भूमिका
जन्माष्टमी नजदीक आते ही भगवान श्रीकृष्ण से जुड़ी वस्तुओं की मांग बढ़ जाती है। इसी कड़ी में बिहार के मुजफ्फरपुर जिले के एक गांव की कहानी सामने आई है, जहां पीढ़ियों पुराना बांसुरी बनाने का हुनर आज भी जीवित है। खास बात यह है कि इस पारंपरिक व्यवसाय को संभालने में अब घर की महिलाएं भी बढ़-चढ़कर हिस्सा ले रही हैं।
मुर्गियाचक गांव की पहचान
मुजफ्फरपुर के कुढ़नी प्रखंड की सुमेरा पंचायत स्थित मुर्गियाचक गांव बांसुरी बनाने वाले कारीगरों के लिए जाना जाता है। यहां करीब 80 मुस्लिम परिवार कई पीढ़ियों से इस काम से जुड़े हुए हैं। त्योहारों का मौसम इन कारीगर परिवारों के लिए अतिरिक्त कमाई का बड़ा जरिया बनकर आता है, और घर की महिलाएं बांसुरी व अन्य सामान तैयार करने में अहम भूमिका निभा रही हैं जबकि पुरुष सदस्य इन्हें बाजार तक पहुंचाते हैं।
सरकारी योजना से मिली नई पूंजी
मुख्यमंत्री महिला रोजगार योजना के तहत महिलाओं को मिली 10 हजार रुपये की सहायता राशि ने इस पारंपरिक व्यवसाय को नई ताकत दी है। कारीगर अख्तरी खातून के अनुसार पहले पैसों की कमी कारोबार बढ़ाने में सबसे बड़ी रुकावट थी, लेकिन अब इस सहायता से बांस जैसा कच्चा माल आसानी से खरीदा जा रहा है। रिजवान खातून भी बताती हैं कि इस रकम से उनका परिवार बिना कर्ज लिए उत्पादन बढ़ाने में सफल हुआ है।
चार दशक पुराना अनुभव
गांव के बुजुर्ग कारीगर मोहम्मद आलम करीब 40 साल से यह हुनर निभा रहे हैं, जो उन्होंने अपने पिता से सीखा था। उनके मुताबिक पहले के दौर में बांसुरी और बांस से बनी चीजों की मांग काफी अच्छी थी, लेकिन प्लास्टिक के खिलौनों के आने से यह बाजार धीरे-धीरे सिकुड़ गया। इसके बावजूद गांव के परिवारों ने अपना पुश्तैनी काम नहीं छोड़ा।
त्योहारी सीजन में तेज उत्पादन
जन्माष्टमी से पहले मुर्गियाचक में बांसुरी बनाने का काम जोरों पर है। यहां तैयार बांसुरियां मुजफ्फरपुर के अलावा समस्तीपुर, रोसड़ा, जयनगर और खजौली जैसे इलाकों तक पहुंचती हैं। कारीगर नरकट और बांस से पारंपरिक तरीके से इन्हें तैयार करते हैं, और कीमत आकार के हिसाब से लगभग 10 से 50 रुपये तक होती है।
निष्कर्ष
बांसुरी इन परिवारों के लिए सिर्फ आजीविका का साधन नहीं बल्कि भगवान कृष्ण से जुड़ी आस्था का प्रतीक भी है। मुख्यमंत्री महिला रोजगार योजना की मदद से अब महिलाओं की आर्थिक भागीदारी बढ़ी है, जिससे यह सदियों पुराना हुनर एक नई उम्मीद के साथ आगे बढ़ रहा है।


