी महत्वपूर्ण माना गया है। 12 से 23 महीने आयु वर्ग के पूर्ण टीकाकृत बच्चों का प्रतिशत 81.1 से बढ़कर 86 फीसदी हो गया है।
रिपोर्ट के अनुसार रोटावायरस वैक्सीन की तीन खुराक पाने वाले बच्चों की संख्या में सबसे ज्यादा सुधार देखने को मिला है। यह आंकड़ा 32.3 फीसदी से बढ़कर 92.8 फीसदी तक पहुंच गया है।
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इसके अलावा पोलियो, बीसीजी, खसरा और हेपेटाइटिस-बी टीकों की कवरेज में भी उल्लेखनीय बढ़ोतरी दर्ज की गई है। स्वास्थ्य विभाग का मानना है कि राज्य में चलाए जा रहे टीकाकरण अभियान और जागरूकता कार्यक्रमों का सकारात्मक असर अब स्पष्ट रूप से दिखाई देने लगा है।
कुपोषण में कमी, लेकिन पूरी राहत नहीं
Uttarakhand NFHS Report 2026 के मुताबिक बच्चों में कुपोषण के कई संकेतकों में सुधार देखने को मिला है। पांच साल से कम उम्र के अवरुद्ध वृद्धि (Stunting) वाले बच्चों का प्रतिशत 27 से घटकर 20 फीसदी हो गया है।
कम वजन वाले बच्चों और अत्यधिक दुबले बच्चों की संख्या में भी कमी दर्ज की गई है। विशेषज्ञों का कहना है कि पोषण योजनाओं और आंगनबाड़ी सेवाओं का असर अब धीरे-धीरे दिखाई दे रहा है। हालांकि हर पांचवां बच्चा अब भी अवरुद्ध वृद्धि की समस्या से जूझ रहा है, जो राज्य के लिए बड़ी चुनौती बनी हुई है।
स्तनपान से जुड़े आंकड़ों ने बढ़ाई चिंता
जहां कई स्वास्थ्य संकेतकों में सुधार हुआ है, वहीं Uttarakhand NFHS Report 2026 में शुरुआती स्तनपान और केवल मां का दूध देने से जुड़े आंकड़े चिंता बढ़ाने वाले साबित हुए हैं।
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जन्म के एक घंटे के भीतर स्तनपान शुरू कराने वाली माताओं का प्रतिशत घट गया है। वहीं छह महीने तक केवल मां का दूध पाने वाले बच्चों की संख्या में भी लगभग 12 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई है।
स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि यह स्थिति भविष्य में बच्चों की रोग प्रतिरोधक क्षमता और पोषण पर असर डाल सकती है। इसलिए स्तनपान को लेकर जागरूकता बढ़ाने की जरूरत बताई जा रही है।
किशोर मातृत्व और बाल विवाह में आई कमी
Uttarakhand NFHS Report 2026 के अनुसार कम उम्र में विवाह और किशोरावस्था में मातृत्व के मामलों में सुधार हुआ है। 18 साल से पहले विवाह करने वाली महिलाओं की संख्या में कमी दर्ज की गई है। वहीं किशोर मातृत्व के मामलों में भी गिरावट आई है, जिसे सामाजिक जागरूकता और शिक्षा का सकारात्मक परिणाम माना जा रहा है।
स्वास्थ्य मंत्री ने क्या कहा?
उत्तराखंड के स्वास्थ्य मंत्री सुबोध उनियाल ने रिपोर्ट पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि राज्य में मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य सेवाओं को लगातार मजबूत किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि नए आंकड़े कई मामलों में सकारात्मक संकेत दे रहे हैं और आने वाले वर्षों में स्वास्थ्य सेवाओं को और बेहतर बनाने के लिए लगातार प्रयास जारी रहेंगे।
अभी भी कई चुनौतियां बाकी
Uttarakhand NFHS Report 2026 ने यह साफ कर दिया है कि राज्य ने स्वास्थ्य सेवाओं के क्षेत्र में अच्छी प्रगति जरूर की है, लेकिन पोषण और शिशु स्वास्थ्य से जुड़े कुछ मुद्दों पर अभी और काम करने की जरूरत है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि सरकार स्वास्थ्य सेवाओं के साथ-साथ व्यवहार परिवर्तन, पोषण शिक्षा और स्तनपान जागरूकता पर भी फोकस बढ़ाती है, तो आने वाले वर्षों में उत्तराखंड राष्ट्रीय स्तर पर बेहतर प्रदर्शन कर सकता है।
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