Strait of Hormuz Deal को लेकर सामने आई सकारात्मक खबर ने भारत समेत दुनिया के कई ऊर्जा आयातक देशों को बड़ी राहत दी है। अमेरिका और ईरान के बीच अहम समुद्री मार्ग को दोबारा खोलने पर बनी सहमति के बाद पिछले तीन महीनों से फारस की खाड़ी में फंसा भारतीय एलएनजी टैंकर ‘दिशा’ अब अपने गंतव्य की ओर बढ़ने लगा है। इस घटनाक्रम का असर वैश्विक ऊर्जा बाजार पर भी दिखाई दिया है, जहां कच्चे तेल और प्राकृतिक गैस की कीमतों में उल्लेखनीय गिरावट दर्ज की गई है।
ऊर्जा विशेषज्ञों का मानना है कि Strait of Hormuz Deal केवल एक क्षेत्रीय समझौता नहीं है, बल्कि इसका सीधा प्रभाव वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति, अंतरराष्ट्रीय व्यापार और भारत जैसे बड़े आयातक देशों की अर्थव्यवस्था पर पड़ने वाला है।
क्यों महत्वपूर्ण है Strait of Hormuz Deal?
हॉर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री व्यापारिक मार्गों में से एक माना जाता है। वैश्विक स्तर पर तेल और गैस की बड़ी मात्रा इसी मार्ग से होकर गुजरती है। फारस की खाड़ी को अरब सागर से जोड़ने वाला यह जलमार्ग ऊर्जा आपूर्ति की दृष्टि से दुनिया की जीवनरेखा माना जाता है।
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पिछले कुछ महीनों में क्षेत्र में बढ़े भू-राजनीतिक तनाव के कारण जहाजों की आवाजाही प्रभावित हुई थी। कई ऊर्जा टैंकरों को समुद्र में ही रुकना पड़ा, जिससे तेल और गैस की वैश्विक आपूर्ति पर दबाव बढ़ गया था। अब Strait of Hormuz Deal के बाद स्थिति सामान्य होने की उम्मीद जगी है।
भारतीय LNG टैंकर ‘दिशा’ के आगे बढ़ने से बढ़ी उम्मीद
भारत के लिए इस पूरे घटनाक्रम में सबसे महत्वपूर्ण खबर भारतीय LNG टैंकर ‘दिशा’ की गतिविधि है। यह जहाज पिछले तीन महीनों से क्षेत्रीय तनाव के कारण खाड़ी में फंसा हुआ था।
बताया जा रहा है कि जहाज ने मार्च की शुरुआत में कतर के प्रमुख गैस निर्यात केंद्र रास लाफान से एलएनजी का बड़ा कंसाइनमेंट लोड किया था। लेकिन सुरक्षा कारणों और समुद्री मार्ग में अनिश्चितता के चलते उसे आगे बढ़ने की अनुमति नहीं मिल सकी।
अब Strait of Hormuz Deal के बाद जहाज ने दोबारा अपनी यात्रा शुरू कर दी है और ओमान की दिशा में आगे बढ़ रहा है। इससे भारत की ऊर्जा आपूर्ति को लेकर बनी चिंताओं में काफी कमी आई है।
भारत के लिए क्यों अहम है यह समझौता?
भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों का बड़ा हिस्सा आयात के जरिए पूरा करता है। देश की एलएनजी और कच्चे तेल की आपूर्ति का महत्वपूर्ण भाग पश्चिम एशिया से आता है। ऐसे में जब हॉर्मुज जलडमरूमध्य में तनाव बढ़ा था, तब भारत सहित कई देशों को ऊर्जा आपूर्ति बाधित होने का खतरा पैदा हो गया था।
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Strait of Hormuz Deal से अब न केवल आपूर्ति श्रृंखला के सामान्य होने की उम्मीद बढ़ी है बल्कि ऊर्जा आयात की लागत में भी राहत मिल सकती है। विशेषज्ञों का कहना है कि यदि समुद्री मार्ग पूरी तरह सामान्य हो जाता है तो भारत को गैस और तेल आयात पर होने वाले अतिरिक्त खर्च से भी राहत मिलेगी।
वैश्विक बाजार में आई बड़ी गिरावट
Strait of Hormuz Deal का सबसे तेज असर अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा बाजार में देखने को मिला। जैसे ही समझौते और समुद्री मार्ग खुलने की खबरें सामने आईं, बाजार ने सकारात्मक प्रतिक्रिया दी। यूरोप और एशिया में प्राकृतिक गैस की कीमतों में तेजी से गिरावट दर्ज की गई। शुरुआती कारोबार में यूरोपीय गैस कीमतें लगभग 5.8 प्रतिशत तक नीचे आ गईं।
वहीं अंतरराष्ट्रीय बाजार में ब्रेंट क्रूड ऑयल की कीमतों में भी 4 प्रतिशत से अधिक की गिरावट देखने को मिली। निवेशकों को उम्मीद है कि आपूर्ति सामान्य होने से ऊर्जा संकट का खतरा काफी हद तक कम हो जाएगा।
सप्लाई चेन पर क्या पड़ेगा असर?
पिछले कुछ महीनों से समुद्री मार्ग में अनिश्चितता के कारण वैश्विक सप्लाई चेन प्रभावित थी। तेल और गैस कंपनियों को लंबी दूरी के वैकल्पिक मार्ग अपनाने पड़ रहे थे, जिससे परिवहन लागत बढ़ गई थी।
अब Strait of Hormuz Deal के बाद जहाजों की आवाजाही में तेजी आने की संभावना है। ओमान की खाड़ी, यूएई के तट और फारस की खाड़ी में रुके कई जहाज दोबारा अपने निर्धारित मार्गों पर लौटने की तैयारी कर रहे हैं। इससे न केवल ऊर्जा क्षेत्र बल्कि वैश्विक व्यापारिक गतिविधियों को भी गति मिलने की उम्मीद है।
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क्या भारत में ईंधन कीमतों पर पड़ेगा असर?
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल और गैस की कीमतों में गिरावट का सिलसिला जारी रहता है तो इसका सकारात्मक प्रभाव भारत पर भी पड़ सकता है।
हालांकि घरेलू ईंधन कीमतों पर असर कई अन्य कारकों पर भी निर्भर करता है, लेकिन Strait of Hormuz Deal के बाद आयात लागत कम होने से सरकार और तेल कंपनियों को राहत मिल सकती है। ऊर्जा क्षेत्र के जानकारों का कहना है कि यदि क्षेत्र में स्थिरता बनी रहती है तो आने वाले समय में भारत के लिए ऊर्जा सुरक्षा और मजबूत हो सकती है।
वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए सकारात्मक संकेत
अमेरिका और ईरान के बीच बनी सहमति को वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए सकारात्मक संकेत माना जा रहा है। लंबे समय से जारी तनाव के कारण ऊर्जा बाजार में अस्थिरता बनी हुई थी।
अब Strait of Hormuz Deal के बाद व्यापारिक गतिविधियों के सामान्य होने, ऊर्जा आपूर्ति बढ़ने और कीमतों में स्थिरता आने की उम्मीद है। भारत जैसे बड़े ऊर्जा उपभोक्ता देशों के लिए यह समझौता आर्थिक दृष्टि से भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि आने वाले दिनों में समझौते पर औपचारिक मुहर लग जाती है तो वैश्विक ऊर्जा बाजार में और अधिक स्थिरता देखने को मिल सकती है, जिसका लाभ सीधे तौर पर भारत सहित दुनिया के कई देशों को मिलेगा।
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