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Lokhitkranti > बिज़नेस > अमेरिका-ईरान डील के बाद भी क्यों नहीं लौटी रौनक, क्या Fed Policy Impact ने रोक दी तेजी?
बिज़नेस

अमेरिका-ईरान डील के बाद भी क्यों नहीं लौटी रौनक, क्या Fed Policy Impact ने रोक दी तेजी?

Lokhit Kranti
Last updated: 2026-06-18 12:59 pm
Lokhit Kranti Published 2026-06-18
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Fed Policy Impact: अमेरिका और ईरान के बीच हुए अंतरिम समझौते से वैश्विक स्तर पर राहत की उम्मीद बढ़ी है। होर्मुज जलडमरूमध्य के खुलने और ईरानी तेल पर प्रतिबंधों में संभावित ढील के कारण कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट देखने को मिली है। आम तौर पर ऐसी परिस्थितियां भारत जैसे तेल आयातक देशों के लिए सकारात्मक मानी जाती हैं, लेकिन इसके बावजूद भारतीय शेयर बाजार में उम्मीद के मुताबिक तेजी नहीं दिखी। विशेषज्ञों का मानना है कि इस समय बाजार की दिशा केवल तेल की कीमतें नहीं, बल्कि वैश्विक मौद्रिक नीतियां तय कर रही हैं। इसी वजह से Fed Policy Impact निवेशकों के लिए सबसे बड़ा चर्चा का विषय बना हुआ है।

Contents
सुस्त शुरुआत के साथ खुले सेंसेक्स और निफ्टीFed Policy Impact बना निवेशकों की चिंता का कारणआईटी सेक्टर में दबाव, लेकिन मिडकैप शेयरों में दिखी मजबूतीविदेशी बाजारों से मिले मिश्रित संकेतकच्चे तेल की कीमतों में गिरावट से भारत को राहतरुपये में कमजोरी, डॉलर के मुकाबले बढ़ा दबावIPO बाजार में निवेशकों के लिए नए अवसरआगे किस दिशा में जाएगा बाजार?

सुस्त शुरुआत के साथ खुले सेंसेक्स और निफ्टी

गुरुवार सुबह बाजार की शुरुआत बेहद सामान्य रही। सेंसेक्स और निफ्टी में मामूली उतार-चढ़ाव देखने को मिला। पिछले कारोबारी सत्र में अच्छी बढ़त के बाद निवेशकों को उम्मीद थी कि अमेरिका-ईरान समझौते का असर भारतीय बाजार पर सकारात्मक पड़ेगा, लेकिन ऐसा नहीं हुआ।

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विश्लेषकों का कहना है कि बाजार फिलहाल किसी बड़े जोखिम से बचने की रणनीति पर काम कर रहा है। विदेशी संस्थागत निवेशकों का रुख भी सतर्क बना हुआ है, जिससे बड़े शेयरों में खरीदारी का उत्साह कम दिखाई दिया।

Fed Policy Impact बना निवेशकों की चिंता का कारण

अमेरिकी केंद्रीय बैंक फेडरल रिजर्व ने इस बार ब्याज दरों में कोई बदलाव नहीं किया, लेकिन उसके भविष्य के संकेतों ने बाजार की धारणा को प्रभावित कर दिया। फेड अधिकारियों के अनुमान बताते हैं कि आने वाले वर्षों में ब्याज दरें लंबे समय तक ऊंचे स्तर पर रह सकती हैं।

यही वजह है कि वैश्विक निवेशक जोखिम वाले निवेश से दूरी बना रहे हैं। अमेरिका में ऊंची ब्याज दरों का असर उभरते बाजारों पर भी पड़ता है और भारत भी इससे अछूता नहीं है। विशेषज्ञों के अनुसार, फिलहाल बाजार में दिखाई दे रही सुस्ती के पीछे सबसे बड़ा कारण Fed Policy Impact ही है।

आईटी सेक्टर में दबाव, लेकिन मिडकैप शेयरों में दिखी मजबूती

जहां बड़े आईटी शेयरों में बिकवाली देखने को मिली, वहीं मिडकैप और स्मॉलकैप कंपनियों में निवेशकों का भरोसा कायम नजर आया। मेटल, पीएसयू बैंक और कंज्यूमर ड्यूरेबल सेक्टर में अच्छी खरीदारी दर्ज की गई।

