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Lokhitkranti > ताज़ा खबरे > UGC regulations Supreme Court: UGC के नए नियमों पर सुप्रीम कोर्ट की सख्ती, ‘अस्पष्ट परिभाषा से दुरुपयोग का खतरा’, 2012 के नियम बहाल
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UGC regulations Supreme Court: UGC के नए नियमों पर सुप्रीम कोर्ट की सख्ती, ‘अस्पष्ट परिभाषा से दुरुपयोग का खतरा’, 2012 के नियम बहाल

Lokhit Kranti
Last updated: 2026-01-29 10:44 अपराह्न
By Lokhit Kranti 6 महीना ago
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UGC regulations Supreme Court
UGC regulations Supreme Court: UGC के नए नियमों पर सुप्रीम कोर्ट की सख्ती, ‘अस्पष्ट परिभाषा से दुरुपयोग का खतरा’, 2012 के नियम बहाल
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UGC regulations Supreme Court: विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) द्वारा हाल ही में अधिसूचित जाति-आधारित भेदभाव से जुड़े नए रेगुलेशन पर सुप्रीम कोर्ट ने अहम हस्तक्षेप किया है। देशभर में शिक्षाविदों, छात्र संगठनों और सामाजिक संगठनों के विरोध के बीच सुप्रीम कोर्ट ने इन नए नियमों (UGC regulations Supreme Court) पर अंतरिम रोक लगा दी है। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि अगले आदेश तक 2012 के पुराने नियम ही लागू रहेंगे। मामले की अगली सुनवाई 19 मार्च को होगी।

Contents
संवैधानिकता और वैधता की कसौटी पर जांच‘नए नियम अस्पष्ट, दुरुपयोग की आशंका’शिक्षा संस्थानों में दिखनी चाहिए भारत की एकता2012 के नियम क्यों अहम?जस्टिस बागची की अहम टिप्पणीयाचिकाकर्ताओं का पक्षक्या है इस फैसले का व्यापक असर?

Read More: खराब दृश्यता बनी वजह, नागरिक उड्डयन मंत्री का बयान, सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता

संवैधानिकता और वैधता की कसौटी पर जांच

चीफ जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस ज्योमाल्या बागची की पीठ ने कहा कि अदालत इस मामले को केवल संवैधानिकता और वैधता के नजरिये से देख रही है। कोर्ट ने (UGC regulations Supreme Court) दो टूक कहा कि यह कोई राजनीतिक मुद्दा नहीं है, बल्कि शैक्षणिक संस्थानों में निष्पक्ष, सुरक्षित और समावेशी वातावरण बनाए रखने से जुड़ा संवेदनशील सवाल है।

‘नए नियम अस्पष्ट, दुरुपयोग की आशंका’

सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने UGC के नए रेगुलेशन की भाषा पर गंभीर सवाल उठाए। पीठ ने कहा कि नियमों में प्रयुक्त शब्दावली अस्पष्ट है और इससे दुरुपयोग की संभावना बनती है। कोर्ट के अनुसार, किसी भी रेगुलेशन में स्पष्टता जरूरी है ताकि उसका इस्तेमाल भेदभाव बढ़ाने के बजाय उसे रोकने के लिए हो।

UGC regulations Supreme Court
UGC regulations Supreme Court

शिक्षा संस्थानों में दिखनी चाहिए भारत की एकता

CJI सूर्यकांत ने टिप्पणी करते हुए कहा कि देश के शैक्षणिक संस्थानों में भारत की एकता और विविधता झलकनी चाहिए। आज़ादी के 75 साल बाद भी समाज को पूरी तरह जाति से मुक्त (UGC regulations Supreme Court) न कर पाने पर चिंता जताते हुए उन्होंने कहा कि कोर्ट एक ऐसा माहौल चाहता है जहां छात्र डर, भेदभाव और असमानता से मुक्त होकर शिक्षा प्राप्त कर सकें।

2012 के नियम क्यों अहम?

कोर्ट ने स्पष्ट किया कि 2012 में लागू नियमों के तहत आरक्षित वर्गों के लिए एक मजबूत शिकायत निवारण तंत्र पहले से मौजूद है। CJI ने कहा कि कोर्ट की प्राथमिक चिंता यही है कि आरक्षित समुदायों की सुरक्षा कमजोर न पड़े। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि सामान्य वर्ग की शिकायतों से कोर्ट का कोई सीधा सरोकार नहीं है।

जस्टिस बागची की अहम टिप्पणी

जस्टिस ज्योमाल्या बागची ने सुनवाई के दौरान कहा कि जब पहले से ही प्रभावी ढांचा (जिसे उन्होंने ‘3E’ कहा) मौजूद है, तो नए नियमों में जोड़े गए प्रावधानों की प्रासंगिकता पर सवाल उठता है। उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि भारत को उस स्थिति तक नहीं पहुंचना चाहिए जहां समाज विभाजन (UGC regulations Supreme Court) की राह पर चले, जैसा कभी अमेरिका में नस्लीय आधार पर अलग-अलग स्कूलों के रूप में देखा गया था।

याचिकाकर्ताओं का पक्ष

याचिकाकर्ता की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता विष्णु शंकर जैन ने दलील दी कि UGC एक्ट की धारा 3(C) के तहत बनाए गए नए नियम असंवैधानिक हैं। उनका कहना था कि ये नियम (UGC regulations Supreme Court) इस धारणा पर आधारित हैं कि सामान्य वर्ग के छात्र स्वभाविक रूप से भेदभाव करते हैं, जो कि कानून और समानता के सिद्धांतों के खिलाफ है।

क्या है इस फैसले का व्यापक असर?

सुप्रीम कोर्ट की रोक (UGC regulations Supreme Court) से फिलहाल विश्वविद्यालयों और उच्च शिक्षण संस्थानों को स्पष्ट दिशा मिल गई है। 2012 के नियमों की बहाली से यह संदेश गया है कि कोर्ट किसी भी ऐसे बदलाव के पक्ष में नहीं है जो अस्पष्टता पैदा करे या सामाजिक संतुलन बिगाड़े। अब 19 मार्च की सुनवाई पर सभी की नजरें टिकी हैं, जहां यह तय हो सकता है कि भविष्य में UGC के नियम किस दिशा में जाएंगे।

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