Supreme Court Stray Dogs Case: आवारा कुत्तों (Stray Dogs) से जुड़े मामलों को लेकर सुप्रीम कोर्ट में चल रही सुनवाई गुरुवार को एक निर्णायक पड़ाव पर पहुंच गई। देश की सर्वोच्च अदालत ने इस मुद्दे पर दायर सभी याचिकाओं पर फैसला सुरक्षित रख लिया है। कोर्ट (Supreme Court Stray Dogs Case) ने स्पष्ट किया कि अंतिम निर्णय से पहले सभी पक्षों की लिखित दलीलें जरूरी हैं, जिन्हें एक सप्ताह के भीतर दाखिल करने का निर्देश दिया गया है। यह मामला न केवल सार्वजनिक सुरक्षा से जुड़ा है, बल्कि पशु अधिकार, प्रशासनिक जिम्मेदारी और शहरी प्रबंधन जैसे कई संवेदनशील पहलुओं को भी छूता है।
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तीन जजों की बेंच कर रही है सुनवाई
इस महत्वपूर्ण मामले की सुनवाई जस्टिस विक्रम नाथ, जस्टिस संदीप मेहता और जस्टिस एन.वी. अंजारिया की पीठ कर रही है। कोर्ट ने सभी संबंधित याचिकाओं को एक साथ सुनते हुए कहा कि यह विषय भावनात्मक होने के साथ-साथ नीतिगत संतुलन की भी मांग करता है।

डॉग लवर्स से लेकर पीड़ितों तक, सभी की सुनी गई बात
- सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court Stray Dogs Case)ने समाज के लगभग हर पक्ष को प्रतिनिधित्व देने की कोशिश की।
- डॉग लवर्स और पशु अधिकार कार्यकर्ताओं ने आवारा कुत्तों के संरक्षण और मानवीय व्यवहार की पैरवी की।
- वहीं कुत्तों के काटने से प्रभावित लोगों ने बढ़ती घटनाओं और सुरक्षा खतरे को उजागर किया।
- इसके अलावा केंद्र और राज्य सरकारों की ओर से पेश वकीलों ने प्रशासनिक चुनौतियों और अब तक उठाए गए कदमों की जानकारी दी।
- कोर्ट ने माना कि यह सिर्फ ‘कुत्ते बनाम इंसान’ का मामला नहीं है, बल्कि सह-अस्तित्व और जिम्मेदारी का सवाल है।
राज्यों ने गिनाए अपने-अपने कदम
पंजाब, तमिलनाडु, उत्तर प्रदेश और राजस्थान जैसे राज्यों ने कोर्ट के सामने बताया कि उन्होंने आवारा कुत्तों की समस्या से निपटने के लिए क्या-क्या उपाय किए हैं। इनमें शामिल हैं-
- एनिमल बर्थ कंट्रोल (ABC) कार्यक्रम
- वैक्सीनेशन ड्राइव
- स्थानीय निकायों की भागीदारी
हालांकि कोर्ट ने संकेत दिया कि नीतियों के क्रियान्वयन में एकरूपता की कमी अब भी चिंता का विषय है।
हाईवे पर आवारा कुत्ते – NHAI की दलील
सुप्रीम कोर्ट ने नेशनल हाईवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया (NHAI) के वकील की दलीलें भी सुनीं। NHAI ने बताया कि राष्ट्रीय राजमार्गों पर आवारा कुत्तों की मौजूदगी सड़क सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा है। अथॉरिटी ने कोर्ट को अवगत कराया कि-
- हाईवे पर फेंसिंग को मजबूत किया जा रहा है
- आवारा पशुओं को हटाने के लिए स्थानीय प्रशासन के साथ समन्वय किया जा रहा है
AWBI को सख्त निर्देश – देरी बर्दाश्त नहीं
सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court Stray Dogs Case) ने एनिमल वेलफेयर बोर्ड ऑफ इंडिया (AWBI) को कड़ा संदेश दिया। कोर्ट ने कहा कि जो NGOs पशु आश्रय गृह या एनिमल बर्थ कंट्रोल सेंटर चलाने के लिए अनुमति मांग रहे हैं, उनके आवेदनों को लंबित न रखा जाए। कोर्ट की साफ टिप्पणी थी ‘या तो आवेदन मंजूर करें या खारिज, लेकिन फैसले में अनावश्यक देरी न हो।’ यह निर्देश संकेत देता है कि अदालत अब प्रशासनिक सुस्ती को लेकर सख्त रुख अपनाने के मूड में है।
फैसले से क्या उम्मीद?
फैसला सुरक्षित होने के साथ ही अब निगाहें सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court Stray Dogs Case) के अंतिम आदेश पर टिकी हैं। माना जा रहा है कि कोर्ट ऐसा समाधान तलाश सकता है, जिसमें-
- मानव सुरक्षा सुनिश्चित हो
- पशु अधिकारों का उल्लंघन न हो
- और राज्यों के लिए स्पष्ट दिशानिर्देश तय हों
यह फैसला भविष्य में देशभर में आवारा कुत्तों से जुड़ी नीति और कानून की दिशा तय कर सकता है।
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