Dilip Verma Gang: लखनऊ में उत्तर प्रदेश एसटीएफ द्वारा एक लाख रुपये के इनामी बदमाश संजय उर्फ संजीव को मुठभेड़ में मार गिराए जाने के बाद Dilip Verma Gang एक बार फिर सुर्खियों में आ गया है। पुलिस का दावा है कि संजय लंबे समय से दिलीप वर्मा के गिरोह से जुड़ा हुआ था और रंगदारी व अन्य आपराधिक गतिविधियों में सक्रिय भूमिका निभाता था। इस एनकाउंटर के बाद पूर्वांचल के इस कथित आपराधिक नेटवर्क को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं।
कौन है दिलीप वर्मा? (Dilip Verma Gang)
अयोध्या के गोसाईंगंज थाना क्षेत्र के सरैया गांव निवासी दिलीप वर्मा का नाम वर्षों से पुलिस रिकॉर्ड में दर्ज गंभीर आपराधिक मामलों से जुड़ता रहा है। पुलिस के अनुसार उसके खिलाफ हत्या, हत्या के प्रयास, लूट, रंगदारी, गैंगस्टर एक्ट, आपराधिक षड्यंत्र और धमकी समेत 32 से अधिक मुकदमे दर्ज बताए जाते हैं। माफिया विरोधी अभियान के दौरान उसने अदालत में आत्मसमर्पण किया था, जिसके बाद उसे आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई थी। हालिया दावों के अनुसार वह फिलहाल जमानत पर बाहर है। हालांकि, उसके खिलाफ दर्ज मामलों में अंतिम निर्णय संबंधित अदालतों के अधीन है।
Dilip Verma Gang पर पुलिस के आरोप
पुलिस रिकॉर्ड के मुताबिक Dilip Verma Gang पर संगठित तरीके से व्यापारियों और ठेकेदारों से रंगदारी वसूलने के आरोप लगते रहे हैं। जांच एजेंसियों का दावा है कि गिरोह के कई सदस्य जेल में बंद रहने के दौरान भी उसके नाम का इस्तेमाल कर लोगों को धमकाते थे और अवैध वसूली की कोशिश करते थे। पुलिस का कहना है कि गिरोह का नेटवर्क कई जिलों तक फैला हुआ था, जिसकी समय-समय पर जांच और कार्रवाई की गई।
2018 का चर्चित रंगदारी मामला
वर्ष 2018 में अम्बेडकरनगर के अकबरपुर में एक व्यापारी से कथित तौर पर जेल से रंगदारी मांगने का मामला काफी चर्चाओं में रहा था। आरोप था कि रकम नहीं देने पर व्यापारी को जान से मारने की धमकी दी गई। उस समय पुलिस ने गिरोह से जुड़े कई लोगों को गिरफ्तार कर रंगदारी नेटवर्क का खुलासा करने का दावा किया था। इस घटना के बाद Dilip Verma Gang का नाम प्रदेशभर में सुर्खियों में आया था।
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संजय उर्फ संजीव की भूमिका क्या बताई जा रही है? (Dilip Verma Gang)
सूत्रों के अनुसार एसटीएफ एनकाउंटर में मारा गया संजय उर्फ संजीव अम्बेडकरनगर के अहिरौली थाना क्षेत्र के चक कोडार गांव का रहने वाला था। पुलिस का दावा है कि वह दिलीप वर्मा का करीबी सहयोगी था और रंगदारी व विरोधियों पर हमलों जैसी घटनाओं में सक्रिय भूमिका निभाता था। हालांकि, इन सभी दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है और जांच एजेंसियां मामले की आगे भी जांच कर रही हैं।
राजनीतिक सक्रियता को लेकर भी चर्चा (Dilip Verma Gang)
हाल के दिनों में यह भी चर्चा रही है कि जेल से बाहर आने के बाद दिलीप वर्मा ने अम्बेडकरनगर में राजनीतिक गतिविधियां बढ़ाई हैं। स्थानीय स्तर पर यह दावा किया जाता है कि वह सामाजिक और जातीय समीकरणों के आधार पर अपनी राजनीतिक जमीन तैयार करने की कोशिश कर रहा है। सोशल मीडिया पर उसकी कुछ तस्वीरें भाजपा नेताओं के साथ वायरल हुई हैं, लेकिन इन तस्वीरों की प्रामाणिकता और किसी राजनीतिक दल में उसकी आधिकारिक भूमिका की पुष्टि नहीं हुई है।
कानूनी प्रक्रिया पूरी होने का इंतजार
संजय उर्फ संजीव के एनकाउंटर के बाद Dilip Verma Gang एक बार फिर चर्चा के केंद्र में है। पुलिस अपने दावों के आधार पर गिरोह की गतिविधियों और नेटवर्क की जांच कर रही है। वहीं, दिलीप वर्मा से जुड़े सभी आरोप और आपराधिक मामले अभी भी न्यायिक प्रक्रिया के अधीन हैं। ऐसे में इस पूरे प्रकरण पर अंतिम निष्कर्ष संबंधित अदालतों और जांच एजेंसियों की आधिकारिक रिपोर्ट के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा।
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