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Lokhitkranti > ताज़ा खबरे > Madhya Pradesh Investment Growth: नक्शे से नहीं, नीतियों से पहचान – दावोस से जबलपुर तक मध्यप्रदेश की विकास गाथा
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Madhya Pradesh Investment Growth: नक्शे से नहीं, नीतियों से पहचान – दावोस से जबलपुर तक मध्यप्रदेश की विकास गाथा

Lokhit Kranti
Last updated: 2026-01-24 10:07 am
Lokhit Kranti Published 2026-01-24
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Madhya Pradesh Investment Growth
Madhya Pradesh Investment Growth: नक्शे से नहीं, नीतियों से पहचान - दावोस से जबलपुर तक मध्यप्रदेश की विकास गाथा
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Madhya Pradesh Investment Growth: मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने साफ शब्दों में कहा कि किसी भी राज्य की पहचान उसके भौगोलिक नक्शे से नहीं, बल्कि उसकी उपलब्धियों और नीतिगत सफलता से तय होती है। मध्यप्रदेश (Madhya Pradesh Investment Growth) आज इसी सोच के साथ आगे बढ़ रहा है। प्रभावी नीतियों, मजबूत क्रियान्वयन और निवेश-अनुकूल वातावरण के कारण प्रदेश न केवल देश में, बल्कि वैश्विक मंच पर भी अपनी अलग पहचान बना रहा है।

Contents
दावोस से जबलपुर तक – वैश्विक मंच पर एमपी का प्रभाव2014 के बाद बदली तस्वीरसस्ती बिजली, मजबूत आधारउद्योग और रोजगार वर्ष 2025निवेशकों के लिए आकर्षक प्रोत्साहनजबलपुर और पर्यटन पर फोकसनिवेश से पहचान तक

दावोस से जबलपुर तक – वैश्विक मंच पर एमपी का प्रभाव

मुख्यमंत्री डॉ. यादव वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम (WEF) की दावोस बैठक में सहभागिता के बाद जबलपुर पहुंचे, जहां महाकौशल चेम्बर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री द्वारा आयोजित अभिनंदन समारोह में उन्होंने यह विचार रखे। उन्होंने बताया कि दावोस में 200 से अधिक देशों की भागीदारी रही, लेकिन निवेशकों का सबसे अधिक ध्यान भारत और भारतीय राज्यों पर केंद्रित था। भारत सरकार के साथ 10 राज्यों ने अपने-अपने विजन प्रस्तुत किए, जिनमें मध्यप्रदेश (Madhya Pradesh Investment Growth) खास तौर पर उभरकर सामने आया। खासकर नवकरणीय ऊर्जा, औद्योगिक नीति और सस्ती बिजली जैसे क्षेत्रों में प्रदेश ने वैश्विक निवेशकों का भरोसा जीता।

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2014 के बाद बदली तस्वीर

मुख्यमंत्री ने कहा कि वर्ष 2014 से पहले और आज के भारत में बड़ा अंतर है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत दुनिया की सबसे तेज़ी से बढ़ती अर्थव्यवस्थाओं में शामिल हुआ है। आज वैश्विक कंपनियां भारत को केवल बाजार नहीं, बल्कि दीर्घकालिक निवेश गंतव्य के रूप में देख रही हैं। इसी बदले हुए भारत की झलक मध्यप्रदेश में भी दिखाई देती है।

सस्ती बिजली, मजबूत आधार

डॉ. यादव ने बताया कि मध्यप्रदेश में सौर ऊर्जा, पवन ऊर्जा और पावर सेक्टर के जरिए बड़े पैमाने पर बिजली उत्पादन किया जा रहा है। प्रदेश में मात्र 2 रुपये 10 पैसे प्रति यूनिट की दर से बिजली उपलब्ध कराई जा रही है, जो उद्योगों के लिए बड़ी राहत है। उनका कहना था कि आर्थिक समृद्धि के बिना विकास संभव नहीं और ऊर्जा इसकी रीढ़ है। सड़क, बिजली, पानी और लैंड बैंक जैसी बुनियादी सुविधाओं के साथ प्रदेश ने उद्योगों के लिए अनुकूल माहौल तैयार किया है।

उद्योग और रोजगार वर्ष 2025

मध्यप्रदेश सरकार (Madhya Pradesh Investment Growth) ने वर्ष 2025 को ‘उद्योग और रोजगार वर्ष’ के रूप में मनाने का निर्णय लिया है। मुख्यमंत्री के अनुसार, बेरोजगारी दर के मामले में मध्यप्रदेश देश के उन तीन राज्यों में शामिल है, जहां बेरोजगारी सबसे कम है। करीब 9 करोड़ की आबादी के बावजूद यह उपलब्धि प्रदेश की नीतियों की सफलता को दर्शाती है।

निवेशकों के लिए आकर्षक प्रोत्साहन

प्रदेश में उद्योगों को बढ़ावा देने के लिए सरकार 30 प्रतिशत तक कैपिटल सब्सिडी और एमएसएमई सेक्टर को 60 प्रतिशत तक सब्सिडी दे रही है। मेडिकल शिक्षा के क्षेत्र में भी मध्यप्रदेश अग्रणी बनकर उभरा है। नए मेडिकल कॉलेज खोलने के इच्छुक निवेशकों को 25 एकड़ भूमि मात्र एक रुपये की दर पर उपलब्ध कराई जा रही है। इसके साथ ही निजी मेडिकल कॉलेजों में पढ़ने वाले छात्रों को फीस के लिए राज्य सरकार ऋण सुविधा भी प्रदान करेगी यह कदम शिक्षा को अधिक सुलभ बनाने की दिशा में अहम माना जा रहा है।

जबलपुर और पर्यटन पर फोकस

मुख्यमंत्री ने कहा कि शहरी औद्योगिकीकरण विकास को गति देता है। जबलपुर के समग्र विकास के लिए 50 किलोमीटर के दायरे में आने वाले सभी शहरों को शामिल करते हुए एक व्यापक मास्टर प्लान तैयार किया जाएगा। पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए प्रदेश में हेलीकॉप्टर सेवा शुरू की गई है, जिसमें 45 मिनट की यात्रा का किराया मात्र 3500 रुपये रखा गया है।

निवेश से पहचान तक

डॉ. मोहन यादव के भाषण का संदेश स्पष्ट था मध्यप्रदेश (Madhya Pradesh Investment Growth) अब संभावनाओं का राज्य नहीं, बल्कि परिणाम देने वाला राज्य बन चुका है। दावोस जैसे वैश्विक मंच से लेकर जबलपुर जैसे क्षेत्रीय केंद्र तक, प्रदेश की विकास यात्रा अब नई ऊंचाइयों की ओर बढ़ रही है।

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