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Lokhitkranti > उत्तराखंड > Lansdowne Renaming Controversy: ‘जसवंतगढ़’ नाम को लेकर बढ़ा विवाद, विरोध और समर्थन में बंटे लोग
उत्तराखंड

Lansdowne Renaming Controversy: ‘जसवंतगढ़’ नाम को लेकर बढ़ा विवाद, विरोध और समर्थन में बंटे लोग

Lokhit Kranti
Last updated: 2026-05-02 11:18 am
Lokhit Kranti Published 2026-05-02
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Lansdowne Renaming Controversy
Lansdowne Renaming Controversy: ‘जसवंतगढ़’ नाम को लेकर बढ़ा विवाद, विरोध और समर्थन में बंटे लोग
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Lansdowne Renaming Controversy: उत्तराखंड के प्रसिद्ध पर्यटन स्थल लैंसडाउन में इन दिनों माहौल गर्माया हुआ है। वजह है शहर का नाम बदलकर ‘जसवंतगढ़’ किए जाने का प्रस्ताव। Lansdowne Renaming Controversy अब सिर्फ एक प्रशासनिक फैसला नहीं रह गया, बल्कि यह स्थानीय पहचान, पर्यटन और शहीद सम्मान से जुड़ा बड़ा मुद्दा बन चुका है।

Contents
कैसे शुरू हुआ पूरा विवाद?किसके नाम पर पड़ा था लैंसडाउन?पर्यटन पर असर की चिंतारक्षा मंत्री को भेजा गया ज्ञापनसमर्थकों का क्या कहना है?सोशल मीडिया पर भी छिड़ी बहसलैंसडाउन की खास पहचानसरकार के सामने बड़ी चुनौतीक्या बदलेगा फैसला?

स्थानीय नागरिक, व्यापारी संगठन और सामाजिक समूह इस प्रस्ताव को लेकर अलग-अलग राय रखते हैं। कुछ लोग इसे देशभक्ति और वीर सैनिक के सम्मान से जोड़ रहे हैं, तो कई लोग इसे शहर की ऐतिहासिक पहचान पर असर मान रहे हैं।

कैसे शुरू हुआ पूरा विवाद?

जानकारी के अनुसार, 10 अप्रैल को कैंटोनमेंट बोर्ड की बैठक में लैंसडाउन का नाम बदलकर ‘जसवंतगढ़’ रखने का प्रस्ताव पारित किया गया था। यह नाम 1962 के भारत-चीन युद्ध के वीर सैनिक शहीद जसवंत सिंह रावत के सम्मान में सुझाया गया। जसवंत सिंह रावत ने अरुणाचल प्रदेश के नूरानांग सेक्टर में अद्भुत साहस दिखाते हुए देश के लिए सर्वोच्च बलिदान दिया था। Lansdowne Renaming Controversy की शुरुआत इसी प्रस्ताव के बाद हुई, जिसके बाद शहर में समर्थन और विरोध दोनों तेज हो गए।

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किसके नाम पर पड़ा था लैंसडाउन?

लैंसडाउन का इतिहास ब्रिटिश काल से जुड़ा हुआ है। इस शहर का नाम ब्रिटिश भारत के तत्कालीन वायसराय हेनरी पेटी-फिट्जमौरिस, मार्क्वेस ऑफ लैंसडाउन के नाम पर रखा गया था। वर्ष 1890 में स्थापित यह शहर ब्रिटिश सेना की छावनी के रूप में विकसित किया गया था।

पौड़ी गढ़वाल जिले में स्थित यह हिल स्टेशन अपनी शांत वादियों, चीड़ के जंगलों, औपनिवेशिक वास्तुकला और ठंडे मौसम के लिए देशभर में मशहूर है। आज भी लैंसडाउन उत्तराखंड के सबसे शांत और सुंदर पर्यटन स्थलों में गिना जाता है।

पर्यटन पर असर की चिंता

Lansdowne Renaming Controversy का सबसे बड़ा विरोध स्थानीय व्यापारियों और पर्यटन व्यवसाय से जुड़े लोगों की ओर से सामने आया है। व्यापार मंडल और होटल व्यवसायियों का कहना है कि ‘लैंसडाउन’ नाम की पहचान दशकों में बनी है। देश और विदेश से आने वाले पर्यटक इसी नाम से इस जगह को जानते हैं।

