By using this site, you agree to the Privacy Policy and Terms of Use.
Accept
LokhitkrantiLokhitkrantiLokhitkranti
  • होम
  • मेरा शहर
    • गाजियाबाद
    • नोएडा
    • हापुड़
    • मुजफ्फरनगर
    • दिल्ली एनसीआर
  • राज्य
    • दिल्ली एनसीआर
    • उत्तर प्रदेश
    • उत्तराखंड
    • झारखंड
    • आंध्र प्रदेश
    • हिमाचल प्रदेश
    • हरियाणा
    • राजस्थान
    • मध्य प्रदेश
    • बिहार
    • पश्चिम बंगाल
    • पंजाब
    • जम्मू-कश्मीर
    • छत्तीसगढ़
    • गुजरात
    • महाराष्ट्र
  • राष्ट्रीय
  • अंतर्राष्ट्रीय
  • राजनीति
  • ताज़ा खबरे
  • शिक्षा
  • ई पेपर
  • अन्य
    • खेल
    • बॉलीवुड
    • लाइफस्टाइल
    • टेक्नोलॉजी
    • जीडीए
    • हेल्थ
    • ट्रेंडिंग
    • वायरल
    • धर्म कर्म
    • बिज़नेस
    • ऑटोमोबाइल
    • जॉब
    • मनोरंजन
Reading: Phool Dei Festival: बसंत के साथ खिल उठा लोकपर्व फूलदेई, बच्चों ने देहलियों पर बिखेरे रंग-बिरंगे फूल
Share
Notification Show More
Font ResizerAa
Font ResizerAa
LokhitkrantiLokhitkranti
Search
  • होम
  • मेरा शहर
    • गाजियाबाद
    • नोएडा
    • हापुड़
    • मुजफ्फरनगर
    • दिल्ली एनसीआर
  • राज्य
    • दिल्ली एनसीआर
    • उत्तर प्रदेश
    • उत्तराखंड
    • झारखंड
    • आंध्र प्रदेश
    • हिमाचल प्रदेश
    • हरियाणा
    • राजस्थान
    • मध्य प्रदेश
    • बिहार
    • पश्चिम बंगाल
    • पंजाब
    • जम्मू-कश्मीर
    • छत्तीसगढ़
    • गुजरात
    • महाराष्ट्र
  • राष्ट्रीय
  • अंतर्राष्ट्रीय
  • राजनीति
  • ताज़ा खबरे
  • शिक्षा
  • ई पेपर
  • अन्य
    • खेल
    • बॉलीवुड
    • लाइफस्टाइल
    • टेक्नोलॉजी
    • जीडीए
    • हेल्थ
    • ट्रेंडिंग
    • वायरल
    • धर्म कर्म
    • बिज़नेस
    • ऑटोमोबाइल
    • जॉब
    • मनोरंजन
Have an existing account? Sign In
Follow US
Lokhitkranti > Blog > उत्तराखंड > Phool Dei Festival: बसंत के साथ खिल उठा लोकपर्व फूलदेई, बच्चों ने देहलियों पर बिखेरे रंग-बिरंगे फूल
उत्तराखंड

Phool Dei Festival: बसंत के साथ खिल उठा लोकपर्व फूलदेई, बच्चों ने देहलियों पर बिखेरे रंग-बिरंगे फूल

Manisha
Last updated: 2026-03-15 1:22 अपराह्न
Manisha Published 2026-03-15
Share
Phool Dei Festival
Phool Dei Festival: बसंत के साथ खिल उठा लोकपर्व फूलदेई, बच्चों ने देहलियों पर बिखेरे रंग-बिरंगे फूल
SHARE

Phool Dei Festival: देवभूमि उत्तराखंड में बसंत ऋतु के आगमन के साथ ही पारंपरिक लोकपर्वों की रौनक शुरू हो गई है। इन्हीं में से एक प्रमुख पर्व फूलदेई है, जिसे चैत्र मास के पहले दिन बड़े उत्साह और श्रद्धा के साथ मनाया जाता है। कुमाऊं क्षेत्र में इसे फूलदेई और गढ़वाल में फूल संक्रांति के नाम से जाना जाता है।

Contents
बच्चों के उत्साह से महका गांव-गांवबच्चों को मिलते हैं आशीर्वाद और उपहारप्रकृति से जुड़ाव का संदेश देता है यह पर्वपौराणिक मान्यता से भी जुड़ा है फूलदेईउत्तराखंड की सांस्कृतिक पहचान का प्रतीक

