UP Encounter Policy एक बार फिर उत्तर प्रदेश की राजनीति और कानून-व्यवस्था के केंद्र में आ गई है। गाजीपुर में चर्चित विनीत राय हत्याकांड के आरोपी कमलेश के पुलिस एनकाउंटर के बाद प्रदेश में नई बहस छिड़ गई है। विपक्ष जहां इस कार्रवाई पर सवाल उठा रहा है, वहीं योगी सरकार इसे अपराध और माफिया के खिलाफ अपनी जीरो टॉलरेंस नीति का हिस्सा बता रही है।
गाजीपुर एनकाउंटर के बाद राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है। विपक्षी दलों का आरोप है कि प्रदेश में एनकाउंटर को लेकर पारदर्शिता की कमी है और कई मामलों में कार्रवाई को जाति और धर्म के नजरिए से देखा जा रहा है। दूसरी ओर सरकार का दावा है कि पुलिस केवल अपराधियों के खिलाफ कार्रवाई कर रही है और कानून-व्यवस्था को मजबूत करने के लिए सख्त कदम उठाना जरूरी है।
विनीत राय हत्याकांड के आरोपी के एनकाउंटर पर उठे सवाल
गाजीपुर में हुए इस एनकाउंटर के बाद मृतक आरोपी कमलेश के खिलाफ दर्ज मामलों और पुलिस कार्रवाई को लेकर चर्चाएं तेज हैं। विनीत राय के परिजनों ने भी एनकाउंटर पर सवाल खड़े किए हैं और पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की है। परिवार का कहना है कि उन्हें कई बिंदुओं पर संदेह है, जबकि पुलिस का दावा है कि आरोपी ने गिरफ्तारी से बचने के लिए हमला किया था, जिसके बाद जवाबी कार्रवाई में वह मारा गया। इस घटनाक्रम ने एक बार फिर UP Encounter Policy को सार्वजनिक बहस का विषय बना दिया है।
READ: एनकाउंटर पर बड़ा बयान! संजय निषाद ने योगी सरकार से मांगा जवाब
योगी सरकार में हुए चर्चित एनकाउंटर
साल 2017 में सत्ता संभालने के बाद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अपराध और माफिया के खिलाफ सख्त कार्रवाई का संदेश दिया था। इसी दौरान कई हाई-प्रोफाइल एनकाउंटर भी चर्चा में रहे।
10 जुलाई 2020 को कानपुर के चर्चित गैंगस्टर विकास दुबे को पुलिस मुठभेड़ में मार गिराया गया था। इसके बाद 25 जुलाई 2020 को बाराबंकी में टिंकू कपाला, 18 अक्टूबर 2021 को लखनऊ में हमजा, 13 अप्रैल 2023 को झांसी में माफिया अतीक अहमद के बेटे असद अहमद और 4 मई 2023 को मेरठ में अनिल दुजाना का एनकाउंटर हुआ। इन सभी मामलों ने राष्ट्रीय स्तर पर सुर्खियां बटोरीं और UP Encounter Policy को लेकर समर्थन और विरोध दोनों देखने को मिले।
NCRB आंकड़ों में अपराध ग्राफ में गिरावट
योगी सरकार लगातार यह दावा करती रही है कि सख्त पुलिसिंग और अपराधियों के खिलाफ कार्रवाई का असर प्रदेश की कानून-व्यवस्था पर दिखाई दिया है। NCRB के उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार कई गंभीर अपराधों में कमी दर्ज की गई है।
साल 2017 में हत्या के 4,324 मामले दर्ज हुए थे, जो 2024 में घटकर 3,215 रह गए। अपहरण के मामलों की संख्या 19,921 से घटकर 11,773 पर पहुंच गई। फिरौती के मामले 46 से घटकर 26 रह गए।