बाजार विशेषज्ञों का कहना है कि निवेशक फिलहाल ऐसे क्षेत्रों की तलाश कर रहे हैं, जहां लंबी अवधि में बेहतर रिटर्न की संभावना हो। यही कारण है कि बड़े सूचकांक भले ही दबाव में हों, लेकिन छोटे और मझोले शेयरों में सकारात्मक माहौल बना हुआ है।

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विदेशी बाजारों से मिले मिश्रित संकेत

एशियाई बाजारों की चाल भी पूरी तरह एक जैसी नहीं रही। जापान और ताइवान के बाजारों में अच्छी तेजी दर्ज की गई, जबकि हांगकांग और दक्षिण कोरिया के बाजार दबाव में रहे।

वैश्विक निवेशक इस समय अमेरिका की मौद्रिक नीति, चीन की आर्थिक स्थिति और पश्चिम एशिया के घटनाक्रम पर लगातार नजर बनाए हुए हैं। ऐसे में भारतीय बाजार पर भी इन अंतरराष्ट्रीय संकेतों का असर दिखाई दे रहा है।

कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट से भारत को राहत

अमेरिका-ईरान समझौते का सबसे बड़ा फायदा कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट के रूप में सामने आया है। ब्रेंट क्रूड 80 डॉलर प्रति बैरल के नीचे पहुंच गया है। यह भारत के लिए राहत की खबर है, क्योंकि देश अपनी ऊर्जा जरूरतों का बड़ा हिस्सा आयात के जरिए पूरा करता है।

कम तेल कीमतों का असर महंगाई और व्यापार घाटे पर भी पड़ सकता है। इससे सरकार और रिजर्व बैंक दोनों को आर्थिक मोर्चे पर कुछ राहत मिलने की उम्मीद है। हालांकि, फिलहाल बाजार पर इसका असर सीमित दिखाई दे रहा है क्योंकि निवेशकों का फोकस अभी भी Fed Policy Impact पर बना हुआ है।

रुपये में कमजोरी, डॉलर के मुकाबले बढ़ा दबाव

तेल की कीमतें कम होने के बावजूद रुपये में हल्की कमजोरी देखने को मिली। डॉलर के मुकाबले भारतीय मुद्रा कमजोर होकर खुली। विदेशी पूंजी के प्रवाह में कमी और वैश्विक अनिश्चितता के कारण रुपये पर दबाव बना हुआ है। विशेषज्ञ मानते हैं कि अगर अमेरिकी ब्याज दरें लंबे समय तक ऊंची बनी रहती हैं, तो उभरते बाजारों की मुद्राओं पर दबाव जारी रह सकता है।

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IPO बाजार में निवेशकों के लिए नए अवसर

शेयर बाजार की सुस्ती के बीच प्राइमरी मार्केट में गतिविधियां तेज हैं। दो नए आईपीओ निवेशकों के लिए खुले हैं, जिनमें फ्रेश इक्विटी शेयर जारी किए जा रहे हैं। इसके अलावा SME सेगमेंट में भी कई कंपनियां निवेशकों से पूंजी जुटाने की कोशिश कर रही हैं। मार्केट एक्सपर्ट्स का मानना है कि अस्थिर माहौल के बावजूद अच्छे फंडामेंटल वाली कंपनियां निवेशकों को आकर्षित कर सकती हैं।

आगे किस दिशा में जाएगा बाजार?

आने वाले दिनों में बाजार की दिशा कई वैश्विक और घरेलू कारकों पर निर्भर करेगी। निवेशकों की नजर अमेरिकी फेडरल रिजर्व के अगले कदम, कच्चे तेल की कीमतों, विदेशी निवेशकों की गतिविधियों और कॉर्पोरेट नतीजों पर रहेगी।

फिलहाल यह साफ है कि अमेरिका-ईरान समझौते से तेल बाजार को राहत जरूर मिली है, लेकिन भारतीय शेयर बाजार की चाल तय करने में Fed Policy Impact की भूमिका कहीं अधिक प्रभावशाली बन चुकी है। यही कारण है कि अच्छी खबरों के बावजूद बाजार में अभी वह उत्साह दिखाई नहीं दे रहा, जिसकी उम्मीद निवेशक कर रहे थे।

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