Peddi Film Controversy: राम चरण और जाह्नवी कपूर की आगामी फिल्म ‘पेद्दी’ को लेकर उठे विवाद ने एक बार फिर फिल्मों में महिलाओं की प्रस्तुति को लेकर बहस छेड़ दी है। सोशल मीडिया पर फिल्म के कुछ दृश्यों को लेकर आलोचना होने के बाद अब ‘आशिकी’ फेम पूर्व अभिनेत्री अनु अग्रवाल ने भी इस मुद्दे पर खुलकर अपनी राय रखी है। उन्होंने कहा कि कलाकारों, फिल्मकारों और दर्शकों सभी की जिम्मेदारी है कि महिलाओं को केवल आकर्षण का केंद्र बनाकर पेश करने वाली कहानियों का विरोध किया जाए।
अनु अग्रवाल ने सोशल मीडिया पर एक लंबा पोस्ट साझा करते हुए कहा कि ‘पेद्दी’ को लेकर चल रही चर्चा उन्हें अपने करियर के शुरुआती दिनों की याद दिलाती है। उन्होंने कहा कि यह देखकर खुशी होती है कि आज का दर्शक महिलाओं के सम्मानजनक और सशक्त चित्रण की मांग कर रहा है। उनके अनुसार, सिनेमा समाज का आईना है और इसमें महिलाओं की छवि को गंभीरता से लिया जाना चाहिए।
Peddi Film Controversy ने खड़ा किया बड़ा सवाल
जाह्नवी कपूर फिल्म ‘पेद्दी’ में ‘अचियम्मा’ का किरदार निभा रही हैं। फिल्म के कुछ दृश्यों और किरदार की प्रस्तुति को लेकर सोशल मीडिया पर आलोचना शुरू हुई थी। बढ़ते विवाद के बाद निर्देशक बुची बाबू सना ने दर्शकों से माफी मांगते हुए विवादित हिस्सों में बदलाव करने की बात कही। हालांकि, इस विवाद ने केवल फिल्म तक सीमित रहने के बजाय मनोरंजन उद्योग में महिलाओं की भूमिका और प्रस्तुति को लेकर व्यापक चर्चा छेड़ दी है।
अनु अग्रवाल ने सुनाया ‘आशिकी’ के बाद का अनुभव
अनु अग्रवाल ने अपने पोस्ट में बताया कि सुपरहिट फिल्म ‘आशिकी’ की सफलता के बाद उन्होंने एक महत्वपूर्ण निर्णय लिया था। उन्होंने तय किया कि किसी भी फिल्म को साइन करने से पहले वह पूरी कहानी और अपने किरदार को विस्तार से समझेंगी। उनके मुताबिक (Peddi Film Controversy) उस दौर में फिल्मों में महिलाओं को अक्सर ग्लैमर का साधन बनाकर प्रस्तुत किया जाता था। लेकिन उन्होंने इस सोच के खिलाफ खड़े होने का फैसला किया और ऐसे प्रोजेक्ट्स को स्वीकार करने से इनकार कर दिया जो उनके सिद्धांतों से मेल नहीं खाते थे।
कई बड़े ऑफर भी किए थे ठुकराए
पूर्व अभिनेत्री ने स्वीकार किया कि अपने सिद्धांतों की वजह से उन्होंने कई आकर्षक और बड़े फिल्मी प्रस्तावों को अस्वीकार कर दिया था। उन्होंने कहा कि करियर के लिहाज से यह आसान फैसला नहीं था, लेकिन उन्हें कभी अपने निर्णय (Peddi Film Controversy) पर पछतावा नहीं हुआ। अनु का मानना है कि कलाकारों को सिर्फ लोकप्रियता या आर्थिक लाभ के आधार पर निर्णय नहीं लेना चाहिए, बल्कि यह भी देखना चाहिए कि उनका किरदार समाज में किस तरह का संदेश दे रहा है।
नए कलाकारों को दी खास सलाह
अनु अग्रवाल ने नई पीढ़ी के कलाकारों से भी अपील की कि वे केवल बड़े बैनर, स्टारकास्ट या व्यावसायिक संभावनाओं को देखकर फिल्में न चुनें। उन्होंने कहा कि कलाकारों को (Peddi Film Controversy) स्क्रिप्ट को ध्यान से पढ़ना चाहिए और यदि किसी किरदार या दृश्य में महिलाओं की गरिमा से समझौता होता दिखाई दे, तो उसे स्वीकार करने के बजाय सवाल पूछने चाहिए। उनके अनुसार, बदलाव तभी संभव है जब कलाकार स्वयं जिम्मेदारी निभाएं और बेहतर कंटेंट को प्राथमिकता दें।
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निर्देशक ने मांगी थी माफी
‘पेद्दी’ को लेकर बढ़े विवाद के बाद निर्देशक बुची बाबू सना ने स्पष्ट किया था कि उनका उद्देश्य किसी महिला किरदार को गलत तरीके से प्रस्तुत करना नहीं था। उन्होंने दर्शकों की भावनाओं का सम्मान करते हुए कहा कि फिल्म (Peddi Film Controversy) के कुछ हिस्सों में आवश्यक बदलाव किए जाएंगे। इस घटनाक्रम के बाद सोशल मीडिया पर फिल्मों में महिलाओं की प्रस्तुति को लेकर बहस और तेज हो गई है।
Peddi Film Controversy
Peddi Film Controversy ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि फिल्मों में महिलाओं को किस नजरिए से दिखाया जाता है। अनु अग्रवाल की प्रतिक्रिया केवल एक फिल्म तक सीमित नहीं है, बल्कि यह पूरे मनोरंजन उद्योग के लिए एक महत्वपूर्ण संदेश है। उनका मानना है कि कलाकार, निर्माता और दर्शक यदि मिलकर जिम्मेदारी निभाएं, तो सिनेमा में महिलाओं की छवि और अधिक सम्मानजनक और सशक्त बन सकती है।
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