हर साल की तरह इस बार भी Phool Dei Festival पूरे उत्साह के साथ मनाया जा रहा है। सुबह होते ही गांवों और कस्बों में बच्चों की टोलियां फूलों की टोकरी लेकर घर-घर पहुंचती हैं और देहली पर फूल बिखेरकर परिवार की सुख-समृद्धि की कामना करती हैं।

बच्चों के उत्साह से महका गांव-गांव

Phool Dei Festival Uttarakhand को खासतौर पर बच्चों का त्योहार माना जाता है। इस दिन बच्चे सुबह-सुबह अपने दोस्तों के साथ आसपास के बगीचों, खेतों और जंगलों से रंग-बिरंगे फूल इकट्ठा करते हैं।

इसके बाद वे छोटी-छोटी टोकरी में फूल सजाकर गांव या मोहल्ले के हर घर की देहली पर जाते हैं। वहां वे फूल डालते हुए पारंपरिक लोकगीत गाते हैं। सबसे प्रसिद्ध गीत की पंक्तियां हैं – “फूलदेई छम्मा देई, दैणी द्वार भर भकार”

इस गीत के माध्यम से बच्चे घर की खुशहाली, समृद्धि और अन्न से भरे रहने की मंगलकामना करते हैं। Phool Dei Festival के दौरान पूरे गांव में उत्सव जैसा माहौल देखने को मिलता है।

READ MORE: विधानसभा में विभागवार बजट पारित, शिक्षा, स्वास्थ्य और ग्रामीण विकास पर बड़ा फोकस

बच्चों को मिलते हैं आशीर्वाद और उपहार

जब बच्चे घरों की देहली पर फूल डालते हैं तो घर के सदस्य भी उनका गर्मजोशी से स्वागत करते हैं। परंपरा के अनुसार उन्हें गुड़, मिठाई, चावल, अनाज और कभी-कभी पैसे भी भेंट किए जाते हैं।

कई परिवार बच्चों को फल और मिठाइयां देकर उनका उत्साह बढ़ाते हैं। इस तरह Phool Dei Festival केवल एक धार्मिक या सांस्कृतिक पर्व नहीं बल्कि सामाजिक मेलजोल का भी प्रतीक बन जाता है।

स्थानीय लोगों का कहना है कि यह परंपरा पीढ़ियों से चली आ रही है और आज भी गांवों में उसी उत्साह के साथ निभाई जाती है।

प्रकृति से जुड़ाव का संदेश देता है यह पर्व

विशेषज्ञों के अनुसार Phool Dei Festival केवल एक त्योहार नहीं बल्कि प्रकृति के प्रति सम्मान और प्रेम का प्रतीक है। बसंत ऋतु में खिलने वाले फूलों के माध्यम से लोग प्रकृति की सुंदरता और समृद्धि का उत्सव मनाते हैं।

READ MORE: राजाजी टाइगर रिजर्व में चलेगा बड़ा सफाई अभियान, कूड़ा प्रबंधन सुधारने के लिए वन विभाग की नई पहल

यह पर्व बच्चों को पर्यावरण के महत्व के बारे में भी जागरूक करता है। फूल चुनने और प्रकृति के बीच समय बिताने से बच्चों में पर्यावरण के प्रति लगाव बढ़ता है।

साथ ही यह त्योहार समाज में आपसी प्रेम, सहयोग और सांस्कृतिक परंपराओं को बनाए रखने का संदेश भी देता है।

पौराणिक मान्यता से भी जुड़ा है फूलदेई

Phool Dei Festival से जुड़ी एक पौराणिक कथा भी प्रचलित है। मान्यता के अनुसार एक समय भगवान शिव गहन तपस्या में लीन थे। उन्हें जगाने के लिए माता पार्वती ने शिवगणों को बच्चों का रूप धारण कर फूल अर्पित करने का आदेश दिया।

कहा जाता है कि शिवगणों ने अलग-अलग स्थानों से फूल एकत्रित किए और भगवान शिव को अर्पित किए। फूलों की सुगंध से पूरा कैलाश पर्वत महक उठा और भगवान शिव की तपस्या भंग हो गई।

Latest News Update Uttar Pradesh News,उत्तराखंड की ताज़ा ख़बर

तभी से इस परंपरा को फूल अर्पित करने के प्रतीक के रूप में मनाया जाने लगा। धीरे-धीरे यह परंपरा Phool Dei Festival के रूप में विकसित हुई और आज भी उत्तराखंड के गांव-गांव में बड़े उत्साह के साथ मनाई जाती है।

