स्कूल संचालकों को जारी हुआ सख्त निर्देश
उत्तर प्रदेश के कासगंज परिवहन विभाग ने जिले के सभी विद्यालय संचालकों और प्रबंधकों के लिए एक महत्वपूर्ण सूचना जारी की है। इसमें साफ निर्देश दिया गया है कि स्कूलों में संचालित सभी वाहनों के पंजीयन, फिटनेस, परमिट, बीमा और अन्य जरूरी दस्तावेजों को तुरंत सही और वैध कराया जाए। विभाग ने स्पष्ट किया है कि दस्तावेज पूर्ण और वैध होने के बाद ही वाहनों का संचालन किया जाए।
बंद वाहनों का पंजीयन कराएं निरस्त
परिवहन विभाग के अनुसार, अगर किसी स्कूल का कोई वाहन अब संचालन में नहीं है या उसे समाप्त कर दिया गया है, लेकिन वह अभी भी आरटीओ कार्यालय के रिकॉर्ड में दिख रहा है, तो ऐसे वाहन का पंजीयन नियमानुसार तुरंत निरस्त कराया जाए। साथ ही जो वाहन चलने योग्य नहीं हैं और विद्यालय परिसर में खड़े हैं, उनकी जानकारी “Non-Utilised Vehicle” के रूप में लिखित रूप से आरटीओ कार्यालय को दी जाए।
अधूरे प्रपत्र वाले वाहनों पर पूरी तरह रोक
विभाग ने यह भी निर्देश दिया है कि जिन वाहनों की फिटनेस, परमिट या अन्य जरूरी प्रपत्र समाप्त हो चुके हैं, उन्हें कब तक वैध कराया जाएगा, इसकी जानकारी भी कार्यालय को देनी होगी। सबसे अहम बात यह है कि जिन वाहनों के दस्तावेज पूर्ण और वैध नहीं हैं, उनका इस्तेमाल किसी भी हालत में बच्चों के आवागमन के लिए नहीं किया जाएगा।
15 साल पुराने वाहनों पर प्रतिबंध
परिवहन विभाग ने सख्ती से कहा है कि 15 वर्ष से पुराने वाहनों का इस्तेमाल स्कूलों में बच्चों के परिवहन के लिए नहीं किया जाएगा। इसके अलावा किसी भी अनफिट, असुरक्षित या अधूरे कागजात वाले वाहन को बच्चों के लिए संचालित करने की सख्त मनाही है।
हर वाहन में अटेंडेंट अनिवार्य
निर्देशों के मुताबिक, हर स्कूल वाहन में बच्चों की सुरक्षा और निगरानी के लिए अटेंडेंट की व्यवस्था अनिवार्य रूप से सुनिश्चित की जानी चाहिए। इसके अलावा अगर किसी वाहन को स्कूल ने किसी अन्य व्यक्ति को बेच दिया है, तो यह सुनिश्चित करना जरूरी है कि वाहन स्कूल के नाम से उस व्यक्ति के नाम ट्रांसफर हो गया है या नहीं। अगर ट्रांसफर नहीं हुआ, तो इसकी पूरी जिम्मेदारी विद्यालय की ही होगी।
लापरवाही पर नहीं होगी कोई माफी
परिवहन विभाग, कासगंज ने स्पष्ट रूप से कहा है कि विद्यालय प्रबंधन को स्कूल वाहनों से जुड़े सभी वैधानिक और सुरक्षा मानकों का पूरी तरह पालन सुनिश्चित करना होगा। विभाग ने दो टूक शब्दों में कहा कि बच्चों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है और किसी भी प्रकार की लापरवाही किसी भी हालत में स्वीकार नहीं की जाएगी।


