‘सम्मानजनक रास्ता’ तलाश रहा अमेरिका
द टाइम्स ऑफ इजराइल की एक रिपोर्ट के अनुसार, ईरान के रक्षा मंत्रालय ने इस शांति वार्ता को अमेरिका की मजबूरी करार दिया है। ईरानी प्रवक्ता ने कहा कि अमेरिका उस रणनीतिक दलदल में फंसा हुआ है जिससे बाहर निकलने के लिए उसे इस वार्ता की जरूरत है। ईरान का यह रुख दर्शाता है कि वह खुद को अपर हैंड (मजबूत स्थिति) में मान रहा है। ‘अमेरिका युद्ध के उस दलदल से निकलने का एक सम्मानजनक रास्ता तलाश रहा है जिसमें वह फंस गया है।’ यह बयान कूटनीतिक गलियारों में हलचल मचा रहा है, क्योंकि विटकॉफ और कुशनर की मौजूदगी को शांति की एक बड़ी कोशिश के रूप में देखा जा रहा था। (US-Iran Peace Talks in Islamabad)होर्मुज जलडमरूमध्य से हटेंगी बारूदी सुरंगें
शांति वार्ता की इन कोशिशों के बीच तुर्किए ने एक बेहद महत्वपूर्ण तकनीकी प्रस्ताव पेश किया है। तुर्किए के विदेश मंत्री हाकान फिदान ने संकेत दिया है कि यदि अमेरिका और ईरान के बीच कोई समझौता होता है, तो उनका देश होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) में बिछी बारूदी सुरंगों को हटाने के ऑपरेशन में सक्रिय भूमिका निभाएगा। फिदान के अनुसार, किसी भी सफल समझौते के बाद व्यापारिक मार्गों को सुरक्षित करना पहली प्राथमिकता होगी। उन्होंने कहा कि तुर्किए इसे एक ‘मानवीय कर्तव्य’ मानता है और उनकी तकनीकी टीम इस कठिन ऑपरेशन के लिए तैयार हो सकती है। होर्मुज से बारूदी सुरंगों का हटना वैश्विक तेल आपूर्ति और समुद्री व्यापार के लिए संजीवनी साबित हो सकता है। (US-Iran Peace Talks in Islamabad) Latest News Update Uttar Pradesh News, उत्तराखंड की ताज़ा ख़बरइस्लामाबाद में ‘जंगी’ सुरक्षा

सीधी बातचीत पर संशय बरकरार
भले ही व्हाइट हाउस के दूत इस्लामाबाद की धरती पर कदम रख रहे हों, लेकिन ईरानी सरकारी मीडिया लगातार यह संदेश दे रहा है कि अमेरिका के साथ ‘सीधी मेज’ साझा नहीं की जाएगी। ईरान का कहना है कि वह केवल मध्यस्थों के माध्यम से या अपनी शर्तों पर ही संवाद आगे बढ़ाएगा। ऐसे में सवाल उठता है कि क्या बिना सीधी बातचीत के कोई ठोस नतीजा निकल पाएगा? या फिर यह वार्ता केवल एक और कूटनीतिक कवायद बनकर रह जाएगी? (US-Iran Peace Talks in Islamabad)
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