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Lokhitkranti > उत्तराखंड > Jojoda Marriage Tradition: जौनसार-बावर की अनोखी ‘जोजोड़ा’ परंपरा, एक ही परिवार में हुई 5 शादियां, दुल्हनें लेकर पहुंचीं बारात
उत्तराखंड

Jojoda Marriage Tradition: जौनसार-बावर की अनोखी ‘जोजोड़ा’ परंपरा, एक ही परिवार में हुई 5 शादियां, दुल्हनें लेकर पहुंचीं बारात

Lokhit Kranti
Last updated: 2026-04-30 11:42 am
Lokhit Kranti Published 2026-04-30
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Jojoda Marriage Tradition
Jojoda Marriage Tradition: जौनसार-बावर की अनोखी ‘जोजोड़ा’ परंपरा, एक ही परिवार में हुई 5 शादियां, दुल्हनें लेकर पहुंचीं बारात
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Jojoda Marriage Tradition: उत्तराखंड के देहरादून जिले के जनजातीय क्षेत्र जौनसार-बावर में एक बार फिर ऐसी शादी देखने को मिली, जिसने आधुनिक दिखावे और खर्चीली शादियों के दौर में समाज को नई सीख दी है। यहां एक ही परिवार में पांच भाइयों की शादी एक साथ संपन्न हुई और सबसे खास बात यह रही कि दुल्हनें खुद बारात लेकर दूल्हों के घर पहुंचीं। जौनसार-बावर की इस पारंपरिक विवाह पद्धति को Jojoda Marriage Tradition कहा जाता है, जो आज भी यहां की संस्कृति का अहम हिस्सा बनी हुई है।

Contents
पांच दुल्हनों के स्वागत में सजा पूरा गांवक्या है Jojoda Marriage Tradition?फिजूलखर्ची रोकने का अनोखा तरीकाशराब और दिखावे से दूर रही शादीसंस्कृति और परंपरा पर गर्वआधुनिक दौर में भी जिंदा है परंपरा

खारसी गांव में आयोजित इस सामूहिक विवाह समारोह ने पूरे इलाके का ध्यान अपनी ओर खींच लिया। शादी सिर्फ एक पारिवारिक कार्यक्रम नहीं रही, बल्कि यह सांस्कृतिक विरासत, सामाजिक एकता और सादगी की मिसाल बन गई।

पांच दुल्हनों के स्वागत में सजा पूरा गांव

देहरादून जिले के जौनसार-बावर क्षेत्र स्थित खारसी गांव में जब एक साथ पांच दुल्हनें बारात लेकर पहुंचीं तो पूरा गांव उत्सव में डूब गया। पारंपरिक वाद्य यंत्रों की धुन, फूलों की मालाएं और स्थानीय रीति-रिवाजों के बीच दुल्हनों का स्वागत किया गया। गांव के लोग इस ऐतिहासिक पल के गवाह बने।

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परिवार के मुखिया दौलत सिंह चौहान के घर में यह विवाह समारोह आयोजित हुआ। परिवार के पांच युवकों की शादी एक साथ संपन्न हुई, जबकि परिवार की एक बेटी की विदाई भी इसी अवसर पर हुई। इस आयोजन ने संयुक्त परिवार की ताकत और पारंपरिक मूल्यों को एक बार फिर सामने रखा।

क्या है Jojoda Marriage Tradition?

जौनसार-बावर की Jojoda Marriage Tradition बाकी भारतीय विवाह परंपराओं से बिल्कुल अलग है। आमतौर पर भारत में दूल्हा बारात लेकर दुल्हन के घर जाता है, लेकिन यहां इसका उल्टा होता है। इस परंपरा में दुल्हन अपने परिवार और बारातियों के साथ दूल्हे के घर पहुंचती है।

विवाह की रस्में दूल्हे के घर पर पूरी की जाती हैं और अगले दिन दुल्हन पक्ष के लोग वापस लौट जाते हैं। कुछ दिनों बाद दुल्हन अपने पति के साथ मायके जाती है। यह परंपरा सदियों पुरानी मानी जाती है और आज भी जौनसार-बावर के कई गांवों में निभाई जाती है।

फिजूलखर्ची रोकने का अनोखा तरीका

Jojoda Marriage Tradition सिर्फ एक सांस्कृतिक पहचान नहीं, बल्कि सामाजिक संतुलन का भी माध्यम है। इस परंपरा का सबसे बड़ा उद्देश्य शादी में होने वाले अनावश्यक खर्च को कम करना है। एक ही परिवार के कई भाइयों की शादी एक साथ होने से खर्च कम होता है और दोनों पक्षों पर आर्थिक बोझ नहीं पड़ता।

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परिवार के सदस्य खजान सिंह चौहान ने कहा कि आज के दौर में लोग शादी में लाखों रुपये सिर्फ दिखावे पर खर्च कर देते हैं, जबकि उसी पैसे का उपयोग बच्चों की शिक्षा और भविष्य के लिए किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि उनकी कोशिश रही कि शादी पूरी तरह सादगी और पारंपरिक मूल्यों के साथ संपन्न हो।

शराब और दिखावे से दूर रही शादी

इस Jojoda Marriage Tradition सामूहिक विवाह समारोह की एक और खास बात यह रही कि इसमें शराब और अन्य नशे पर पूरी तरह रोक लगाई गई। महंगे कपड़े, गहने और भव्य सजावट की जगह पारंपरिक सादगी को महत्व दिया गया।

परिवार के लोगों ने बताया कि शादी में किसी भी पक्ष पर खर्च का दबाव नहीं डाला गया। यही वजह रही कि यह आयोजन सामाजिक संदेश देने वाला समारोह बन गया। स्थानीय लोगों का मानना है कि Jojoda Marriage Tradition आधुनिक समाज को संतुलित और जिम्मेदार विवाह की दिशा दिखा सकती है।

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संस्कृति और परंपरा पर गर्व

परिवार की बेटी नीलम चौहान ने कहा कि उन्हें अपनी संस्कृति पर गर्व है। उन्होंने बताया कि एक तरफ उनकी बहन की विदाई हुई, वहीं दूसरी तरफ पांच भाभियां घर आईं, जिससे पूरा परिवार खुशी से भर गया।

स्थानीय लोगों के अनुसार जौनसार-बावर की परंपराएं सिर्फ रस्में नहीं हैं, बल्कि परिवार और समाज को जोड़े रखने का माध्यम हैं। यहां संयुक्त परिवार आज भी मजबूत सामाजिक इकाई माने जाते हैं।

आधुनिक दौर में भी जिंदा है परंपरा

आज जब देशभर में शादियां दिखावे और खर्च का प्रतीक बनती जा रही हैं, तब जौनसार-बावर की Jojoda Marriage Tradition एक अलग मिसाल पेश कर रही है। यह परंपरा बताती है कि शादी सिर्फ भव्य आयोजन नहीं, बल्कि सामाजिक और सांस्कृतिक जुड़ाव का माध्यम भी हो सकती है।

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