Why Mahadev Worshiped in Ling: महाशिवरात्रि हिंदू धर्म का एक अत्यंत पवित्र पर्व है, जिसे भगवान शिव की आराधना और उपासना के लिए मनाया जाता है। यह पर्व फाल्गुन मास की कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी को आता है और पूरे देश में भक्त बड़े उत्साह के साथ इसे मनाते हैं। इस दिन भक्त शिवलिंग का विधिपूर्वक पूजन करते हैं, व्रत रखते हैं और शिवजी के गुणों का स्मरण करते हैं।
इस साल यानी 2026 में शिवरात्रि 15 फरवरी को मनाई जाएगी। इस बीच आज हम आपको शिवलिंग के बारे में कुछ विशेष बाते बताने जा रहे हैं जिसे हर सनातनी को जरूर जानना चाहिए तो चलिए जानते हैं।
साकार और निराकार रूप
हिंदू धर्म में भगवान शिव को साकार और निराकार रूप दोनों में पूजा जाता है, लेकिन विशेषकर शिवलिंग के रूप में उनकी पूजा का महत्व बहुत अधिक है। महाशिवरात्रि, सावन के महीने, प्रदोष व्रत और मासिक शिवरात्रि पर भक्त विधिपूर्वक शिवलिंग का जलाभिषेक और पूजा-अर्चना करते हैं। यह पूजा न केवल धार्मिक कृत्य है बल्कि इसे आध्यात्मिक शक्ति का स्रोत माना जाता है।
शिवलिंग की पूजा के पिछे क्या है रहस्य
शिवलिंग के पीछे छिपे रहस्यों को जानना हर भक्त के लिए महत्वपूर्ण है। (Why Mahadev Worshiped in Ling) वेदों और पुराणों के अनुसार, शिवलिंग भगवान शिव के निराकार रूप का प्रतीक है। यह न केवल अनंत ब्रह्मांड का प्रतिनिधित्व करता है, बल्कि समस्त जगत की उत्पत्ति और पालन का केंद्र भी है।

वेदों और शास्त्रों में शिवलिंग का महत्व
वेदों के अनुसार, सम्पूर्ण ब्रह्मांड में भगवान शिव ही ऐसे देवता हैं जिनकी पूजा लिंग के रूप में होती है। (Why Mahadev Worshiped in Ling) लिंग रूप में पूजा इसलिए की जाती है क्योंकि शिव स्वयं समस्त जगत के मूल कारण हैं। उन्हें आदि और अंत का देवता माना जाता है, उनका कोई निश्चित रूप या आकार नहीं है।
भगवान शिव का साकार रूप शंकर है, जबकि निराकार रूप शिवलिंग है। शिवलिंग को निराकार ब्रह्म का प्रतीक माना जाता है। वायु पुराण में वर्णन है कि हर युग के प्रलय के बाद संसार इसी शिवलिंग में समाहित होकर पुनः सृजित होता है।
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शिवलिंग की उत्पत्ति
पुराणों में एक कथा के अनुसार, ब्रह्मा जी और विष्णु जी के बीच श्रेष्ठता को लेकर विवाद हुआ। तभी अचानक एक अनंत लिंग प्रकट हुआ। दोनों देवताओं ने इसके छोर को खोजने की कोशिश की, लेकिन हजारों वर्षों बाद भी इसका स्रोत नहीं मिला। जब ब्रह्मा जी ने प्रकाश स्तंभ से पूछा, तो उत्तर आया कि यह शिव हैं।
इस लिंग से सभी जीव और स्रोत उत्पन्न हुए। इसके बाद भगवान शिव ने निराकार रूप में शिवलिंग के रूप में प्रतिष्ठित होकर ब्रह्मांड के मूल स्वरूप का प्रतीक बनना स्वीकार किया। (Why Mahadev Worshiped in Ling) ब्रह्मा और विष्णु ने सबसे पहले इस शिवलिंग की पूजा की, और तभी से यह पूजा की परंपरा शुरू हुई।
इस लिंग से सभी जीव और स्रोत उत्पन्न हुए और भगवान शिव ने निराकार रूप में शिवलिंग के रूप में प्रतिष्ठित होकर ब्रह्मांड के मूल स्वरूप का प्रतीक बनना स्वीकार किया।
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धार्मिक और आध्यात्मिक महत्व
शिवलिंग पर जल चढ़ाने मात्र से भगवान शिव प्रसन्न होते हैं और भक्तों को आशीर्वाद देते हैं। (Why Mahadev Worshiped in Ling) यह पूजा व्यक्ति के जीवन में शांति, समृद्धि और आध्यात्मिक उन्नति का मार्ग प्रशस्त करती है। शिवलिंग का पूजन केवल धार्मिक कृत्य नहीं, बल्कि ब्रह्मांड और जीवन के गहरे रहस्यों से जुड़ा हुआ आध्यात्मिक अनुभव है।



