Loudspeaker Azan Controversy: राजस्थान की राजनीति में एक बार फिर धार्मिक और सामाजिक मुद्दा केंद्र में आ गया है। जयपुर की हवा महल सीट से बीजेपी के फायर ब्रांड विधायक बालमुकुंद आचार्य ने मस्जिदों से लाउडस्पीकर (Loudspeaker Azan Controversy) के जरिए होने वाली अजान को लेकर विधानसभा में सवाल उठाया है। इसके बाद यह मामला केवल शोर-शराबे या ध्वनि प्रदूषण तक सीमित नहीं रहा, बल्कि सियासी आरोप-प्रत्यारोप का नया अखाड़ा बन गया है।
विधानसभा में उठा मुद्दा, पेश हुआ ध्यानाकर्षण प्रस्ताव
अपने बेबाक और विवादित बयानों के लिए पहचाने जाने वाले बालमुकुंद आचार्य ने राजस्थान विधानसभा में ध्यानाकर्षण प्रस्ताव पेश किया। सदन में बोलते हुए उन्होंने कहा कि उनके विधानसभा क्षेत्र हवा महल में बड़ी संख्या में मस्जिदें हैं, जिनमें से कई का निर्माण कांग्रेस शासनकाल में हुआ। उनका आरोप है कि इन मस्जिदों से दिन में पांच बार लाउडस्पीकर (Loudspeaker Azan Controversy) पर होने वाली अजान से आम लोगों को भारी परेशानी झेलनी पड़ती है।
पढ़ाई, बीमारी और नींद पर असर का दावा
बीजेपी विधायक का कहना है कि तेज आवाज में होने वाली अजान से बच्चों की पढ़ाई प्रभावित हो रही है, बीमार लोगों की तकलीफ बढ़ जाती है और बुजुर्गों की नींद बार-बार टूटती है। उन्होंने इसे केवल धार्मिक मुद्दा नहीं, बल्कि सार्वजनिक स्वास्थ्य और जीवन की गुणवत्ता से जुड़ा सवाल बताया। आचार्य के अनुसार, आधुनिक दौर में जब हर व्यक्ति के पास घड़ी और मोबाइल है, तब लाउडस्पीकर की जरूरत पर फिर से विचार होना चाहिए।
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‘घर बेचने को मजबूर लोग’ – विधायक का बड़ा दावा

बालमुकुंद आचार्य ने सदन में यह भी दावा किया कि मिश्रित आबादी वाले इलाकों में रहने वाले बहुसंख्यक समुदाय के लोग शोर से इतना परेशान हैं कि वे अपने मकान औने-पौने दामों में बेचकर शांत इलाकों में जाने को मजबूर हो रहे हैं। यह बयान सामने आते ही राजनीतिक और सामाजिक हलकों में तीखी प्रतिक्रिया शुरू हो गई।
कांग्रेस का पलटवार – नफरत की राजनीति का आरोप
इस मुद्दे पर कांग्रेस ने आक्रामक रुख अपनाया है। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा ने विधायक बालमुकुंद आचार्य की सोच पर सवाल उठाते हुए कहा कि ऐसे नेता समाज में नफरत फैलाने का काम कर रहे हैं। डोटासरा का कहना है कि धार्मिक सौहार्द बिगाड़ने वाले नेताओं को न सिर्फ विधायक पद पर रहने का अधिकार नहीं होना चाहिए, बल्कि उन्हें चुनाव लड़ने से भी वंचित किया जाना चाहिए।
सरकार का रुख – शिकायत आई तो मुद्दा उठा
राज्य सरकार फिलहाल अपने विधायक के बचाव में नजर आ रही है। गृह राज्य मंत्री जवाहर सिंह बेडम ने कहा कि अगर किसी विधायक को जनता की ओर से शिकायत मिलती है, तो उसका मुद्दा सदन में उठाना उनका अधिकार है। उन्होंने संकेत दिए कि सरकार इस मामले पर गंभीरता से विचार करेगी, हालांकि किसी ठोस कार्रवाई को लेकर फिलहाल कुछ स्पष्ट नहीं किया गया है।
सवालों के घेरे में मंशा
इस पूरे विवाद के बीच एक अहम सवाल लगातार उठ रहा है-जब मंदिरों, गुरुद्वारों और अन्य धार्मिक स्थलों पर भी लाउडस्पीकर (Loudspeaker Azan Controversy) का इस्तेमाल होता है, तो फिर आपत्ति केवल मस्जिदों की अजान पर ही क्यों? बालमुकुंद आचार्य का तर्क है कि उन्हें यह शिकायतें स्थानीय लोगों से मिल रही हैं, इसलिए उन्होंने यह मुद्दा उठाया। वहीं आलोचकों का मानना है कि यह मामला धार्मिक ध्रुवीकरण और राजनीतिक पहचान मजबूत करने की कोशिश भी हो सकता है।
आगे की राह – नियम या राजनीति?
यह विवाद अब केवल जयपुर या हवा महल सीट तक सीमित नहीं रहा। यह सवाल पूरे राज्य में गूंज रहा है कि क्या ध्वनि प्रदूषण के नाम पर सभी धार्मिक स्थलों के लिए समान नियम बनेंगे या यह मुद्दा राजनीतिक बयानबाजी (Loudspeaker Azan Controversy) में ही उलझकर रह जाएगा। आने वाले दिनों में सरकार का फैसला यह तय करेगा कि यह मामला सामाजिक संतुलन की दिशा में जाएगा या सियासी टकराव को और तेज करेगा।
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