उत्तराखंड की सांस्कृतिक पहचान का प्रतीक

उत्तराखंड की संस्कृति में लोकपर्वों का विशेष महत्व है और Phool Dei Festival उनमें से एक प्रमुख पर्व माना जाता है। यह त्योहार न केवल परंपराओं को जीवित रखता है बल्कि नई पीढ़ी को अपनी सांस्कृतिक जड़ों से जोड़ने का काम भी करता है।

बसंत की खुशबू, बच्चों की हंसी और पारंपरिक गीतों की मधुर ध्वनि के साथ यह पर्व पूरे प्रदेश में खुशियों का संदेश फैलाता है।

आज भी जब Phool Dei Festival मनाया जाता है तो गांव-गांव में देहलियों पर बिखरे फूल और बच्चों की खिलखिलाहट इस बात का एहसास कराते हैं कि पहाड़ की संस्कृति आज भी उतनी ही जीवंत और समृद्ध है जितनी सदियों पहले थी।

पढ़े ताजा अपडेट : Hindi News, Today Hindi News, Breaking

You Might Also Like

Badrinath Kedarnath Yatra: उत्तराखंड राजनीति में कांग्रेस की बड़ी रणनीति, बदरीनाथ-केदारनाथ यात्रा से चुनावी अभियान की शुरुआत

SDRF Rescue Operation: टिहरी झील में बड़ा हादसा टला, आंधी-तूफान में टूटे फ्लोटिंग हटमेंट, SDRF ने 30 लोगों को बचाया

Development Projects Monitoring: उत्तराखंड में विकास योजनाओं पर सीएम धामी का फोकस, हर ब्लॉक में बनेगा बालिका छात्रावास

Lansdowne Renaming Controversy: ‘जसवंतगढ़’ नाम को लेकर बढ़ा विवाद, विरोध और समर्थन में बंटे लोग

Cell Broadcast Alert Test: आज मोबाइल पर बजेगा इमरजेंसी अलर्ट, उत्तराखंड सरकार ने लोगों से न घबराने की अपील की

TAGGED:Phool Dei FestivalPhool Dei Festival UttarakhandPhool Sankranti Uttarakhandtraditional festivals UttarakhandUttarakhand cultural festivalUttarakhand spring festival
Share This Article
Facebook Twitter Email Print
Leave a comment

प्रातिक्रिया दे जवाब रद्द करें

आपका ईमेल पता प्रकाशित नहीं किया जाएगा. आवश्यक फ़ील्ड चिह्नित हैं *

Follow US

Find US on Social Medias
FacebookLike
TwitterFollow
YoutubeSubscribe
TelegramFollow
Popular News
Delhi Traffic Challan Rules 2026
दिल्ली एनसीआर

Delhi Traffic Rules: दिल्ली में ट्रैफिक चालानों पर बड़ा एक्शन, 45 दिन बाद होगी सख्त कार्रवाई

ShreeJi ShreeJi 2026-05-04
Summer Health Drinks: गर्मी में नारियल पानी फ्रिज में रखना सही या नहीं? जानिए कब बन जाता है नुकसानदायक
Thalapathy Vijay: विजय का जीत के बाद पहला बयान, PM के बाद राहुल गांधी को दिया जवाब
Jabalpur Breaking News: जबलपुर क्रूज हादसे के बाद बड़ा फैसला, CM ने घोषित की आर्थिक मदद
CM Nayab Saini Rewari Rally: रेवाड़ी रैली में नायब सैनी का दमदार संदेश, ट्रिपल इंजन से तेज होगा विकास
- Advertisement -
Ad imageAd image

Categories

  • ताज़ा खबरे
  • बॉलीवुड
  • अंतर्राष्ट्रीय
  • धर्म कर्म
  • वायरल
  • बिज़नेस

About US

लोकहित क्रांति न्यूज़ एक निष्पक्ष, विश्वसनीय और जनहित को समर्पित डिजिटल समाचार मंच है। हमारा उद्देश्य देश–दुनिया की ताज़ा, सटीक और प्रमाणिक ख़बरें आप तक तेज़ी से पहुँचाना है।
Quick Link
  • About Us
  • Contact Us
  • Terms and Condition
  • DNPA Code of Ethics
Must Read
  • Privacy Policy
  • Disclaimer
  • Grievance Redressal Policy

Subscribe US

Subscribe to our newsletter to get our newest articles instantly!

Copyrights © Lokhit Kranti. All Rights Reserved.
Welcome Back!

Sign in to your account

Lost your password?