इसी तरह बलात्कार के मामले 4,246 से घटकर 3,209 हुए हैं। चोरी के मामलों में भी गिरावट दर्ज की गई है, जहां संख्या 60,434 से घटकर 43,598 हो गई। डकैती के मामले 263 से घटकर केवल 57 तक पहुंच गए हैं। सरकार इन आंकड़ों को UP Encounter Policy और सख्त कानून-व्यवस्था रणनीति की सफलता के रूप में प्रस्तुत करती है।
मेरठ, आगरा और वाराणसी जोन में सबसे ज्यादा एनकाउंटर
मार्च 2017 से मई 2026 तक के पुलिस आंकड़ों के अनुसार मेरठ जोन एनकाउंटर की संख्या में सबसे आगे रहा है। इस दौरान मेरठ जोन में 4,813 एनकाउंटर हुए, जिनमें 97 अपराधियों की मौत हुई, 3,513 घायल हुए और 8,921 गिरफ्तार किए गए।
आगरा जोन में 2,494 एनकाउंटर दर्ज किए गए, जहां 24 अपराधियों की मौत हुई और 5,845 गिरफ्तारियां हुईं। वहीं वाराणसी जोन में 1,292 एनकाउंटर हुए, जिनमें 29 अपराधी मारे गए और 2,426 गिरफ्तार किए गए। ये आंकड़े बताते हैं कि UP Encounter Policy का सबसे अधिक प्रभाव पश्चिमी और पूर्वी उत्तर प्रदेश के कई संवेदनशील क्षेत्रों में दिखाई देता है।
जाति और धर्म के आधार पर एनकाउंटर को लेकर बहस
मीडिया रिपोर्टों के अनुसार 31 मार्च 2017 से 5 सितंबर 2024 के बीच कुल 207 अपराधी पुलिस मुठभेड़ों में मारे गए। इनमें 67 मुस्लिम, 20 ब्राह्मण, 18 ठाकुर, 16 यादव, 17 गुर्जर-जाट, 14 अनुसूचित जाति, 3 अनुसूचित जनजाति, 2 सिख, 8 अन्य पिछड़ा वर्ग और 42 अन्य वर्गों से जुड़े अपराधी शामिल थे।
इन आंकड़ों के आधार पर विपक्ष सरकार पर सवाल उठाता रहा है, जबकि सरकार का कहना है कि पुलिस कार्रवाई अपराध के आधार पर होती है, न कि किसी जाति या धर्म को ध्यान में रखकर। सरकार का तर्क है कि एनकाउंटर में मारे गए लोग अलग-अलग समुदायों से थे, इसलिए इसे सांप्रदायिक या जातिगत नजरिए से देखना उचित नहीं है।
Latest News Update Uttar Pradesh News, उत्तराखंड की ताज़ा ख़बर
योगी सरकार का दावा- अपराधियों में कानून का डर बढ़ा
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ कई बार सार्वजनिक मंचों से अपराधियों को चेतावनी दे चुके हैं कि प्रदेश में कानून हाथ में लेने वालों के लिए कोई जगह नहीं है। सरकार का कहना है कि बुलडोजर कार्रवाई, गैंगस्टर एक्ट, माफियाओं की संपत्तियों की जब्ती और पुलिस की सख्त कार्रवाई ने अपराधियों के मन में कानून का भय पैदा किया है।
सरकार के समर्थकों का मानना है कि UP Encounter Policy ने अपराध जगत पर दबाव बनाया है, जबकि आलोचकों का कहना है कि कानून के शासन में न्यायिक प्रक्रिया को सर्वोच्च प्राथमिकता मिलनी चाहिए।
आगे भी जारी रहेगी बहस
गाजीपुर एनकाउंटर के बाद एक बार फिर यह स्पष्ट हो गया है कि UP Encounter Policy आने वाले समय में भी राजनीतिक और सामाजिक बहस का बड़ा मुद्दा बनी रहेगी। एक तरफ सरकार इसे अपराध नियंत्रण का प्रभावी मॉडल बता रही है, तो दूसरी तरफ विपक्ष और मानवाधिकार संगठन इसकी निष्पक्षता और वैधानिकता पर सवाल उठा रहे हैं। ऐसे में आने वाले दिनों में यह मुद्दा उत्तर प्रदेश की राजनीति और कानून-व्यवस्था की चर्चा के केंद्र में बना रह सकता है।
पढ़े ताजा अपडेट : Hindi News, Today Hindi News, Breaking




