Himachal Budget Session: हिमाचल प्रदेश विधानसभा के बजट सत्र के दूसरे दिन सदन में राजनीतिक तापमान काफी बढ़ा हुआ नजर आया। प्रश्नकाल के बाद जैसे ही नियम-102 के तहत राजस्व घाटा अनुदान (RDG) बहाली का मुद्दा उठा, सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी बहस शुरू हो गई। दोनों पक्षों ने एक-दूसरे पर वित्तीय कुप्रबंधन और राज्यहित की अनदेखी के आरोप लगाए।
सरकार का कहना है कि RDG राज्य की अर्थव्यवस्था के लिए बेहद अहम है और इसकी बहाली जरूरी है। वहीं विपक्ष ने मौजूदा सरकार की वित्तीय रणनीतियों पर सवाल खड़े किए और राज्य की आर्थिक स्थिति को लेकर चिंता जताई।
डिप्टी सीएम का विपक्ष पर हमला
Himachal Budget Session चर्चा के दौरान उपमुख्यमंत्री ने विपक्ष को घेरते हुए कहा कि पिछली सरकार के कार्यकाल में केंद्र से बड़ी वित्तीय सहायता प्राप्त हुई थी। इसके बावजूद कर्मचारियों के लंबित एरियर का भुगतान नहीं किया गया। उन्होंने आरोप लगाया कि अब RDG बंद होने पर विपक्ष सिर्फ राजनीतिक बयानबाजी कर रहा है, जबकि वास्तविकता यह है कि वित्तीय अनुशासन की कमी पहले से चली आ रही है।
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सरकार का तर्क है कि RDG बंद होने से राज्य की वित्तीय स्थिति पर दबाव बढ़ा है, क्योंकि हिमाचल जैसे पहाड़ी राज्य की आय सीमित है और व्यय अपेक्षाकृत अधिक। ऐसे में केंद्र से मिलने वाली सहायता का महत्व और भी बढ़ जाता है।
विधायक निधि पर उठे सवाल
नेता प्रतिपक्ष ने विधायक क्षेत्र विकास निधि जारी न होने का मुद्दा प्रमुखता से उठाया। उन्होंने कहा कि विधायकों द्वारा अपने क्षेत्रों में किए गए विकास कार्यों की घोषणाएं अटकी हुई हैं, जिससे जनता में असंतोष पनप रहा है।
मुख्यमंत्री ने जवाब देते हुए कहा कि सरकार इस विषय पर गंभीर है और वित्तीय स्थिति की समीक्षा के बाद निर्णय लिया जाएगा। उन्होंने संकेत दिया कि सभी विधायकों के साथ बैठक कर पारदर्शी तरीके से पूरी स्थिति साझा की जाएगी, ताकि किसी तरह की भ्रांति न रहे।
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बागवानों की सब्सिडी पर स्थिति स्पष्ट
Himachal Budget Session के दौरान बागवानी से जुड़े मुद्दे भी उठे। बागवानों की लंबित सब्सिडी को लेकर सवाल पूछे गए, जिस पर संबंधित मंत्री ने स्पष्ट किया कि भुगतान मौजूदा बजट प्रावधानों पर निर्भर करेगा। उन्होंने कहा कि सरकार किसानों और बागवानों के हितों को प्राथमिकता देती है, लेकिन वित्तीय संतुलन बनाए रखना भी आवश्यक है।
प्रदेश की अर्थव्यवस्था में बागवानी का महत्वपूर्ण योगदान है। ऐसे में सब्सिडी भुगतान में देरी को लेकर सरकार पर दबाव बढ़ रहा है। हालांकि सरकार ने आश्वासन दिया कि स्थिति सामान्य होते ही भुगतान प्रक्रिया को तेज किया जाएगा।
दिव्यांगजनों के आरक्षित पदों पर चर्चा
Himachal Budget Session दूसरे दिन की कार्यवाही में दिव्यांगजनों के लिए आरक्षित पदों का मुद्दा भी चर्चा में रहा। विपक्ष ने पूछा कि विभिन्न विभागों में कितने पद खाली पड़े हैं और उन्हें कब तक भरा जाएगा। साथ ही, धरने पर बैठे दिव्यांगजनों की मांगों को लेकर सरकार से जवाब मांगा गया।
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सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता विभाग की ओर से बताया गया कि रिक्त पदों को चरणबद्ध तरीके से भरने की प्रक्रिया चल रही है। सरकार ने भरोसा दिलाया कि दिव्यांगजनों के अधिकारों की रक्षा के लिए आवश्यक कदम उठाए जाएंगे।
RDG पर प्रस्ताव और संभावित मतदान
RDG बहाली को लेकर लाए गए सरकारी प्रस्ताव पर लंबी बहस के बाद इसे मतदान के लिए रखने की तैयारी की गई। यदि प्रस्ताव पारित होता है, तो केंद्र सरकार से RDG बहाल करने की औपचारिक सिफारिश की जाएगी।
सत्ता पक्ष का मानना है कि RDG की बहाली से राज्य को वित्तीय राहत मिलेगी और विकास योजनाओं को गति मिलेगी। वहीं विपक्ष का कहना है कि राज्य सरकार को अपने खर्चों में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करनी चाहिए।
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राजनीतिक संदेश और आगे की राह
Himachal Budget Session का यह दिन स्पष्ट संकेत देता है कि हिमाचल की राजनीति फिलहाल आर्थिक मुद्दों के इर्द-गिर्द घूम रही है। RDG, विधायक निधि, बागवानों की सब्सिडी और दिव्यांगजनों के पद जैसे विषय सिर्फ प्रशासनिक मुद्दे नहीं, बल्कि राजनीतिक विमर्श के केंद्र बन चुके हैं।
आने वाले दिनों में Himachal Budget Session में और भी अहम चर्चाएं होने की संभावना है। फिलहाल, दूसरे दिन की कार्यवाही ने यह साफ कर दिया है कि राज्य की वित्तीय स्थिति और केंद्र-राज्य संबंध आगामी राजनीतिक बहसों का मुख्य आधार रहेंगे।
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