Kalpasar Project: गुजरात की दशकों पुरानी महत्वाकांक्षी कल्पसर परियोजना (Kalpasar Project) अब तेजी से सुर्खियों में है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नीदरलैंड दौरे ने इस परियोजना को नई रफ्तार देने का काम किया है। समुद्र में विशाल बांध निर्माण और जल प्रबंधन की आधुनिक तकनीक के लिए मशहूर नीदरलैंड अब गुजरात के साथ मिलकर काम करेगा। इससे राज्य की जल सुरक्षा, सिंचाई और ऊर्जा क्षेत्र में बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है।
क्या है कल्पसर परियोजना?
कल्पसर परियोजना (Kalpasar Project) गुजरात के खंभात की खाड़ी में एक विशाल बांध बनाने की योजना है। इसका उद्देश्य समुद्र में बहने वाली सात नदियों के पानी को रोककर मीठे पानी का विशाल जलाशय तैयार करना है। यह परियोजना सिर्फ पानी बचाने तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें सिंचाई, परिवहन, पवन ऊर्जा, सौर ऊर्जा और मत्स्य पालन को भी शामिल किया गया है।
इस परियोजना की कल्पना पहली बार तब की गई थी जब नरेंद्र मोदी गुजरात के मुख्यमंत्री थे। वर्षों की तकनीकी चुनौतियों और पर्यावरणीय जटिलताओं के बावजूद यह योजना लगातार आगे बढ़ रही है।
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नीदरलैंड क्यों बना सबसे बड़ा साझेदार?
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नीदरलैंड की विश्व प्रसिद्ध जल प्रबंधन संरचना अफस्लुइटडिज्क का दौरा किया। यह 32 किलोमीटर लंबा बैरियर डैम समुद्र के खारे पानी को रोककर मीठे पानी का विशाल भंडार तैयार करता है। यही मॉडल अब गुजरात के कल्पसर परियोजना (Kalpasar Project) के लिए प्रेरणा बन रहा है।
भारत और नीदरलैंड के बीच जल प्रबंधन और तकनीकी सहयोग को लेकर समझौता होने के बाद अब इस परियोजना में आधुनिक डच इंजीनियरिंग का इस्तेमाल किया जाएगा। समुद्र में बांध निर्माण के क्षेत्र में नीदरलैंड को दुनिया का सबसे अनुभवी देश माना जाता है।
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गुजरात को कैसे मिलेगा सबसे बड़ा फायदा?
अगर कल्पसर परियोजना (Kalpasar Project) सफल होता है, तो सौराष्ट्र के 9 जिलों और 42 तहसीलों को सिंचाई का लाभ मिलेगा। करीब 10 लाख हेक्टेयर भूमि को पानी उपलब्ध कराया जा सकेगा। इससे सूखा प्रभावित इलाकों की तस्वीर बदल सकती है। इतना ही नहीं, दक्षिण गुजरात और सौराष्ट्र के बीच की दूरी भी काफी कम हो जाएगी। जहां अभी लगभग 240 किलोमीटर का सफर तय करना पड़ता है, वहीं परियोजना पूरी होने के बाद यह दूरी लगभग 60 किलोमीटर रह जाएगी। इससे व्यापार और परिवहन को भी जबरदस्त फायदा होगा।
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ऊर्जा और पर्यटन का नया हब बनेगा गुजरात
कल्पसर परियोजना (Kalpasar Project) केवल जल संरक्षण योजना नहीं है। इससे लगभग 1500 मेगावाट पवन ऊर्जा और 1000 मेगावाट सौर ऊर्जा उत्पादन का लक्ष्य रखा गया है। इसके अलावा मत्स्य पालन और पर्यटन उद्योग को भी नई पहचान मिलेगी। विशेषज्ञों का मानना है कि यह परियोजना गुजरात को जल संकट से बाहर निकालने के साथ-साथ आर्थिक रूप से भी मजबूत बनाएगी। यही वजह है कि केंद्र और राज्य सरकार दोनों इस परियोजना को प्राथमिकता दे रहे हैं।
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पीएम मोदी क्यों हैं बेहद गंभीर?
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी लंबे समय से कल्पसर परियोजना (Kalpasar Project) को गुजरात के भविष्य से जोड़कर देखते रहे हैं। सरदार सरोवर परियोजना की तरह ही इसे भी राज्य की जल क्रांति का अगला बड़ा कदम माना जा रहा है। हालिया नीदरलैंड दौरे और तकनीकी सहयोग समझौते ने साफ कर दिया है कि केंद्र सरकार अब इस परियोजना को जमीन पर उतारने के लिए पूरी ताकत लगा रही है। आने वाले वर्षों में यह परियोजना भारत की सबसे बड़ी जल प्रबंधन योजनाओं में शामिल हो सकती है।
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