Gas Cylinder Rate 2026: मध्य-पूर्व में ईरान और इजरायल के बीच बढ़ते सैन्य तनाव ने वैश्विक ऊर्जा बाजार में खलबली मचा दी है। इस युद्ध जैसी स्थिति का सीधा असर अब भारतीय आम आदमी की रसोई तक पहुंच गया है। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कच्चे तेल और प्राकृतिक गैस की सप्लाई चेन बाधित होने के कारण भारत में एलपीजी (LPG) सिलेंडर की कीमतों में भारी उछाल दर्ज किया गया है। तेल कंपनियों ने हाल ही में घरेलू और कमर्शियल दोनों श्रेणियों में दाम बढ़ाकर उपभोक्ताओं की चिंता बढ़ा दी है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह संघर्ष लंबा खिंचता है, तो आने वाले दिनों में गैस की कीमतों में और भी कड़वा इजाफा देखने को मिल सकता है। भारत अपनी जरूरत का एक बड़ा हिस्सा आयात करता है, ऐसे में होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) जैसे महत्वपूर्ण व्यापारिक मार्ग पर किसी भी तरह की बाधा भारतीय बाजार के लिए बड़ा संकट पैदा कर सकती है। आइए विस्तार से समझते हैं कि मौजूदा स्थिति क्या है और सरकार इस चुनौती से निपटने के लिए क्या कदम उठा रही है।
कहां से तय होती है रसोई की किस्मत
भारत में रसोई गैस की कीमतों में बढ़ोतरी के पीछे सबसे बड़ा भौगोलिक कारण होर्मुज जलडमरूमध्य में पैदा हुआ तनाव है। यह इलाका वैश्विक तेल और गैस आपूर्ति की जीवनरेखा माना जाता है। चूंकि भारत अपनी एलपीजी जरूरतों का लगभग 60 प्रतिशत आयात करता है, और इसमें से 80-90 प्रतिशत हिस्सा सऊदी अरब, कतर और यूएई जैसे देशों से आता है, इसलिए खाड़ी देशों में कोई भी अस्थिरता सीधे तौर पर कीमतों में आग लगा देती है। (Gas Cylinder Rate 2026)
7 मार्च से लागू हुईं नई दरें
तेल कंपनियों ने 7 मार्च 2026 को गैस के दामों में जो बदलाव किए हैं, उसने मध्यम वर्ग का बजट बिगाड़ दिया है। ताज़ा आंकड़ों के अनुसार:
घरेलू सिलेंडर (14.2 किलो): इसकी कीमत में लगभग 60 रुपये की वृद्धि की गई है, जिससे दिल्ली में अब एक सिलेंडर 913 रुपये का मिल रहा है।
कमर्शियल सिलेंडर (19 किलो): व्यापारिक इस्तेमाल वाले सिलेंडर के दाम ₹114-115 बढ़कर 1,883 रुपये तक पहुंच गए हैं।
मुंबई और बेंगलुरु जैसे महानगरों में सप्लाई में आंशिक कमी की खबरें भी सामने आई हैं, जिससे होटल और रेस्टोरेंट कारोबार प्रभावित हो रहा है। (Gas Cylinder Rate 2026)
सरकार का एक्शन प्लान और ’25 दिन का नियम’
बढ़ती कीमतों और संभावित किल्लत को देखते हुए केंद्र सरकार और पेट्रोलियम मंत्रालय ने मोर्चा संभाल लिया है। सरकार ने निम्नलिखित कड़े निर्देश जारी किए हैं:
उत्पादन में वृद्धि: तेल रिफाइनरियों को एलपीजी का घरेलू उत्पादन बढ़ाने का आदेश दिया गया है।
कालाबाजारी पर लगाम: गैस की जमाखोरी रोकने के लिए दो सिलेंडर बुकिंग के बीच 25 दिन का अनिवार्य अंतर तय कर दिया गया है।
प्राथमिकता सूची: घरेलू उपभोक्ताओं के अलावा अस्पताल और शैक्षणिक संस्थानों को सप्लाई में प्राथमिकता दी जा रही है। (Gas Cylinder Rate 2026)
पेट्रोलियम मंत्री का आश्वासन
संकट के बीच पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने जनता को आश्वस्त किया है कि देश में गैस का पर्याप्त भंडार है। उन्होंने कहा, ‘घरेलू उपभोक्ताओं के लिए गैस की कोई कमी नहीं है। सरकार अंतरराष्ट्रीय स्थिति पर पैनी नजर रखे हुए है और सप्लाई चेन को सुचारू बनाने के लिए हर संभव कदम उठाए जा रहे हैं। नागरिकों से अपील है कि वे पैनिक बुकिंग या अतिरिक्त सिलेंडर जमा न करें।’ (Gas Cylinder Rate 2026)
क्या और महंगे होंगे दाम?
यदि ईरान और अमेरिका/इजरायल के बीच तनाव कम नहीं होता है, तो कच्चे तेल की कीमतें $100 प्रति बैरल के पार जा सकती हैं। ऐसी स्थिति में सब्सिडी का बोझ बढ़ेगा या फिर उपभोक्ताओं को ₹1000 से अधिक की कीमत चुकानी पड़ सकती है। फिलहाल, सरकार कूटनीतिक रास्तों और रणनीतिक भंडार के जरिए कीमतों को स्थिर रखने की कोशिश कर रही है। (Gas Cylinder Rate 2026)