उनका मानना है कि नाम बदलने से पर्यटन ब्रांडिंग पर असर पड़ सकता है और इससे स्थानीय कारोबार प्रभावित हो सकता है। इसी विरोध में कई व्यापारिक संगठनों ने बाजार बंद कर प्रदर्शन भी किया।

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रक्षा मंत्री को भेजा गया ज्ञापन

नाम परिवर्तन के विरोध में स्थानीय संगठनों ने रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह को ज्ञापन भी सौंपा है। ज्ञापन में मांग की गई है कि शहर की ऐतिहासिक पहचान को बनाए रखा जाए और नाम बदलने का फैसला वापस लिया जाए। Lansdowne Renaming Controversy को लेकर विरोध कर रहे लोगों का कहना है कि सरकार को सड़क, स्वास्थ्य, पार्किंग और पर्यटन सुविधाओं को बेहतर बनाने पर ध्यान देना चाहिए।

समर्थकों का क्या कहना है?

जहां एक तरफ विरोध हो रहा है, वहीं कई लोग नाम बदलने के समर्थन में भी सामने आए हैं। समर्थकों का कहना है कि देश के वीर सैनिकों को सम्मान देना हर नागरिक का कर्तव्य है। उनका मानना है कि जसवंत सिंह रावत जैसे सैनिकों की वीरता को आने वाली पीढ़ियों तक पहुंचाने के लिए यह कदम जरूरी है। कुछ स्थानीय लोगों और पूर्व सैनिक संगठनों ने मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी को पत्र लिखकर नाम बदलने का समर्थन भी किया है।

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सोशल मीडिया पर भी छिड़ी बहस

Lansdowne Renaming Controversy अब सोशल मीडिया पर भी चर्चा का बड़ा विषय बन चुकी है। कुछ लोग इसे ऐतिहासिक सुधार बता रहे हैं, जबकि कई यूजर्स का कहना है कि नाम बदलने से विकास नहीं होता। सोशल मीडिया पर बड़ी संख्या में लोग यह सवाल भी उठा रहे हैं कि क्या शहरों के नाम बदलने के बजाय उनकी मूल समस्याओं पर काम नहीं होना चाहिए।

लैंसडाउन की खास पहचान

लैंसडाउन सिर्फ एक पर्यटन स्थल नहीं बल्कि गढ़वाल राइफल्स का मुख्यालय भी है। यह शहर अपनी साफ-सफाई, शांत वातावरण और प्राकृतिक सुंदरता के कारण परिवारों और प्रकृति प्रेमियों की पहली पसंद माना जाता है।

यहां मौजूद टिप-इन-टॉप, भीम पकोड़ा, सेंट मैरी चर्च और गढ़वाल राइफल्स संग्रहालय जैसे स्थल पर्यटकों को आकर्षित करते हैं। Lansdowne Renaming Controversy के बीच कई लोग यह भी कह रहे हैं कि शहर की सांस्कृतिक और ऐतिहासिक पहचान को बचाए रखना जरूरी है।

सरकार के सामने बड़ी चुनौती

अब राज्य सरकार के सामने सबसे बड़ी चुनौती संतुलन बनाने की है। एक तरफ शहीद के सम्मान का मुद्दा है, तो दूसरी तरफ शहर की ऐतिहासिक पहचान और पर्यटन उद्योग की चिंता।

विशेषज्ञों का मानना है कि सरकार को इस मामले में सभी पक्षों से चर्चा कर कोई अंतिम फैसला लेना चाहिए। Lansdowne Renaming Controversy ने यह साफ कर दिया है कि उत्तराखंड में यह मुद्दा आने वाले समय में और ज्यादा राजनीतिक और सामाजिक बहस का कारण बन सकता है।

क्या बदलेगा फैसला?

फिलहाल नाम परिवर्तन को लेकर अंतिम निर्णय होना बाकी है। हालांकि विरोध और समर्थन दोनों को देखते हुए यह मुद्दा राज्यभर में चर्चा का केंद्र बन चुका है। आने वाले दिनों में सरकार की ओर से क्या फैसला लिया जाएगा, इस पर सभी की नजरें टिकी हुई हैं।

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