Lalu Prasad Yadav Z Security: राष्ट्रीय जनता दल (RJD) प्रमुख लालू प्रसाद यादव और बिहार की पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी की सुरक्षा को लेकर चला विवाद अब नए मोड़ पर पहुंच गया है। पहले उनकी सुरक्षा श्रेणी में बदलाव किए जाने के बाद राजनीतिक विवाद खड़ा हुआ था, लेकिन अब सरकार ने दोनों नेताओं की Z कैटेगरी सुरक्षा (Lalu Prasad Yadav Z Security) दोबारा बहाल करने का फैसला किया है।
नई व्यवस्था (Lalu Prasad Yadav Z Security) के तहत दोनों नेताओं को केंद्रीय सुरक्षा कवर के साथ बुलेटप्रूफ वाहन और एस्कॉर्ट सुविधा भी उपलब्ध कराई जाएगी। इस फैसले के बाद राज्य की राजनीति में सुरक्षा व्यवस्था को लेकर फिर चर्चा तेज हो गई है।
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सुरक्षा घटने के बाद लौटा दी थी सरकारी सुरक्षा
कुछ सप्ताह पहले सुरक्षा व्यवस्था की समीक्षा के दौरान लालू प्रसाद यादव और राबड़ी देवी की पहले से मिली सुरक्षा में बदलाव किया गया था। इसके बाद उन्हें पहले जैसी उच्च श्रेणी की सुरक्षा (Lalu Prasad Yadav Z Security) के स्थान पर बिहार विशेष सशस्त्र पुलिस (BSAP) की सुरक्षा उपलब्ध कराई गई थी।
इस फैसले का विरोध करते हुए लालू प्रसाद यादव और राबड़ी देवी ने अपनी शेष सरकारी सुरक्षा भी वापस कर दी थी। इसके बाद कई दिनों तक दोनों नेता बिना सरकारी सुरक्षा के रहे।
इसी क्रम में बिहार विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने भी अपनी सरकारी सुरक्षा वापस करने का निर्णय लिया था। इस दौरान राबड़ी आवास के बाहर पार्टी कार्यकर्ता सुरक्षा व्यवस्था संभालते दिखाई दिए।
राजनीतिक विवाद ने पकड़ा था तूल
सुरक्षा में बदलाव (Lalu Prasad Yadav Z Security) के फैसले के बाद RJD ने सरकार पर गंभीर आरोप लगाए थे। पार्टी का कहना था कि सुरक्षा में कमी का निर्णय राजनीतिक कारणों से लिया गया और विपक्षी नेताओं को निशाना बनाया गया।
RJD के नेताओं ने इसे केवल सुरक्षा का मुद्दा नहीं बल्कि विपक्ष के सम्मान से जुड़ा मामला बताया था। उनका तर्क था कि लालू प्रसाद यादव और राबड़ी देवी दोनों राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री रह चुके हैं और राष्ट्रीय राजनीति में भी उनकी महत्वपूर्ण भूमिका रही है। ऐसे में उनकी सुरक्षा में कमी को उचित नहीं ठहराया जा सकता।
अब फिर मिलेगी CRPF की सुरक्षा
सरकार के नए फैसले (Lalu Prasad Yadav Z Security) के बाद लालू प्रसाद यादव और राबड़ी देवी को फिर से Z कैटेगरी सुरक्षा प्रदान की जाएगी। इस सुरक्षा व्यवस्था में केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (CRPF) के प्रशिक्षित जवान सुरक्षा की जिम्मेदारी संभालेंगे। इसके साथ बुलेटप्रूफ वाहन, एस्कॉर्ट वाहन और चौबीसों घंटे सुरक्षा व्यवस्था भी उपलब्ध रहेगी।
सुरक्षा विशेषज्ञों के अनुसार Z श्रेणी की सुरक्षा में लगभग 20 से 22 प्रशिक्षित सुरक्षा कर्मी शामिल होते हैं, जो आधुनिक हथियारों और विशेष सुरक्षा उपकरणों से लैस रहते हैं।
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क्या है Z कैटेगरी सुरक्षा?
भारत में VIP सुरक्षा व्यवस्था खतरे के स्तर के आधार पर तय की जाती है। Z श्रेणी देश की प्रमुख सुरक्षा श्रेणियों में से एक मानी जाती है। इसमें आमतौर पर शामिल होते हैं-
- प्रशिक्षित कमांडो और सशस्त्र सुरक्षा कर्मी
- 24 घंटे सुरक्षा कवरेज
- बुलेटप्रूफ वाहन
- एस्कॉर्ट वाहन
- आधुनिक हथियारों से लैस सुरक्षा टीम
- यात्रा और सार्वजनिक कार्यक्रमों के दौरान विशेष सुरक्षा प्रबंधन
इस प्रकार की सुरक्षा केवल खतरे के आकलन और सुरक्षा एजेंसियों की सिफारिशों के आधार पर प्रदान की जाती है।
क्या राजनीतिक दबाव बना वजह?
सरकार की ओर से सुरक्षा बहाल करने के फैसले के पीछे आधिकारिक तौर पर कोई राजनीतिक कारण नहीं बताया गया है। हालांकि राजनीतिक गलियारों में इस निर्णय को हालिया विवाद और विपक्ष की तीखी प्रतिक्रिया से जोड़कर देखा जा रहा है।
विश्लेषकों का मानना है कि सुरक्षा जैसे संवेदनशील मामलों में राजनीतिक विवाद से बचने के लिए सरकार ने स्थिति की दोबारा समीक्षा की हो सकती है। हालांकि इस संबंध में संबंधित एजेंसियों की ओर से विस्तृत जानकारी सार्वजनिक नहीं की गई है।
RJD का रुख क्या था?
RJD लगातार यह कहती रही कि सुरक्षा में कटौती से नेताओं की सुरक्षा प्रभावित हो सकती है। पार्टी ने दावा किया था कि इस निर्णय से लालू परिवार के प्रति गलत संदेश गया और सुरक्षा व्यवस्था को राजनीति से नहीं जोड़ा जाना चाहिए।
अब सुरक्षा बहाल होने के बाद माना जा रहा है कि पार्टी इस फैसले को अपनी मांगों की आंशिक स्वीकार्यता के रूप में पेश कर सकती है, हालांकि इस पर आधिकारिक प्रतिक्रिया का इंतजार है।
बिहार की राजनीति में क्यों अहम है यह फैसला?
बिहार में अगले राजनीतिक समीकरणों और चुनावी गतिविधियों को देखते हुए लालू प्रसाद यादव और तेजस्वी यादव लगातार सक्रिय हैं। ऐसे में उनकी सुरक्षा व्यवस्था को लेकर लिया गया हर फैसला राजनीतिक चर्चा का विषय बन जाता है।
सुरक्षा बहाली (Lalu Prasad Yadav Z Security) के इस निर्णय से एक बार फिर राज्य में राजनीतिक बयानबाजी तेज होने की संभावना है। विपक्ष और सत्तापक्ष दोनों इस मुद्दे को अपने-अपने नजरिए से देख रहे हैं।
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