US Iran Peace Talks:अमेरिका और ईरान के बीच गहराते सैन्य संकट को सुलझाने के लिए पाकिस्तान एक बार फिर वैश्विक कूटनीति का केंद्र बन गया है। ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अराघची एक उच्चस्तरीय प्रतिनिधिमंडल के साथ देर रात इस्लामाबाद पहुंच रहे हैं। यह दौरा पाकिस्तानी विदेश मंत्री इशाक डार और अराघची के बीच हुई उस अहम फोन कॉल के तुरंत बाद हो रहा है, जिसमें अमेरिका-ईरान संघर्षविराम और कूटनीतिक रास्तों पर विस्तार से चर्चा की गई थी। इस दौरे ने उन अटकलों को तेज कर दिया है कि खाड़ी क्षेत्र में जारी तनाव को कम करने के लिए पाकिस्तान की धरती पर दूसरे दौर की गुप्त या आधिकारिक वार्ता शुरू होने वाली है।
वहीं दूसरी ओर, वॉशिंगटन से आ रही रिपोर्ट्स ने दुनिया को चौंका दिया है। सीएनए (CNA) की रिपोर्ट के मुताबिक, राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप इस बातचीत को निर्णायक अंजाम तक पहुँचाने के लिए अपने सबसे भरोसेमंद दूतोंस्टीव विटकॉफ और जेरेड कुशनर को पाकिस्तान भेजने की योजना बना रहे हैं। अमेरिकी लॉजिस्टिक्स और सुरक्षा टीमें पहले ही इस्लामाबाद में डेरा डाल चुकी हैं, जो इस बात का स्पष्ट संकेत है कि पर्दे के पीछे एक बड़ी शांति संधि की पटकथा लिखी जा रही है। 11 और 12 अप्रैल को हुई पहले दौर की विफल वार्ता के बाद, यह दूसरा अवसर है जब दोनों दुश्मन देश एक ही मेज पर बैठने को राजी दिख रहे हैं। (US Iran Peace Talks)
अराघची का क्षेत्रीय दौरा और असीम मुनीर से बातचीत
ईरान की सरकारी न्यूज एजेंसी ‘इरना’ के अनुसार, अराघची का यह दौरा केवल पाकिस्तान तक सीमित नहीं है। वह इस्लामाबाद के बाद मस्कट और मॉस्को भी जाएंगे ताकि क्षेत्रीय सुरक्षा पर एक व्यापक सहमति बनाई जा सके। इस्लामाबाद पहुंचने से पहले अराघची ने पाकिस्तान के सेना प्रमुख जनरल असीम मुनीर से भी संपर्क साधा है। ईरान की मंशा साफ हैवह अमेरिका और इजरायल के बढ़ते दबाव के बीच एक सुरक्षित कूटनीतिक रास्ता तलाशना चाहता है, जिसमें पाकिस्तान एक भरोसेमंद मध्यस्थ की भूमिका निभा रहा है। (US Iran Peace Talks)

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इस्लामाबाद में ‘अघोषित लॉकडाउन’
संभावित शांति वार्ता और अति विशिष्ट मेहमानों (VVIPs) की सुरक्षा के मद्देनजर इस्लामाबाद और रावलपिंडी को पूरी तरह किले में तब्दील कर दिया गया है। पिछले पांच दिनों से राजधानी की प्रमुख सड़कें, बाजार और बैंक बंद हैं। अधिकारियों ने रेड ज़ोन को सील कर दिया है और वहां 10,000 से अधिक सुरक्षाकर्मियों की तैनाती की गई है। नूर खान एयरबेस के आसपास के इलाकों में आवाजाही पूरी तरह प्रतिबंधित है, जिससे शाह फैसल कॉलोनी और गुलजार-ए-कायद जैसे इलाकों के लोग घरों में कैद होने को मजबूर हैं। (US Iran Peace Talks)
ठप हुआ यातायात
कूटनीति की इस गहमागहमी का असर आम जनता पर भारी पड़ रहा है। रावलपिंडी और इस्लामाबाद के बीच चलने वाली मेट्रो बस सेवा और इलेक्ट्रिक बसें पिछले कई दिनों से निलंबित हैं। 19 अप्रैल से माल ढुलाई रुकने के कारण सप्लाई चेन पर भी असर पड़ा है। रेड ज़ोन के कार्यालयों में काम करने वाले कर्मचारियों को ‘वर्क फ्रॉम होम’ के निर्देश दिए गए हैं। अधिकारी फिलहाल वार्ता के आधिकारिक एजेंडे पर चुप्पी साधे हुए हैं, लेकिन राजधानी की सुरक्षा व्यवस्था चीख-चीख कर कह रही है कि कुछ बहुत बड़ा होने वाला है। (US Iran Peace Talks)
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