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Gold price crash during war: जंग के बीच क्यों टूटा सोना? 29 हजार तक गिरने से हिला बाजार, सेफ हैवन की धारणा पर उठे सवाल

Lokhit Kranti
Last updated: 2026-03-24 7:31 पूर्वाह्न
By Lokhit Kranti 5 महीना ago
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Gold price crash during war
Gold price crash during war: जंग के बीच क्यों टूटा सोना? 29 हजार तक गिरने से हिला बाजार, सेफ हैवन की धारणा पर उठे सवाल
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Gold price crash during war: वैश्विक स्तर पर जब भी युद्ध या भू-राजनीतिक तनाव बढ़ता है, निवेशक आमतौर पर सोने की ओर रुख करते हैं। दशकों से सोना आर्थिक अनिश्चितता के दौर में सबसे सुरक्षित निवेश यानी ‘सेफ हैवन’ माना जाता रहा है। लेकिन इस बार हालात बिल्कुल अलग दिखाई दे रहे हैं। पश्चिम एशिया में जारी तनाव के बीच सोने की कीमतों में भारी गिरावट दर्ज की गई है, जिसने निवेशकों और बाजार विशेषज्ञों दोनों को चौंका दिया है।

Contents
युद्ध के बावजूद क्यों नहीं बढ़ा सोना?मजबूत डॉलर ने तोड़ी सोने की चमकब्याज दरों और बॉन्ड यील्ड का असर2025 की तेज़ी के बाद आई मुनाफावसूलीसंकट के दौर में नकदी बनी सबसे अहमतेल की बढ़ती कीमतें और महंगाई का डरनिवेशकों के लिए क्या संकेत?बदल रही है ‘सेफ हैवन’ की परिभाषा

हाल के आंकड़ों के अनुसार Gold price crash during war ने बाजार की पारंपरिक धारणाओं को चुनौती दी है। पिछले कुछ हफ्तों में सोने की कीमतें करीब 18 प्रतिशत तक गिर चुकी हैं और प्रति 10 ग्राम में लगभग 29,000 रुपये की कमी आई है।

युद्ध के बावजूद क्यों नहीं बढ़ा सोना?

आमतौर पर जब अंतरराष्ट्रीय स्तर पर संघर्ष बढ़ता है, तो निवेशक शेयर बाजार जैसी जोखिम वाली परिसंपत्तियों से पैसा निकालकर सोने में लगाते हैं। लेकिन इस बार Gold price crash during war का सबसे बड़ा कारण वैश्विक आर्थिक परिस्थितियों का बदलता संतुलन है।

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विशेषज्ञों का मानना है कि इस बार निवेशकों ने सोने के बजाय अमेरिकी डॉलर और नकदी को ज्यादा सुरक्षित विकल्प माना है। यही वजह है कि युद्ध के बावजूद सोने की मांग बढ़ने के बजाय घटती नजर आई।

मजबूत डॉलर ने तोड़ी सोने की चमक

सोने की कीमतों पर सबसे बड़ा दबाव अमेरिकी डॉलर की मजबूती से पड़ा है। डॉलर इंडेक्स में तेज उछाल ने सोने को अंतरराष्ट्रीय बाजार में महंगा बना दिया है। चूंकि सोने का कारोबार डॉलर में होता है, इसलिए डॉलर के मजबूत होने पर अन्य देशों के निवेशकों के लिए सोना खरीदना महंगा पड़ता है।

इसी वजह से Gold price crash during war के दौरान कई निवेशकों ने सोना खरीदने के बजाय डॉलर में निवेश करना ज्यादा सुरक्षित समझा।

ब्याज दरों और बॉन्ड यील्ड का असर

सोने की कीमतों पर असर डालने वाला दूसरा बड़ा कारण अमेरिकी फेडरल रिजर्व की सख्त मौद्रिक नीति है। जब ब्याज दरें ऊंची रहती हैं और सरकारी बॉन्ड पर अच्छा रिटर्न मिलता है, तो निवेशक सोने से दूरी बनाने लगते हैं क्योंकि सोना ब्याज या निश्चित आय नहीं देता।

