Pakistan Global Image: कभी खुद को क्षेत्रीय ताकत बताने वाला पाकिस्तान आज बहुआयामी संकट से जूझता दिखाई दे रहा है। सरहद पर रणनीतिक अस्थिरता, वैश्विक मंचों पर घटती साख और आर्थिक बदहाली ने इस देश को ऐसे मोड़ पर ला खड़ा किया है, जहां उसकी नीतियों और नेतृत्व पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं। हालिया घटनाओं ने यह संकेत दिया है कि सत्ता के वास्तविक केंद्र और राजनीतिक नेतृत्व के बीच दूरी ने स्थिति को और जटिल बना दिया है।
एक ओर प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ आर्थिक संकट से निपटने के लिए दुनिया भर से मदद की अपील कर रहे हैं, वहीं सेना प्रमुख असीम मुनीर की वैश्विक मंचों पर हुई असहज स्थितियों ने पाकिस्तान की संस्थागत छवि को झटका पहुंचाया है। इन सबके बीच सवाल उठने लगा है क्या पाकिस्तान वाकई अपने सबसे कठिन दौर से गुजर रहा है?
आर्थिक मोर्चे पर गहराता संकट
पाकिस्तान की आर्थिक स्थिति लगातार बिगड़ती जा रही है। विदेशी कर्ज का बोझ बढ़कर लगभग 26 अरब डॉलर तक पहुंच गया है, जबकि सरकारी कंपनियों का घाटा कई गुना बढ़ चुका है। देश को अपनी मूलभूत जरूरतों के लिए भी अंतरराष्ट्रीय मदद पर निर्भर रहना पड़ रहा है। स्थिति इतनी गंभीर हो चुकी है कि पाकिस्तान को बार-बार सऊदी अरब, यूएई और चीन जैसे देशों की ओर देखना पड़ रहा है। बढ़ती निर्भरता ने उसकी आर्थिक संप्रभुता पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। (Pakistan Global Image)
लोकतंत्र बनाम सत्ता का असली केंद्र
विश्लेषकों का मानना है कि पाकिस्तान की मौजूदा समस्याओं की जड़ उसकी राजनीतिक संरचना में छिपी है। वहां लोकतांत्रिक व्यवस्था अक्सर सैन्य प्रभाव के अधीन मानी जाती रही है। हालिया वैश्विक घटनाओं में यह धारणा और मजबूत हुई, जब म्यूनिख सुरक्षा सम्मेलन में सेना प्रमुख से पहचान पत्र दिखाने को कहा गया। इस घटना ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पाकिस्तान की संस्थागत छवि को प्रभावित किया। (Pakistan Global Image)
अमेरिका से चीन तक रणनीतिक मोड़
शीत युद्ध के दौरान पाकिस्तान को अमेरिका का समर्थन मिला, जिसका उपयोग उसने क्षेत्रीय रणनीतिक संतुलन में किया। लेकिन अफगानिस्तान से अमेरिकी वापसी के बाद स्थिति बदल गई और चीन पाकिस्तान का प्रमुख सहयोगी बनकर उभरा। चीन की आर्थिक और सामरिक निवेश नीति ने पाकिस्तान को अपने प्रभाव क्षेत्र में ला दिया। चीन-पाकिस्तान आर्थिक सहयोग परियोजनाओं ने एक ओर बुनियादी ढांचे को बढ़ावा दिया, तो दूसरी ओर ऋण निर्भरता भी बढ़ाई। (Pakistan Global Image)
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कश्मीर और भू-राजनीतिक समीकरण
इतिहास में पाकिस्तान और चीन के बीच रणनीतिक समझौतों ने क्षेत्रीय समीकरणों को प्रभावित किया। विवादित क्षेत्रों को लेकर हुए समझौतों ने भारत की चिंताओं को बढ़ाया। भारत ने लगातार इस पर आपत्ति जताई है और इसे क्षेत्रीय स्थिरता के लिए चुनौती बताया है। (Pakistan Global Image)

सैन्य संतुलन बनाम आर्थिक कमजोरी
पाकिस्तान ने रक्षा क्षेत्र में प्रतिस्पर्धा बनाए रखने की कोशिश की, लेकिन आर्थिक कमजोरी ने उसे सीमित कर दिया। हथियारों की होड़ ने उसकी वित्तीय स्थिति पर अतिरिक्त दबाव डाला। दक्षिण एशिया में सामरिक संतुलन बनाए रखने की कोशिश में पाकिस्तान ने भारी निवेश किया, लेकिन इसका असर उसकी घरेलू अर्थव्यवस्था पर पड़ा। (Pakistan Global Image)
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वैश्विक मंच पर घटती साख
हालिया घटनाओं से यह संकेत मिला है कि पाकिस्तान की वैश्विक प्रतिष्ठा को झटका लगा है। चाहे आर्थिक निर्भरता हो या नेतृत्व से जुड़े विवाद, इन सबने उसकी अंतरराष्ट्रीय छवि को कमजोर किया है।खेल के मैदान से लेकर कूटनीतिक मंच तक, पाकिस्तान के प्रदर्शन ने यह सवाल खड़ा कर दिया है कि क्या वह अपने सबसे कठिन दौर में प्रवेश कर चुका है।
क्या यह सबसे कठिन दौर है?
वर्तमान परिस्थितियां बताती हैं कि पाकिस्तान बहुआयामी संकट से जूझ रहा है आर्थिक, राजनीतिक और रणनीतिक। इन चुनौतियों से उबरने के लिए उसे न केवल नीतिगत सुधारों की आवश्यकता है, बल्कि संस्थागत संतुलन और दीर्घकालिक दृष्टि भी जरूरी होगी।



