Haryana Special Session on Women Reservation: हरियाणा विधानसभा में महिला आरक्षण से जुड़े निंदा प्रस्ताव को लेकर बुलाए गए एक दिवसीय विशेष सत्र में सोमवार को बड़ा राजनीतिक विवाद देखने को मिला। संसद में महिला आरक्षण संशोधन बिल के मुद्दे पर बने माहौल के बाद हरियाणा सरकार ने इस विषय पर चर्चा और निंदा प्रस्ताव के लिए विशेष सत्र आयोजित किया था, लेकिन यह सत्र (Haryana Special Session) पूरी तरह सियासी टकराव की भेंट चढ़ गया। मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस ने सत्र से पहले हुई विधायक दल की बैठक में बहिष्कार का निर्णय लिया और इसके बाद उसके अधिकांश विधायक सदन से अनुपस्थित रहे।
कांग्रेस का बहिष्कार और आंतरिक मतभेद आए सामने
कांग्रेस ने सत्र (Haryana Special Session) का बहिष्कार करते हुए सरकार पर गंभीर आरोप लगाए। पार्टी का कहना है कि महिला आरक्षण को लेकर वास्तविक राजनीतिक इच्छाशक्ति नहीं दिखाई जा रही है, बल्कि इसे केवल राजनीतिक मुद्दा बनाया जा रहा है। हालांकि इस बहिष्कार के बीच कांग्रेस से निलंबित विधायक जरनैल सिंह ने सभी को चौंकाते हुए सदन में भाग लिया। उन्होंने न केवल सत्र में उपस्थिति दर्ज कराई, बल्कि सरकार के रुख का समर्थन करते हुए महिला आरक्षण प्रस्ताव के पक्ष में अपनी बात रखी। जरनैल सिंह का यह कदम कांग्रेस के भीतर चल रहे मतभेदों को भी उजागर करता दिखा।
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मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी का विपक्ष पर निशाना
सत्र (Haryana Special Session) के दौरान मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने महिला आरक्षण को लेकर प्रस्ताव पेश करते हुए कहा कि कोई भी समाज तब तक पूर्ण रूप से विकसित नहीं माना जा सकता जब तक महिलाओं को समान अधिकार और अवसर नहीं मिलते। उन्होंने हरियाणा के सामाजिक और आर्थिक विकास का उल्लेख करते हुए कहा कि राज्य में पिछले साढ़े 11 वर्षों में लिंगानुपात 871 से बढ़कर 923 हुआ है, जो सरकार की नीतियों का परिणाम है।
सीएम सैनी ने कहा कि सरकार महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने के लिए कई योजनाएं चला रही है, जिनमें ‘लखपति दीदी’ और ‘ड्रोन दीदी’ जैसी योजनाएं प्रमुख हैं, जिनसे महिलाओं को आर्थिक मजबूती मिल रही है। उन्होंने विपक्ष पर आरोप लगाया कि वह महिला सशक्तिकरण जैसे मुद्दों पर भी राजनीतिक रवैया अपनाता है। मुख्यमंत्री ने कहा कि आज जब महिलाओं के सम्मान में विशेष सत्र बुलाया गया, तब भी विपक्ष ने बहिष्कार कर दिया, जो दुर्भाग्यपूर्ण है।
भूपेंद्र सिंह हुड्डा और कांग्रेस का पलटवार
पूर्व मुख्यमंत्री और नेता प्रतिपक्ष भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने सरकार के रुख पर सवाल उठाते हुए कहा कि महिला आरक्षण बिल पहले ही पारित हो चुका है, लेकिन इसे लागू करने की मंशा पर सवाल उठते हैं। उन्होंने मांग की कि इसे वर्तमान विधानसभा सीटों के आधार पर लागू किया जाना चाहिए। कांग्रेस ने सदन के बाहर एक समानांतर सत्र भी आयोजित किया, जिसकी अध्यक्षता रघुबीर कादियान ने की। कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष राव नरेंद्र सिंह ने आरोप लगाया कि परिसीमन के मुद्दे को महिला आरक्षण की आड़ में आगे बढ़ाया जा रहा है और इसे राजनीतिक लाभ के लिए इस्तेमाल किया जा रहा है।
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सदन में बढ़ी राजनीतिक गर्मी
सत्र (Haryana Special Session) के दौरान सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी बहस देखने को मिली। जहां कांग्रेस ने इसे राजनीतिक दिखावा बताया, वहीं सरकार ने विपक्ष पर महिलाओं के अधिकारों के मुद्दे से भागने का आरोप लगाया। मुख्यमंत्री ने यहां तक कहा कि कांग्रेस के कुछ विधायक सदन में मौजूद नहीं रहे, जबकि उन्हें महिलाओं के अधिकारों से जुड़े इस अहम सत्र में भाग लेना चाहिए था।
जरनैल सिंह का अलग रुख बना चर्चा का विषय
कांग्रेस से निलंबित विधायक जरनैल सिंह ने अपने बयान में कहा कि महिलाओं के आरक्षण का समर्थन हर पार्टी को करना चाहिए। उन्होंने कांग्रेस के बहिष्कार को गलत बताते हुए कहा कि इस तरह के निर्णय से पार्टी को राजनीतिक नुकसान उठाना पड़ सकता है। उनका यह बयान और सदन में उपस्थिति पूरे सत्र का सबसे चर्चित मुद्दा बन गया।
महिला आरक्षण पर सहमति से ज्यादा राजनीति हावी
हरियाणा विधानसभा का यह विशेष सत्र महिला आरक्षण जैसे महत्वपूर्ण मुद्दे पर सहमति बनाने के बजाय राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप का मंच बन गया। जहां एक ओर सरकार इसे महिला सशक्तिकरण की दिशा में कदम बता रही है, वहीं विपक्ष इसे राजनीतिक रणनीति करार दे रहा है।
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