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इस परिस्थिति ने भी Gold price crash during war को तेज करने में अहम भूमिका निभाई है। निवेशकों ने सोने के बजाय बॉन्ड और अन्य सुरक्षित निवेश विकल्पों को प्राथमिकता दी।

2025 की तेज़ी के बाद आई मुनाफावसूली

सोने की हालिया गिरावट को समझने के लिए पिछले साल की तेजी को भी ध्यान में रखना जरूरी है। वर्ष 2025 में सोने की कीमतों में असाधारण उछाल देखा गया था। कई निवेशकों ने उस समय ऊंचे स्तर पर सोना खरीदा और जब युद्ध के दौरान बाजार में अनिश्चितता बढ़ी, तो उन्होंने मुनाफा बुक करने के लिए सोना बेचना शुरू कर दिया।

इस तरह बड़े पैमाने पर हुई बिकवाली ने Gold price crash during war को और गहरा कर दिया।

संकट के दौर में नकदी बनी सबसे अहम

वैश्विक संकट के समय अक्सर निवेशक सबसे ज्यादा महत्व नकदी को देते हैं। शेयर बाजार में गिरावट या अन्य निवेश में नुकसान होने पर लोग तुरंत नकदी जुटाने के लिए सोना बेचते हैं।

पश्चिम एशिया के कई हिस्सों में रहने वाले लोगों ने भी इसी रणनीति को अपनाया। इससे बाजार में सोने की आपूर्ति बढ़ गई और कीमतों पर दबाव और बढ़ गया। इस स्थिति ने Gold price crash during war को और स्पष्ट रूप से सामने ला दिया।

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तेल की बढ़ती कीमतें और महंगाई का डर

एक ओर जहां सोना गिर रहा है, वहीं कच्चे तेल की कीमतें लगातार बढ़ रही हैं। तेल महंगा होने से वैश्विक महंगाई का खतरा बढ़ जाता है और केंद्रीय बैंक ब्याज दरें ऊंची बनाए रखते हैं। इससे सोने की मांग और कमजोर पड़ती है। यानी युद्ध, महंगाई और सख्त मौद्रिक नीति का संयुक्त असर Gold price crash during war के रूप में देखने को मिल रहा है।

निवेशकों के लिए क्या संकेत?

सोने की मौजूदा स्थिति निवेशकों के लिए एक बड़ा संकेत है कि पारंपरिक निवेश नियम हर बार एक जैसे काम नहीं करते। बाजार की परिस्थितियां, वैश्विक अर्थव्यवस्था और मुद्रा की ताकत जैसे कारक अब पहले से ज्यादा प्रभावशाली हो चुके हैं।

विशेषज्ञों का कहना है कि लंबी अवधि में सोना अभी भी एक महत्वपूर्ण संपत्ति बना रहेगा, लेकिन अल्पकालिक उतार-चढ़ाव से बचने के लिए निवेशकों को संतुलित पोर्टफोलियो बनाए रखना चाहिए।

बदल रही है ‘सेफ हैवन’ की परिभाषा

हालिया घटनाक्रम ने यह साफ कर दिया है कि केवल युद्ध या राजनीतिक तनाव ही सोने की कीमतें तय नहीं करते। अब डॉलर की स्थिति, ब्याज दरें और वैश्विक नकदी प्रवाह भी उतने ही महत्वपूर्ण हो गए हैं।

इसी वजह से Gold price crash during war ने निवेश जगत में एक नई बहस छेड़ दी है—क्या भविष्य में भी सोना वही पारंपरिक सुरक्षित निवेश बना रहेगा या बाजार की प्राथमिकताएं बदल रही हैं।

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