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Lokhitkranti > राष्ट्रीय > NCRB Crime Report: दहेज की कीमत बन रही बेटियों की जान, लेकिन क्यों नहीं मिलती दोषियों को सजा?
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NCRB Crime Report: दहेज की कीमत बन रही बेटियों की जान, लेकिन क्यों नहीं मिलती दोषियों को सजा?

Kannu
Last updated: 2026-05-19 12:58 अपराह्न
Kannu Published 2026-05-19
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NCRB Crime Report: Daughters' lives are becoming the price of dowry, but why are the culprits not punished?
NCRB Crime Report: दहेज की कीमत बन रही बेटियों की जान, लेकिन क्यों नहीं मिलती दोषियों को सजा?
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Dowry Death Cases in India: भारत में दहेज प्रथा खत्म होने का नाम नहीं ले रही है। पढ़े-लिखे और आधुनिक समाज में भी शादी के बाद कई महिलाओं को दहेज के लिए प्रताड़ित किया जाता है। कहीं कार की मांग होती है तो कहीं लाखों रुपये मांगे जाते हैं। जब परिवार मांग पूरी नहीं कर पाता, तब बहुओं को मानसिक और शारीरिक यातनाएं दी जाती हैं। कई महिलाएं इस अत्याचार को सहन नहीं कर पातीं और उनकी मौत हो जाती है। देश में लगातार बढ़ते ऐसे मामलों ने लोगों को सोचने पर मजबूर कर दिया है कि आखिर बेटियों की सुरक्षा कब सुनिश्चित होगी।

Contents
Dowry Death Cases in India: शादी के बाद क्यों बढ़ने लगता है दबावDowry Death Cases in India: कानून होने के बाद भी जारी अपराधDowry Death Cases in India: आंकड़ों ने खोली डरावनी तस्वीरDowry Death Cases in India: आखिर क्यों कमजोर पड़ जाते हैं केसDowry Death Cases in India: अदालतों में लंबित हैं हजारों मामलेDowry Death Cases in India:हाल की घटनाओं से मचा हड़कंपDowry Death Cases in India: बेटियों को लेकर बदलनी होगी सोच

Also Read: साझा समृद्धि और स्थिरता पर PM मोदी का फोकस, Europe को दिया बड़ा न्योता

Dowry Death Cases in India: शादी के बाद क्यों बढ़ने लगता है दबाव

कई मामलों में शादी के शुरुआती दिनों में सब कुछ सामान्य दिखाई देता है, लेकिन धीरे-धीरे दहेज की मांग शुरू हो जाती है। पहले छोटे-छोटे ताने दिए जाते हैं और फिर बहू पर दबाव बनाया जाता है। कुछ परिवारों में महिला को खाने, पहनने और बाहर जाने तक की आजादी नहीं दी जाती। लगातार अपमान और हिंसा के कारण महिलाएं मानसिक तनाव में चली जाती हैं। यही प्रताड़ना कई बार खतरनाक घटनाओं में बदल जाती है।

Dowry Death Cases in India: कानून होने के बाद भी जारी अपराध

सरकार ने दहेज रोकने के लिए सख्त कानून बनाए हैं। शादी के सात साल के भीतर महिला की संदिग्ध मौत होने पर पुलिस दहेज हत्या का मामला दर्ज कर सकती है। महिलाओं को प्रताड़ना से बचाने के लिए अलग-अलग धाराएं भी लागू की जाती हैं। इसके बावजूद अपराध कम नहीं हो रहे हैं। कई बार आरोपी कानून का डर भी नहीं मानते और खुलेआम महिलाओं को परेशान करते रहते हैं।

Dowry Death Cases in India: आंकड़ों ने खोली डरावनी तस्वीर

देश में हर साल हजारों महिलाएं दहेज की वजह से जान गंवा रही हैं। NCRB की रिपोर्ट के मुताबिक उत्तर प्रदेश, बिहार, मध्य प्रदेश और राजस्थान जैसे राज्यों में सबसे ज्यादा मामले सामने आते हैं। रिपोर्ट यह भी बताती है कि कई मामलों में वर्षों तक सुनवाई चलती रहती है। इस वजह से पीड़ित परिवार इंसाफ के लिए भटकता रहता है। बढ़ते मामलों ने समाज और प्रशासन दोनों की चिंता बढ़ा दी है।

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Dowry Death Cases in India: आखिर क्यों कमजोर पड़ जाते हैं केस

दहेज हत्या के मामलों में सबसे बड़ी समस्या मजबूत सबूतों की कमी होती है। कई बार घटनास्थल से जरूरी जानकारी समय पर नहीं जुटाई जाती। कुछ मामलों में परिवार और गवाह डर या दबाव में बयान बदल देते हैं। लंबी कानूनी प्रक्रिया भी केस को कमजोर कर देती है। जब अदालत में पर्याप्त सबूत नहीं पहुंचते, तो आरोपी आसानी से बच निकलते हैं और पीड़ित परिवार निराश हो जाता है।

Dowry Death Cases in India: अदालतों में लंबित हैं हजारों मामले

देश की अदालतों में दहेज हत्या से जुड़े हजारों केस अभी भी लंबित पड़े हैं। कई परिवार सालों तक न्याय का इंतजार करते रहते हैं। धीमी सुनवाई और बार-बार तारीख मिलने से लोगों का भरोसा कमजोर होने लगता है। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर ऐसे मामलों की सुनवाई तेजी से हो, तो दोषियों को जल्दी सजा मिल सकती है और अपराधियों में डर पैदा होगा।

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Dowry Death Cases in India:हाल की घटनाओं से मचा हड़कंप

हाल ही में भोपाल और नोएडा से सामने आए मामलों ने पूरे देश को झकझोर दिया। शादी के कुछ समय बाद महिलाओं की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई। परिवारों ने ससुराल पक्ष पर गंभीर आरोप लगाए हैं। इन घटनाओं के बाद सोशल मीडिया से लेकर राजनीतिक गलियारों तक बहस तेज हो गई है। लोग लगातार महिलाओं की सुरक्षा और सख्त कार्रवाई की मांग कर रहे हैं।

Dowry Death Cases in India: बेटियों को लेकर बदलनी होगी सोच

दहेज जैसी बुराई तब तक खत्म नहीं होगी जब तक समाज अपनी मानसिकता नहीं बदलेगा। लोगों को समझना होगा कि शादी कोई व्यापार नहीं है। बेटियों को बोझ मानने की सोच खत्म करनी होगी। अगर परिवार खुद दहेज लेने और देने से इनकार करें, तभी यह समस्या कम होगी। समाज और कानून दोनों की जिम्मेदारी है कि महिलाओं को सम्मान और सुरक्षा वाला माहौल दिया जाए।

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