Twisha Sharma Case Supreme Court: भोपाल में हुई ट्विशा शर्मा की मौत अब सिर्फ एक पारिवारिक मामला नहीं रह गया है, बल्कि यह देशभर में चर्चा का विषय बन चुका है। मामले में लगातार उठ रहे सवालों और सोशल मीडिया पर बढ़ते दबाव के बीच अब सुप्रीम कोर्ट ने भी स्वत: संज्ञान लेकर सुनवाई शुरू करने का फैसला किया है। यही वजह है कि यह केस अब कानूनी, सामाजिक और जांच एजेंसियों की विश्वसनीयता से जुड़ा बड़ा मुद्दा बन गया है।
सुप्रीम कोर्ट की एंट्री से केस ने पकड़ी रफ्तार
ट्विशा शर्मा डेथ केस (Twisha Sharma Case Supreme Court) में सोमवार को भारत के मुख्य न्यायाधीश जस्टिस सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ सुनवाई करेगी। सुप्रीम कोर्ट द्वारा स्वत: संज्ञान लिए जाने को बेहद अहम माना जा रहा है, क्योंकि आमतौर पर शीर्ष अदालत तभी दखल देती है जब किसी मामले में व्यापक जनहित या न्याय प्रक्रिया पर गंभीर सवाल खड़े होते हैं। इस पूरे घटनाक्रम ने साफ कर दिया है कि मामला अब केवल आत्महत्या या पारिवारिक विवाद तक सीमित नहीं माना जा रहा, बल्कि जांच प्रक्रिया की निष्पक्षता भी सवालों के घेरे में आ गई है।
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हाईकोर्ट ने दी दूसरे पोस्टमार्टम की मंजूरी
मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने पहले ही ट्विशा (Twisha Sharma Case Supreme Court) के शव का दोबारा पोस्टमार्टम कराने की अनुमति दे दी थी। अदालत के आदेश के बाद अब दिल्ली एम्स की विशेषज्ञ डॉक्टरों की टीम भोपाल जाकर जांच करेगी। इस फैसले को ट्विशा के परिवार ने बड़ी राहत बताया है। ट्विशा के भाई आशीष शर्मा ने कहा कि उन्हें न्यायपालिका पर भरोसा है और दूसरे पोस्टमार्टम से कई अहम तथ्य सामने आ सकते हैं। कोर्ट ने ट्विशा के शव को एम्स भोपाल में सुरक्षित रखने के निर्देश भी दिए हैं ताकि जांच प्रभावित न हो।
12 मई की रात क्या हुआ था?
पुलिस के अनुसार, 12 मई की रात करीब 10:26 बजे ट्विशा शर्मा (Twisha Sharma Case Supreme Court) अपने भोपाल स्थित ससुराल के घर की छत पर जिम्नास्टिक रिंग की रस्सी से लटकी मिली थीं। इसके बाद उन्हें अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने मृत घोषित कर दिया। 13 मई को एम्स भोपाल के फोरेंसिक मेडिसिन और टॉक्सिकोलॉजी विभाग में पोस्टमार्टम किया गया। शुरुआती रिपोर्ट में मौत का कारण फांसी बताया गया था। हालांकि परिवार इस रिपोर्ट से संतुष्ट नहीं है और उन्होंने शुरुआत से ही हत्या की आशंका जताई है।
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परिवार ने जांच पर उठाए सवाल
मामले (Twisha Sharma Case Supreme Court) ने नया मोड़ तब लिया जब ट्विशा के चचेरे भाई ने अदालत में आरोपी पति समर्थ सिंह के व्यवहार पर सवाल उठाए। उनका दावा है कि सुनवाई (Twisha Sharma Case Supreme Court) के दौरान समर्थ सिंह के चेहरे पर किसी तरह की चिंता या तनाव नजर नहीं आया। उन्होंने यह भी कहा कि 11 दिन बाद दूसरे पोस्टमार्टम की अनुमति मिलने तक कई महत्वपूर्ण सबूतों के साथ छेड़छाड़ हो चुकी होगी। परिवार का आरोप है कि शुरुआती जांच में कई बिंदुओं को नजरअंदाज किया गया और मामले को जल्दबाजी में आत्महत्या बताने की कोशिश हुई।
सोशल मीडिया पर बढ़ता दबाव
ट्विशा शर्मा केस सोशल मीडिया पर लगातार ट्रेंड कर रहा है। हजारों लोग निष्पक्ष जांच की मांग कर रहे हैं। कई महिला संगठनों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने भी मामले में पारदर्शी जांच की मांग उठाई है। लोगों का कहना है कि अगर दूसरे पोस्टमार्टम की जरूरत महसूस हुई है, तो जाहिर तौर पर शुरुआती जांच में कुछ न कुछ ऐसा जरूर था जिसने संदेह पैदा किया। यही कारण है कि यह मामला अब केवल एक परिवार की लड़ाई नहीं, बल्कि न्याय व्यवस्था की परीक्षा बन चुका है।
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दूसरे पोस्टमार्टम से क्या बदल सकता है?
विशेषज्ञों के अनुसार, दूसरे पोस्टमार्टम में शरीर पर मौजूद चोटों, फोरेंसिक संकेतों और अन्य मेडिकल तथ्यों की दोबारा जांच होगी। इससे यह स्पष्ट हो सकता है कि मौत वास्तव में आत्महत्या थी या किसी और परिस्थिति में हुई। हालांकि इतने दिनों बाद दोबारा जांच होने से सबूतों की गुणवत्ता प्रभावित होने की आशंका भी जताई जा रही है। फिर भी परिवार को उम्मीद है कि मेडिकल टीम की नई रिपोर्ट कई महत्वपूर्ण सवालों के जवाब दे सकती है।
अब सबकी नजर सुप्रीम कोर्ट पर
फिलहाल पूरे देश की नजर सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई पर टिकी हुई है। यह देखना अहम होगा कि अदालत जांच एजेंसियों को क्या निर्देश देती है और क्या इस मामले में किसी स्वतंत्र जांच एजेंसी की एंट्री होती है। ट्विशा शर्मा केस (Twisha Sharma Case Supreme Court) ने एक बार फिर यह बहस छेड़ दी है कि संवेदनशील मामलों में शुरुआती जांच कितनी पारदर्शी और वैज्ञानिक होनी चाहिए। आने वाले दिनों में यह केस कई नए खुलासे कर सकता है।
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